बेंगलुरु, 20 अगस्त 2026: बेंगलुरु स्थित कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस सेंटर एंड स्कूल में आयोजित अधिकारियों के प्रोवोस्ट पाठ्यक्रम का गुरुवार को समापन हुआ। इस दौरान भारत और पाँच मित्र विदेशी देशों के 30 अधिकारियों ने विशेष व्यावसायिक प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।
इस अंतिम बैच में भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस के 23 अधिकारी और पड़ोसी तथा साझेदार देशों के सात अधिकारी शामिल थे। अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों में श्रीलंका सेना के चार अधिकारी तथा नेपाल सेना, म्यांमार सेना और रॉयल भूटान सेना के एक-एक अधिकारी शामिल थे।
इनकी भागीदारी से पाठ्यक्रम को मजबूत अंतरराष्ट्रीय स्वरूप मिला और व्यावसायिक ज्ञान, परिचालन अनुभव तथा सैन्य पुलिसिंग की पद्धतियों के आदान-प्रदान का मंच भी उपलब्ध हुआ। मित्र विदेशी सेनाओं के अधिकारियों का भारतीय समकक्षों के साथ प्रशिक्षण लेना लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग को भी मजबूती देने वाला रहा।
पाठ्यक्रम के दौरान अधिकारियों को तीन मुख्य क्षेत्रों में केंद्रित प्रशिक्षण दिया गया। इनमें विधि-प्रवर्तन, जांच और यातायात प्रबंधन शामिल थे। ये तीनों क्षेत्र शांति-कालीन तैनाती और परिचालन वातावरण में प्रोवोस्ट तथा सैन्य पुलिस की जिम्मेदारियों के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
विधि-प्रवर्तन क्षेत्र का उद्देश्य अधिकारियों की यह क्षमता बढ़ाना था कि वे सैन्य अनुशासन बनाए रखें, व्यवस्था कायम रखें और प्रोवोस्ट हस्तक्षेप वाली स्थितियों में पेशेवर ढंग से कार्रवाई करें। प्रशिक्षण में अधिकार के जिम्मेदार उपयोग, निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन और कर्तव्यों के निर्वहन में निष्पक्षता व निष्ठा के महत्व पर जोर दिया गया।
जांच क्षेत्र के तहत अधिकारियों ने व्यवस्थित और साक्ष्य-आधारित जांच पद्धतियों की समझ विकसित की। यह प्रशिक्षण घटनाओं की पड़ताल, जानकारी के आकलन, प्रक्रियागत आवश्यकताओं के पालन और सैन्य परिवेश में होने वाली जांचों में योगदान की क्षमता मजबूत करने के लिए तैयार किया गया था।
यातायात प्रबंधन घटक ने प्रतिभागियों को सैन्य यातायात की योजना बनाने, उसे नियंत्रित करने और समन्वयित करने के लिए तैयार किया। बड़े पैमाने पर सैन्य आवाजाही, अभ्यास, लामबंदी और परिचालन तैनाती के दौरान यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है, जहां सैन्य मार्गों पर अनुशासन और कर्मियों, वाहनों तथा उपकरणों की सुव्यवस्थित आवाजाही मिशन की प्रभावशीलता पर सीधा असर डाल सकती है।
इन तीनों प्रशिक्षण क्षेत्रों ने मिलकर ऐसे प्रोवोस्ट अधिकारियों को विकसित करने का लक्ष्य रखा, जो सही निर्णय, अनुशासन और परिचालन समझ के साथ व्यापक जिम्मेदारियां निभा सकें।
पाठ्यक्रम का समापन एक औपचारिक समापन समारोह के साथ हुआ, जिसे कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस सेंटर एंड स्कूल के कार्यकारी कमांडेंट कर्नल गौतम वर्मा ने संबोधित किया। उन्होंने अधिकारियों को कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा करने पर बधाई दी और भविष्य की नियुक्तियों में पाठ्यक्रम से प्राप्त ज्ञान तथा व्यावसायिक कौशल के उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शन और उपलब्धियों के लिए उत्कृष्ट अधिकारियों को सम्मानित भी किया। समारोह में प्रतिभागी अधिकारियों की लगन के साथ-साथ पाठ्यक्रम संचालन में लगे शिक्षण और प्रशासनिक कर्मचारियों के प्रयासों को भी सराहा गया।
छह सेनाओं के अधिकारियों का यह प्रशिक्षण स्नातन मित्र देशों के बीच सहयोग और विश्वास बढ़ाने में सैन्य शिक्षा की व्यापक भूमिका को दर्शाता है। साथ प्रशिक्षण लेकर प्रतिभागियों ने अलग-अलग दृष्टिकोण साझा किए, सैन्य पुलिसिंग के विविध तरीकों को समझा और ऐसे पेशेवर संबंध बनाए, जो भविष्य के संवाद और सहयोग में सहायक हो सकते हैं।
कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस, सैन्य अनुशासन, यातायात विनियमन, जांच, आवाजाही नियंत्रण, औपचारिक कर्तव्यों और अन्य प्रोवोस्ट सहायता से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती है। रक्षा मंत्रालय के एक आधिकारिक विवरण के अनुसार, इस कोर का योगदान अच्छे क्रम और सैन्य अनुशासन बनाए रखने से लेकर यातायात प्रबंधन, अग्रसर बलों का मार्गदर्शन और युद्धबंदी शिविरों के प्रबंधन तक फैला है। इसका ध्येय वाक्य “सेवा तथा सहायता” है।
कॉर्प्स की प्रमुख प्रशिक्षण संस्था के रूप में कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस सेंटर एंड स्कूल इन विविध जिम्मेदारियों के लिए कर्मियों को तैयार करने में अहम भूमिका निभाता है। अधिकारियों के प्रोवोस्ट पाठ्यक्रम का समापन पेशेवर उत्कृष्टता, आधुनिक प्रशिक्षण और मित्र विदेशी देशों के साथ रक्षा सहयोग के प्रति संस्था की प्रतिबद्धता को एक बार फिर पुष्ट करता है।
नवनियुक्त अधिकारी अब इस पाठ्यक्रम से मिली सीख को अपनी-अपनी नियुक्तियों और सेनाओं में लेकर जाएंगे। विधि-प्रवर्तन, जांच और यातायात प्रबंधन में उनका प्रशिक्षण उन्हें प्रोवोस्ट जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने, साथ ही अनुशासन, निष्पक्षता और व्यावसायिकता के सर्वोच्च मानकों को बनाए रखने में सहायता करेगा।