लेफ्टिनेंट जनरल जोएल बी वॉवेल, अमेरिकी सेना प्रशांत कमान के उप कमांडिंग जनरल, ने 28 सितंबर को सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ से मुलाकात की। दोनों वरिष्ठ सैन्य नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की बदलती सुरक्षा स्थिति और भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।
बैठक में जनरल सेठ और लेफ्टिनेंट जनरल वॉवेल ने हिंद-प्रशांत की बदलती सुरक्षा परिस्थिति पर विचारों का आदान-प्रदान किया और कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय रक्षा सहभागिता बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की। यह संवाद भारतीय सेना और अमेरिकी सेना के बीच जारी सैन्य-से-सैन्य सहभागिता को दर्शाता है।
चर्चा का एक प्रमुख विषय दोनों सेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण, अभ्यास और व्यावसायिक आदान-प्रदान के माध्यम से अंतर-संचालनीयता को बढ़ाना रहा। दोनों पक्षों ने ऐसी व्यवस्था पर भी बात की, जिससे उनकी सेनाएं अधिक जटिल अभियानगत परिस्थितियों में बेहतर ढंग से साथ काम कर सकें।
यह बैठक ‘युद्ध अभ्यास 2026’ की पृष्ठभूमि में हुई, जो भारतीय और अमेरिकी सेनाओं के बीच होने वाला वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास का 22वां संस्करण है। इस अभ्यास में दोनों पक्षों के लगभग 600 कर्मियों ने भाग लिया और उत्तराखंड के औली तथा राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में प्रशिक्षण हुआ।
‘युद्ध अभ्यास 2026’ में कमान-स्तरीय और क्षेत्रीय प्रशिक्षण अभ्यास, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचालन, मानवरहित विमान-रोधी प्रणाली प्रशिक्षण, संयुक्त हवाई-आक्रमण संचालन और सटीक फायर प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां शामिल थीं। अभ्यास के दौरान अमेरिकी और भारतीय सैनिकों ने हिमार्स, स्टिंगर और एम-एलआईडीएस जैसी प्रणालियों के साथ भी प्रशिक्षण लिया।
हाल ही में संपन्न इस अभ्यास ने दोनों सेनाओं के बीच व्यावहारिक अंतर-संचालनीयता को प्रदर्शित किया। सैनिकों ने मिश्रित संरचनाओं में साथ काम किया, हथियारों और ड्रोन मंचों के साथ अनुभव साझा किया और विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों में समन्वित प्रशिक्षण किया। अमेरिकी सेना के अधिकारियों के अनुसार, इस अभ्यास का उद्देश्य विश्वास, तत्परता और दोनों सेनाओं की साथ मिलकर काम करने की क्षमता को मजबूत करना था।
लेफ्टिनेंट जनरल वॉवेल ने भी ‘युद्ध अभ्यास’ के महत्व को रेखांकित किया है। उनके अनुसार, यह अभ्यास दोनों देशों के बीच विश्वास निर्माण, सैन्य विशेषज्ञता साझा करने और अभियानगत तत्परता में सुधार के लिए महत्वपूर्ण है। अमेरिकी सेना प्रशांत कमान द्वारा प्रायोजित यह अभ्यास भारत-अमेरिका सेना-से-सेना सहयोग का एक प्रमुख हिस्सा बन चुका है।
28 सितंबर की जनरल सेठ और लेफ्टिनेंट जनरल वॉवेल के बीच हुई बातचीत ने इस बात की पुष्टि की कि दोनों सेनाएं निरंतर सैन्य सहभागिता, संयुक्त प्रशिक्षण और अधिक अंतर-संचालनीयता पर जोर दे रही हैं, क्योंकि भारत और अमेरिका हिंद-प्रशांत में अपने रक्षा संबंधों को और गहरा कर रहे हैं।