लेफ्टिनेंट जनरल ए.वी.एस. राठी, जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) कोणार्क कोर ने औंध सैन्य स्टेशन का दौरा किया और विदेशी प्रशिक्षण एवं सैन्य-नागरिक समन्वय (एमसीएफ) प्रशिक्षण केंद्र पर बुनियादी ढांचे तथा प्रशिक्षण सुविधाओं की समीक्षा की।
दौरे के दौरान कोर कमांडर ने प्रशिक्षण केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं का आकलन किया और प्रशिक्षण मानकों को मजबूत करने तथा सैन्य और नागरिक सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। इस दौरान विभिन्न सुरक्षा संगठनों के कर्मियों के लिए उपयुक्त विशिष्ट प्रशिक्षण ढांचा विकसित करने के महत्व पर बल दिया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल ए.वी.एस. राठी ने शिवनेरी ब्रिगेड की व्यावसायिकता की सराहना की और गठन द्वारा किए जा रहे सैन्य-नागरिक समन्वय पहलों की प्रशंसा की। इन पहलों का उद्देश्य सशस्त्र बलों और नागरिक एजेंसियों के बीच समन्वय, परस्पर संचालन क्षमता और आपसी समझ को मजबूत करना है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां संयुक्त प्रतिक्रिया और विशिष्ट क्षमताओं की आवश्यकता होती है।
जनरल ऑफिसर ने केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के कर्मियों से भी संवाद किया। इस बातचीत से उन्हें प्रशिक्षुओं के प्रशिक्षण अनुभव को समझने और उनकी व्यावसायिक क्षमता बढ़ाने के प्रयासों को मान्यता देने का अवसर मिला।
संवाद के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल ए.वी.एस. राठी ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे सीआईएसएफ कर्मियों में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वालों को सम्मानित भी किया। व्यक्तिगत प्रदर्शन को मिली यह मान्यता प्रतिभागियों के बीच उत्कृष्टता, अनुशासन और निरंतर सुधार की संस्कृति को प्रोत्साहित करने वाली रही।
एमसीएफ प्रशिक्षण केंद्र में चल रही प्रशिक्षण पहलकदमियां सशस्त्र बलों और अन्य राष्ट्रीय सुरक्षा संगठनों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग के बढ़ते महत्व को दर्शाती हैं। आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों में एजेंसियों के बीच प्रभावी तालमेल की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है, जिससे परस्पर संचालन क्षमता, साझा समझ और समन्वित प्रतिक्रिया तंत्र राष्ट्रीय तैयारी के महत्वपूर्ण घटक बन गए हैं।
कोर कमांडर ने शिवनेरी ब्रिगेड द्वारा उच्च प्रशिक्षण मानक बनाए रखने और परिचालन तैयारी पर निरंतर ध्यान देने की भी सराहना की। प्रशिक्षण ढांचे और कर्मियों की दक्षता का नियमित मूल्यांकन अत्यंत आवश्यक है, ताकि गठन बदलती परिचालन आवश्यकताओं का प्रभावी ढंग से सामना कर सके।
सैन्य-नागरिक समन्वय पर दिया गया जोर सेना के उस दृष्टिकोण को भी रेखांकित करता है, जिसके तहत नागरिक एजेंसियों के साथ सहयोग मजबूत कर जटिल सुरक्षा और आपात स्थितियों से निपटने के लिए एकीकृत ढांचा विकसित किया जा रहा है। ऐसे समन्वय से बेहतर तालमेल, तेज प्रतिक्रिया और विशिष्ट क्षमताओं के अधिक प्रभावी उपयोग में मदद मिल सकती है।
लेफ्टिनेंट जनरल ए.वी.एस. राठी के इस दौरे ने आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं को बनाए रखने और कर्मियों को यथार्थवादी तथा व्यावसायिक रूप से प्रासंगिक प्रशिक्षण वातावरण उपलब्ध कराने के महत्व को भी दोहराया। बुनियादी ढांचे, विशिष्ट प्रशिक्षण और प्रदर्शन की सराहना पर केंद्रित यह दृष्टिकोण अधिक चुस्त, सक्षम और परिचालन रूप से तैयार बलों के निर्माण के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
दौरे के अंत में कोर कमांडर ने प्रशिक्षण पहलों में शामिल गठन और कर्मियों के प्रयासों की सराहना की। उनके अवलोकन और संवाद ने समकालीन सुरक्षा परिवेश की चुनौतियों का सामना करने के लिए व्यावसायिकता, उच्च प्रशिक्षण मानकों, अंतर-एजेंसी सहयोग और सतत परिचालन तैयारी के महत्व को और मजबूत किया।