सेना स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड के हवलदार दीपांशु ने वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी में 27 से 29 जुलाई तक आयोजित सीजे वियतनाम 2026 ताइक्वांडो चैंपियनशिप में 68 किलोग्राम वर्ग का स्वर्ण पदक जीतकर भारत का मान बढ़ाया।
इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए हवलदार दीपांशु ने पूरे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट तकनीकी कौशल, फुर्ती और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया। उन्होंने विभिन्न देशों के शीर्ष ताइक्वांडो खिलाड़ियों के खिलाफ मुकाबला करते हुए शानदार प्रदर्शन के दम पर पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया।
यह उपलब्धि सेना स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। बोर्ड ने लगातार ऐसे श्रेष्ठ खिलाड़ी तैयार किए हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
सेना स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड भारतीय सेना के भीतर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान, प्रशिक्षण और सहयोग में अहम भूमिका निभाता है। इसके जरिए खिलाड़ी विभिन्न खेल विधाओं में उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए तैयार होते हैं।
हवलदार दीपांशु की यह सफलता भारतीय सेना की मजबूत खेल संस्कृति को भी सामने लाती है, जहां पेशेवर सैन्य सेवा के साथ-साथ खेलों में उत्कृष्टता को भी प्रोत्साहन दिया जाता है। सेना लंबे समय से भारतीय खेलों की एक बड़ी शक्ति रही है और उसने मुक्केबाजी, कुश्ती, एथलेटिक्स, निशानेबाजी, तीरंदाजी, तलवारबाजी और ताइक्वांडो जैसी विधाओं में पदक विजेता दिए हैं।
सीजे वियतनाम 2026 ताइक्वांडो चैंपियनशिप में एशिया और अन्य भाग लेने वाले देशों के प्रमुख खिलाड़ी शामिल हुए, जिससे प्रतियोगिता बेहद प्रतिस्पर्धी रही। ऐसे मजबूत मुकाबले में स्वर्ण पदक जीतना हवलदार दीपांशु के कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
उनकी यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो में भारत की बढ़ती साख को भी मजबूत करती है। हाल के वर्षों में भारतीय खिलाड़ियों ने महाद्वीपीय और वैश्विक आयोजनों में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसमें बेहतर प्रशिक्षण, वैज्ञानिक पद्धतियों और सेना स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड जैसी संस्थाओं के सहयोग की अहम भूमिका रही है।
यह स्वर्ण पदक देशभर के युवा ताइक्वांडो खिलाड़ियों को प्रेरित करने वाला माना जा रहा है। साथ ही, यह भी रेखांकित करता है कि सशस्त्र बल विश्वस्तरीय खेल प्रतिभा विकसित करने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
हवलदार दीपांशु की सफलता को भारतीय सेना और देश के लिए गर्व का क्षण बताया जा रहा है। यह उपलब्धि सेना स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड के अंतरराष्ट्रीय खेल उपलब्धियों से भरे रिकॉर्ड में एक और सम्मान जोड़ती है।