अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले में कर्तव्य पालन के दौरान प्राण न्योछावर करने वाले हवलदार जांगखोकै कुकी का नागालैंड के मेदज़िफेमा में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। यह समारोह गंभीर और श्रद्धापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
अंतिम विदाई के दौरान वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व, साथी सैनिकों, परिजनों और शुभचिंतकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी ने उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र सेवा को याद किया।
स्पीयर कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग और असम राइफल्स के महानिदेशक ने हवलदार जांगखोकै कुकी को श्रद्धांजलि दी और उनके सम्मान में पुष्पचक्र अर्पित किए। समारोह में उस सैनिक के प्रति सशस्त्र बलों के सम्मान की झलक दिखाई दी, जिन्होंने कठिन परिचालन वातावरण में सर्वोच्च बलिदान दिया।
हवलदार जांगखोकै कुकी ने अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए प्राण गंवाए। यह क्षेत्र भारत की उत्तर-पूर्वी सीमा पर स्थित है, जहां सेना और असम राइफल्स के जवान दुर्गम भूभाग में तैनात रहते हैं।
सशस्त्र बलों ने उन्हें वीरता, पेशेवर दक्षता और निस्वार्थ कर्तव्य-समर्पण के लिए याद किया। सैन्य अधिकारियों ने कहा कि उनका साहस और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।
मेदज़िफेमा में हुए अंतिम संस्कार में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उन्हें विदाई दी गई। यह उस सैनिक को भावपूर्ण अंतिम प्रणाम था, जिसने अंतिम सांस तक देश की सेवा की।
हवलदार जांगखोकै कुकी का बलिदान उन भारतीय सैनिकों की लंबी परंपरा में एक और नाम जोड़ता है, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में अपना जीवन समर्पित किया। उनका स्मरण और कर्तव्य के प्रति समर्पण परिवार, साथियों और देश के लिए गौरव और प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।