भारतीय सेना ने अपने अत्यंत विशिष्ट पूर्व सैनिक लेफ्टिनेंट कर्नल प्रेम प्रकाश तलवार (सेवानिवृत्त) के 100वें जन्मदिन पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। सेवा, सम्मान और देशभक्ति को समर्पित इस शतकीय जीवन अवसर पर दक्षिणी कमान के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर, एवीएसएम, वीएसएम, तथा दक्षिणी कमान के सभी रैंकों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।
मई 1950 में उन्हें रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी में कमीशन मिला था। भारत के सैन्य इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर में उन्होंने 27 वर्षों तक देश की सेवा विशिष्टता के साथ की और मई 1977 में सक्रिय सेवा से सेवानिवृत्त हुए। उनकी अटूट प्रतिबद्धता, पेशेवर दक्षता और समर्पण आज भी सैनिक पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।
इस विशेष अवसर को स्मरणीय बनाने के लिए रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी के सेवारत और पूर्व अधिकारी, जूनियर कमीशंड अधिकारी और अन्य रैंकों के जवान एक साथ जुटे। उन्होंने शतायु पूर्व सैनिक के जीवन और सेवाओं का सम्मान किया। यह आयोजन आर्टिलरी समुदाय के भीतर गहरे आदर और स्थायी संबंध को दर्शाता है।
रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी के महानिदेशक और अग्निबाज़ डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग की ओर से लेफ्टिनेंट कर्नल तलवार को उनके विशिष्ट सैन्य करियर और रेजिमेंट तथा भारतीय सेना में दिए गए अमूल्य योगदान के लिए औपचारिक रूप से सम्मानित किया गया। यह सम्मान इस बात को रेखांकित करता है कि सेना अपने पूर्व सैनिकों की सेवा और बलिदान को निरंतर मान्यता देती है।
अपने पूरे करियर में लेफ्टिनेंट कर्नल तलवार ने साहस, अनुशासन, निष्ठा और निस्वार्थ सेवा के मूल्यों को साकार किया। स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों में कमीशन प्राप्त करने से लेकर दशकों की समर्पित सैन्य सेवा पूरी करने तक का उनका सफर उस पूरी पीढ़ी के सैनिकों की प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्होंने आधुनिक भारतीय सेना की नींव मजबूत की।
यह समारोह भारतीय सेना की उन परंपराओं की भी याद दिलाता है, जिनके तहत वह अपने पूर्व सैनिकों के साथ जीवनभर का संबंध बनाए रखती है। ऐसे प्रयासों के माध्यम से सेना उन सभी लोगों का सम्मान करती रहती है, जिन्होंने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया है, ताकि उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों तक याद रखी जा सकें।
भारतीय सेना ने इस ऐतिहासिक अवसर पर लेफ्टिनेंट कर्नल प्रेम प्रकाश तलवार को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके अच्छे स्वास्थ्य, सुख और कल्याण की कामना की। ‘शतायु गनर’ के रूप में दूसरे शतक में प्रवेश करते हुए उनका जीवन कर्तव्य, सम्मान और राष्ट्र के प्रति अटूट सेवा का प्रेरक उदाहरण बना हुआ है।