भारतीय सेना की पश्चिमी कमान ने पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक केंद्रित बातचीत की, जिसमें सीमा के पार ड्रोन के जरिये नशीले पदार्थों की तस्करी की बढ़ती चुनौती पर चर्चा की गई। इस दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
इस बातचीत में भारतीय सेना और पंजाब पुलिस के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में नारको-ड्रोन गतिविधियों की बदलती प्रकृति, तकनीक आधारित निगरानी और उभरती सीमा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए समन्वित प्रतिक्रिया की जरूरत पर विचार किया गया।
पंजाब के विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) पीके सिन्हा और पंजाब की मादक पदार्थ निरोधक कार्यबल के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक भी चर्चा में शामिल हुए। अधिकारियों ने ड्रोन सहायता से होने वाली नशीले पदार्थों की तस्करी के बदलते स्वरूप पर अपने दृष्टिकोण साझा किए।
बैठक में सीमा क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार एजेंसियों के बीच समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने, तकनीक के बेहतर एकीकरण और संचालनात्मक तालमेल बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई।
लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह, एवीएसएम, एसएम**, सेना कमांडर, पश्चिमी कमान ने उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में एजेंसियों के बीच करीबी समन्वय के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने सीमा पर ड्रोन से जुड़े खतरों का प्रभावी उत्तर देने के लिए तकनीक-आधारित निगरानी और संयुक्त कार्रवाई को आवश्यक बताया।
सस्ते और आसानी से उपलब्ध मानवरहित हवाई तंत्रों की बढ़ती उपलब्धता ने संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में तैनात सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौतियां खड़ी की हैं। छोटे ड्रोन नशीले पदार्थों और अन्य प्रतिबंधित सामग्री की ढुलाई के लिए उपयोग किए जा सकते हैं, जिससे तस्करी नेटवर्क में शामिल लोगों की सीधी जोखिम-स्थिति कम हो जाती है।
पंजाब की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन के जरिये सीमा पार तस्करी के मामलों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता लगातार बढ़ी है। छोटे आकार, रात में उड़ान भरने की क्षमता और कम ऊंचाई पर संचालन की वजह से इनकी पहचान और रोकथाम मुश्किल हो सकती है, खासकर तब जब व्यापक सीमा क्षेत्र में ऐसी कोशिश की जाए।
ऐसी गतिविधियों से निपटने के लिए कई संगठनों के सहयोग की जरूरत होती है। भारतीय सेना, सीमा सुरक्षा बल, पंजाब पुलिस, खुफिया एजेंसियां और विशेष मादक पदार्थ निरोधक इकाइयां अपनी-अपनी संचालनात्मक क्षमताओं और सूचनाओं के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों की अधिक व्यापक समझ बनाने में योगदान दे सकती हैं।
ड्रोन से जुड़े मामलों में सूचना का त्वरित आदान-प्रदान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। मानवरहित हवाई वाहन की पहचान के बाद उसकी निगरानी, रोकथाम, संभावित गिराए गए स्थान की पहचान और फिर जमीनी खोज की प्रक्रिया जरूरी हो सकती है। इसके बाद कानून-व्यवस्था एजेंसियां बरामद सामग्री से जुड़े लोगों या नेटवर्क की जांच कर सकती हैं।
सीमा सुरक्षा में तकनीक का महत्व भी लगातार बढ़ रहा है। निगरानी प्रणालियां, ड्रोन-रोधी तकनीक, संवेदक और अन्य निगरानी क्षमता सुरक्षा बलों को अनधिकृत हवाई गतिविधियों की पहचान और उन पर प्रतिक्रिया देने में मदद कर सकती हैं।
साथ ही, केवल तकनीक से इस चुनौती का समाधान नहीं हो सकता। सीमा सुरक्षा, पुलिसिंग, खुफिया जुटाव और मादक पदार्थ निरोधक कार्रवाई के लिए जिम्मेदार एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय जरूरी है, ताकि अलग-अलग स्तर पर मिली जानकारी को तस्करी नेटवर्क के खिलाफ व्यापक कार्रवाई में बदला जा सके।
इस बातचीत में पंजाब पुलिस की मादक पदार्थ निरोधक कार्यबल की भागीदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण रही, क्योंकि मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए तत्काल सीमा क्षेत्र से आगे बढ़कर कार्रवाई की जरूरत होती है। बरामद खेपों की जांच से स्थानीय मददगारों, वितरण नेटवर्क, वित्तीय संबंधों और तस्करी श्रृंखला के अन्य पहलुओं का पता लगाया जा सकता है।
पश्चिमी कमान मुख्यालय में हुई यह बातचीत तेजी से बदलती ड्रोन तकनीक से पैदा होने वाले सुरक्षा खतरों के खिलाफ एकीकृत प्रतिक्रिया विकसित करने पर बढ़ते जोर को दर्शाती है। पश्चिमी कमान का भारत के पश्चिमी क्षेत्र में अहम संचालनात्मक दायित्व है, जबकि पंजाब पुलिस और विशेष राज्य एजेंसियां राज्य के भीतर व्यापक कानून-व्यवस्था और खुफिया नेटवर्क संभालती हैं।
इन संगठनों के बीच बेहतर समन्वय सीमा निगरानी को जमीनी पुलिसिंग और जांच से जोड़ने में मदद कर सकता है। नियमित संवाद सैन्य, पुलिस और विशेष सुरक्षा एजेंसियों के बीच साझा कार्यप्रणाली बनाने, सूचना साझाकरण सुधारने और संदिग्ध ड्रोन गतिविधि मिलने पर प्रतिक्रिया समय घटाने में सहायक हो सकता है।
इस प्रकार पश्चिमी कमान की यह बातचीत ड्रोन समर्थित नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है। अंतर-एजेंसी समन्वय, तकनीक आधारित निगरानी, खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान और संयुक्त संचालनात्मक कार्रवाई के जरिये सुरक्षा एजेंसियां भारत की पश्चिमी सीमा पर उभरते खतरों का अधिक प्रभावी उत्तर देने का प्रयास कर रही हैं।