विश्व डायरेक्टरी ऑफ़ मॉडर्न मिलिटरी एयरक्राफ्ट (डब्ल्यूडीएमएमए) की 2026 वैश्विक वायुशक्ति रैंकिंग में भारतीय वायु सेना को एक बार फिर दुनिया की तीसरी सबसे शक्तिशाली वायुसेना स्थान दिया गया है। इसके साथ ही भारत ने 2022 के बाद पाँचवीं बार चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स (पीएलएएएफ) से आगे अपनी स्थिति बनाए रखी है।
डब्ल्यूडीएमएमए सैन्य विमानन क्षमताओं का आकलन अपने स्वामित्व वाले ट्रू वैल्यू रेटिंग (टीवीआर) प्रणाली के आधार पर करता है। इसमें बेड़े का आकार, विमान संरचना, आधुनिकीकरण, रसद सहायता, विशेष मिशन क्षमताएँ और स्वदेशी एयरोस्पेस निर्माण शामिल हैं। यह रैंकिंग 103 देशों की 129 वायु शाखाओं को कवर करती है और दुनिया भर में 48,000 से अधिक सैन्य विमानों की निगरानी करती है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायु सेना के पास 1,716 विमानों का बेड़ा है। इसमें 542 लड़ाकू विमान, 498 हेलीकॉप्टर, 282 परिवहन विमान, 374 प्रशिक्षण विमान और 20 विशेष मिशन प्लेटफॉर्म शामिल हैं, जिनमें वायुजनित प्रारंभिक चेतावनी और हवाई ईंधन भराई से जुड़े साधन भी हैं। आकलन में भारत के जारी आधुनिकीकरण कार्यक्रमों और घरेलू एयरोस्पेस क्षमताओं को भी शामिल किया गया है।
हालाँकि वैश्विक स्तर पर ऊँची रैंकिंग के बावजूद रिपोर्ट ने कई क्षमता संबंधी कमियों की ओर भी संकेत किया है। भारतीय वायु सेना वर्तमान में 29 लड़ाकू स्क्वाड्रनों के साथ काम कर रही है, जबकि स्वीकृत संख्या 42 स्क्वाड्रनों की है। इससे लड़ाकू विमानों की एक बड़ी कमी बनी हुई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वायुजनित प्रारंभिक चेतावनी और नियंत्रण (एईडब्ल्यू&सी) विमान, मध्य-आकाश ईंधन भरने वाले विमान, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्लेटफॉर्म और खुफिया, निगरानी, लक्ष्य अधिग्रहण और टोही (आईएसटीएआर) प्रणालियों की अतिरिक्त आवश्यकता है। इन कमियों को दूर करने के लिए भारतीय वायु सेना बड़े आधुनिकीकरण अभियान पर काम कर रही है।
इस अभियान के तहत 180 तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमानों को शामिल करने, 114 अतिरिक्त राफेल विमान खरीदने और नए एईडब्ल्यू&सी, टैंकर तथा आईएसटीएआर प्लेटफॉर्म हासिल करने की योजना है। साथ ही जगुआर, मिराज 2000 और मिग-29 जैसे पुराने बेड़े को आने वाले दशक में चरणबद्ध तरीके से सेवा से हटाया जाना है।
नवीनतम रैंकिंग भारतीय वायु सेना की बढ़ती परिचालन क्षमता को रेखांकित करती है, लेकिन यह भी स्पष्ट करती है कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने और बदलते सामरिक परिवेश में वायु श्रेष्ठता बनाए रखने के लिए निरंतर आधुनिकीकरण आवश्यक है।