भारतीय वायु सेना ने अग्निवीर वायु भर्ती के पहले बैच के 2,850 कर्मियों में से 712 को नियमित संवर्ग में शामिल करने के लिए चुना है। सूत्रों के अनुसार यह संख्या पूरे बैच का लगभग 25 प्रतिशत है और अग्निपथ योजना के प्रावधानों के अनुरूप है।
इस योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जून 2022 में शुरू किया था। इसके तहत अग्निवीरों की भर्ती चार वर्ष की निश्चित अवधि के लिए की जाती है और प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत कर्मियों को निर्धारित मानकों के आधार पर नियमित संवर्ग में लिया जा सकता है। इनमें सेवा अवधि के दौरान प्रदर्शन और संगठनात्मक जरूरतें शामिल हैं।
बाकी कर्मी अपनी निर्धारित सेवा पूरी करने के बाद सेना से बाहर हो जाएंगे। सूत्रों ने बताया कि पहले बैच के अग्निवीरों को चयन के नतीजों की व्यक्तिगत रूप से जानकारी दे दी गई है। हालांकि वायु सेना ने अभी तक इन आंकड़ों की कोई औपचारिक सार्वजनिक घोषणा नहीं की है, लेकिन चार वर्ष की अवधि समाप्त होने से पहले यह प्रक्रिया लगभग पूरी होने वाली है।
अग्निवीर वायु के पहले बैच को 30 दिसंबर 2022 को भारतीय वायु सेना में शामिल किया गया था। लगभग 2,850 कर्मियों का प्रशिक्षण बेलगावी स्थित एयरमेन प्रशिक्षण विद्यालय में शुरू हुआ था, जिसमें 2,675 कर्मियों ने 22 सप्ताह का प्रारंभिक पाठ्यक्रम पूरा कर 2023 के जून की शुरुआत में पासिंग आउट की थी। नौसेना और वायु सेना के पहले बैचों की सेवा अवधि अक्टूबर–नवंबर 2026 में पूरी होने की बात कही गई है।
जिन कर्मियों का चयन नियमित सेवा के लिए नहीं हुआ है, उन्हें चार वर्ष की सेवा पूरी होने पर कर-मुक्त सेवा निधि पैकेज मिलेगा। इसमें अग्निवीर के मासिक अंशदान, सरकार के समान अंशदान और अर्जित ब्याज को शामिल किया जाता है। इसे आम तौर पर लगभग 11.71 लाख रुपये बताया जाता है। सेवा के दौरान अग्निवीरों को 48 लाख रुपये का गैर-अंशदायी जीवन बीमा कवर भी मिलता है। चार वर्ष की अवधि पूरी करने के बाद बाहर निकलने वाले कर्मियों को पेंशन या उपदान लाभ नहीं मिलता। उन्हें कौशल प्रमाणपत्र भी दिए जाते हैं, जिनमें उनके प्रशिक्षण और अर्जित दक्षताओं की मान्यता होती है।
सरकार ने पुनर्वास के लिए कई उपाय भी शुरू किए हैं। जुलाई 2026 में गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और असम राइफल्स में आरक्षक (सामान्य ड्यूटी) और राइफलमैन पदों की रिक्तियों में पात्र पूर्व अग्निवीरों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी।
इन प्रावधानों में ऊपरी आयु सीमा में तीन वर्ष की छूट, और पहले बैच के लिए अतिरिक्त पांच वर्ष की छूट शामिल है। शारीरिक मानक परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षण और लिखित परीक्षा से भी छूट दी गई है। गृह मंत्रालय के तहत एक अलग पूर्व-अग्निवीर प्रकोष्ठ इन अवसरों के समन्वय का काम कर रहा है।
अलग से, रक्षा मंत्रालय ने भारतीय तटरक्षक बल, रक्षा नागरिक पदों और 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों की निर्दिष्ट रिक्तियों में पात्र अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दी है। छत्तीसगढ़ और असम सहित कुछ राज्यों ने पुलिस और संबद्ध पदों में आरक्षण की घोषणा की है।
पहले सेवा चक्र का पूरा होना अग्निपथ योजना की समीक्षा के साथ भी जुड़ा है। सेना, नौसेना और भारतीय वायु सेना ने 2022 से अपने कार्यान्वयन अनुभव के आधार पर सैन्य कार्य विभाग को अपनी सिफारिशें भेजी हैं। इन सिफारिशों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है और सक्षम प्राधिकारी के किसी निर्णय तक मौजूदा 25 प्रतिशत प्रतिधारण सीमा ही लागू नीति बनी हुई है।
पहले की रिपोर्टों में संकेत दिया गया था कि सेवाओं ने परिचालन और प्रशिक्षण संबंधी जरूरतों, विशेष रूप से तकनीकी ट्रेडों के लिए, अधिक प्रतिधारण दर की संभावना पर विचार किया था, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक संशोधन अधिसूचित नहीं किया गया है।
भारतीय वायु सेना द्वारा 712 अग्निवीर वायु कर्मियों को नियमित संवर्ग में शामिल करने का निर्णय अग्निपथ के तहत वायु सेना में स्थायी समावेशन की दिशा में पहला ठोस परिणाम माना जा रहा है। इस बैच का अनुभव, साथ ही बड़ी संख्या में सेवा छोड़ने वाले कर्मियों के पुनर्वास के नतीजे, आगे योजना के आकलन में अहम भूमिका निभा सकते हैं।