रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय रक्षा उद्योग द्वारा रक्षा मंत्रालय के प्रूफ रेंज, फील्ड फायरिंग रेंज और परीक्षण सुविधाओं के उपयोग के लिए संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है।
यह संशोधित प्रक्रिया प्रूफ रेंज और प्रयोगशाला परीक्षण सुविधाओं के आवंटन तथा उपयोग के लिए विस्तृत और सरल व्यवस्था देती है। इसमें आवश्यक प्रारूप भी शामिल हैं, ताकि रक्षा मंत्रालय के पास उपलब्ध परीक्षण ढांचे तक आसान, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
संशोधित प्रक्रिया की एक प्रमुख विशेषता iDEX, प्रौद्योगिकी विकास कोष, मेक और रक्षा मंत्रालय की अन्य विकासात्मक परियोजनाओं के लिए प्रूफ और परीक्षण शुल्क में छूट है। इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और स्वदेशी रक्षा उद्योग की विकासात्मक गतिविधियों को सुविधा देना है।
इस प्रक्रिया में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, सरकारी गुणवत्ता आश्वासन एजेंसियों और तीनों सेनाओं के पास उपलब्ध प्रूफ रेंज, फील्ड फायरिंग रेंज और प्रयोगशाला परीक्षण सुविधाओं का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें भारतीय रक्षा उद्योग उपयोग कर सकेगा।
जिन मामलों में प्रूफ और परीक्षण शुल्क लागू होंगे, उनके लिए संशोधित प्रक्रिया में गणना और भुगतान की विधि भी शामिल की गई है। इससे उद्योग द्वारा इन सुविधाओं के उपयोग से जुड़ी दस्तावेजी प्रक्रिया और औपचारिकताएं सरल होने की उम्मीद है।
संशोधित प्रक्रिया में मौजूदा व्यवस्था के मध्यस्थता प्रावधान को हटाकर सुलह समझौता खंड जोड़ा गया है। यह सरल और उद्योग-अनुकूल प्रावधान स्वदेशी रक्षा उद्योग के सामने आने वाली समस्याओं के त्वरित समाधान के जरिए व्यवसाय सुगमता को बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है।
नए प्रावधान के तहत हर तिमाही प्रूफ रेंज में सरकार प्रायोजित विकासात्मक परियोजनाओं के प्रूफ फायरिंग के लिए तीन दिन का स्लॉट सुरक्षित रखा गया है। इनमें iDEX, प्रौद्योगिकी विकास कोष, मेक और रक्षा मंत्रालय की अन्य विकासात्मक परियोजनाएं, साथ ही स्वदेशी रक्षा उद्योग की अपनी पहल पर शुरू की गई परियोजनाएं शामिल हैं।
यह संशोधित ढांचा भारतीय रक्षा उद्योग को विकासात्मक गतिविधियों के लिए आवश्यक प्रूफ रेंज, फील्ड फायरिंग रेंज और प्रयोगशाला परीक्षण सुविधाओं तक अधिक आसान पहुंच देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। प्रक्रियाओं के सरलीकरण और लागू शुल्क तथा समस्या समाधान के प्रावधानों को शामिल कर यह व्यवस्था इन सुविधाओं के उपयोग को अधिक पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल बनाने का लक्ष्य रखती है।
संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया में विभिन्न सरकारी पहलों को भी शामिल किया गया है, जिनका उद्देश्य स्वदेशीकरण, नवाचार और रक्षा निर्यात को बढ़ावा देना है। साथ ही, यह भारतीय रक्षा उद्योग द्वारा की जा रही विकासात्मक परियोजनाओं को प्रूफ और परीक्षण सहायता भी उपलब्ध कराती है।
यह कदम रक्षा मंत्रालय, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, सरकारी गुणवत्ता आश्वासन एजेंसियों और तीनों सेनाओं के पास उपलब्ध परीक्षण तथा प्रूफ सुविधाओं तक उद्योग की पहुंच बेहतर कर स्वदेशी रक्षा विकास को मजबूत करने की व्यापक दिशा में उठाया गया है।