भारतीय सेना की लेफ्टिनेंट कर्नल प्रीति पोनिया ने लद्दाख की चुनौतीपूर्ण ऊंचाई पर शानदार खेल प्रदर्शन करते हुए लद्दाख मैराथन 2026 की हाफ मैराथन 2 घंटे, 10 मिनट और 43 सेकंड में पूरी की। आयोजन के समय निर्धारण साझेदार की ओर से दी गई अस्थायी समय-सूचना के अनुसार यह उनका प्रदर्शन रहा।
आगरा की मूल निवासी और इस समय लेह में तैनात लेफ्टिनेंट कर्नल प्रीति पोनिया ने 21.0975 किलोमीटर की हाफ मैराथन में बिब नंबर 25447 के साथ भाग लिया। उनके प्रदर्शन के आधार पर उन्हें अपनी श्रेणी में स्वर्ण पदक मिलने की बात कही गई, जिससे सेना अधिकारी और सहनशक्ति धावक के रूप में उनकी उपलब्धियों में एक और उपलब्धि जुड़ गई।
लद्दाख मैराथन को विशेष रूप से कठिन माना जाता है क्योंकि यह क्षेत्र ऊंचाई पर स्थित है। लेह समुद्र तल से लगभग 11,500 फीट की ऊंचाई पर है, जहां ऑक्सीजन की उपलब्धता कम होने के कारण धावकों पर समुद्र तल के करीब होने वाली दौड़ों की तुलना में कहीं अधिक दबाव पड़ता है।
कठिन परिस्थितियों के बावजूद लेफ्टिनेंट कर्नल प्रीति ने 21.1 किलोमीटर की दूरी 02:10:43 के अस्थायी समय में पूरी की। इस प्रदर्शन के लिए निरंतर शारीरिक सहनशक्ति, सही गति बनाए रखना और ऊंचाई पर दौड़ने से जुड़ी शारीरिक चुनौतियों से निपटने की क्षमता आवश्यक थी।
उनकी उपलब्धि यह भी दर्शाती है कि सैन्य सेवा के दौरान कितनी शारीरिक तैयारी और मानसिक दृढ़ता विकसित होती है। लेह में सेवा देना ऊंचाई, कठिन भूभाग और कठोर जलवायु परिस्थितियों वाले वातावरण में काम करना है, और मैराथन पथ पर उनका प्रदर्शन इन्हीं गुणों को प्रतिस्पर्धी खेल मंच पर सामने लाया।
आगरा के लिए भी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रीति पोनिया की यह उपलब्धि गर्व का क्षण है। उनकी सफलता युवा खिलाड़ियों और रक्षा सेवाओं में जाने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए प्रेरक उदाहरण है, जो दिखाती है कि अनुशासन, तैयारी और दृढ़ता से कठिन परिस्थितियों में भी अच्छा प्रदर्शन किया जा सकता है।
ऊंचाई पर सहनशक्ति आधारित दौड़ विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण होती है क्योंकि कम वायुदाब शरीर को उपलब्ध ऑक्सीजन की मात्रा घटा देता है। लंबी दूरी के अनुभवी धावकों के लिए भी लद्दाख जैसी ऊंचाई पर अपनी सामान्य गति बनाए रखना काफी कठिन हो जाता है।
ऐसे में दो घंटे से कुछ अधिक समय में हाफ मैराथन पूरी करना एक उल्लेखनीय प्रदर्शन माना जा रहा है। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रीति की यह दौड़ एक खिलाड़ी की सहनशक्ति और सैन्य सेवा से जुड़ी अनुशासन तथा दृढ़ता का संयोजन रही।
लद्दाख मैराथन 2026 में उनकी सफलता भारतीय सशस्त्र बलों के कर्मियों की उन अनेक खेल उपलब्धियों में भी जुड़ गई है, जो नियमित सैन्य जिम्मेदारियों के साथ-साथ सहनशक्ति दौड़ों, पर्वतारोहण अभियानों और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहते हैं।
आगरा से लद्दाख की ऊंची धरती तक पहुंची लेफ्टिनेंट कर्नल प्रीति पोनिया की यह उपलब्धि दृढ़ता और खेल उत्कृष्टता की कहानी के रूप में सामने आई है। उनका स्वर्ण पदक प्रदर्शन भारतीय सेना अधिकारी के रूप में नियमित सैन्य कर्तव्यों से आगे बढ़कर उत्कृष्टता दिखाने का एक और उदाहरण माना जा रहा है।