मुख्यालय समन्वित रक्षा सेवा ने 1 अक्तूबर 2026 को अपना रजत जयंती वर्ष मनाया। यह आयोजन 1 अक्तूबर 2001 को इसकी स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हुआ। इस अवसर को ‘त्रि-सेवा दिवस’ के रूप में मनाया गया और इसका विषय “साझेदारी एवं एकीकरण के माध्यम से भविष्य की तैयारी” रहा।
रजत जयंती समारोह के हिस्से के रूप में मुख्यालय समन्वित रक्षा सेवा ने ‘त्रिशक्ति मंथन’ का आयोजन किया। इसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और सैन्य मामलों के विभाग के सचिव जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि तथा समन्वित रक्षा सेवा प्रमुख एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने संबोधित किया।
विचार-विमर्श में संयुक्त संचालन सिद्धांतों, संयुक्त प्रशिक्षण ढांचों, समन्वित अभ्यासों तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत तंत्रों के बेहतर समन्वय के जरिये परिचालन तैयारी में मुख्यालय समन्वित रक्षा सेवा के योगदान को रेखांकित किया गया।
समारोह के दौरान रजत जयंती पुस्तक का भी विमोचन किया गया, जिसमें पिछले 25 वर्षों में मुख्यालय समन्वित रक्षा सेवा के विकास और उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है। साथ ही, संगठन की स्थापना के बाद के प्रमुख पड़ावों को दर्शाने वाली एक फिल्म भी जारी की गई।
श्रेष्ठ योगदान के सम्मान में कर्मियों को प्रतिष्ठित सीडीएस यूनिट प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इन प्रशस्तियों में रक्षा बलों के भीतर साझेदारी और एकीकरण के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में उनके योगदान को मान्यता दी गई।
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक एवं संग्रहालय में भी पुष्पचक्र अर्पण समारोह आयोजित किया गया, ताकि राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि दी जा सके।
पिछले ढाई दशकों में मुख्यालय समन्वित रक्षा सेवा ने साइबर, अंतरिक्ष और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए रक्षा बलों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संगठन ने रक्षा में आत्मनिर्भरता की दिशा में स्वदेशी क्षमता विकास को तेज करने के लिए अनुसंधान संस्थानों, शिक्षाविदों और उद्योग के साथ सहयोग को भी बढ़ावा दिया है।
मुख्यालय समन्वित रक्षा सेवा ने रण संवाद, संयुक्त कमांडर सम्मेलन और संयुक्त संचालन समीक्षा एवं मूल्यांकन कार्यक्रम जैसे मंचों के जरिये साझेदारी को मजबूत करने वाले संस्थागत तंत्रों को सुदृढ़ किया है। ये मंच समकालीन सुरक्षा चुनौतियों पर व्यवस्थित विचार-विमर्श को संभव बनाते हैं और स्थल, समुद्री, वायु, अंतरिक्ष, साइबर और संज्ञानात्मक क्षेत्रों में संयुक्त युद्ध क्षमता बढ़ाने में योगदान देते हैं।
25 वर्षों में यह संगठन तीनों सेनाओं के बीच साझेदारी, एकीकरण और तालमेल को मजबूत करने वाले संस्थान के रूप में विकसित हुआ है। इसकी गतिविधियां क्षमता वृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के अनुरूप युद्ध शक्ति के संयुक्त उपयोग पर केंद्रित रही हैं।
रजत जयंती समारोह ने इस संस्थागत विकास पर विचार करने का अवसर प्रदान किया और भविष्य की तैयारी के लिए अधिक साझेदारी तथा एकीकरण की निरंतर आवश्यकता को रेखांकित किया। समारोह का विषय भी रक्षा बलों को उभरती सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार करने और विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई की व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर केंद्रित रहा।
मुख्यालय समन्वित रक्षा सेवा की 25वीं वर्षगांठ ने इस दिशा में ढाई दशकों के प्रयासों को चिह्नित किया, जिनका उद्देश्य तीनों सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाना, संयुक्त ढांचे विकसित करना और अधिक एकीकरण एवं तालमेल के माध्यम से भारत की परिचालन तैयारी को सुदृढ़ करना रहा है।