जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शनिवार को बांदीपोरा जिले में प्रतिबंधित संगठन जम्मू और कश्मीर इत्तिहाद-उल-मुस्लिमीन (जेकेआईएम) से जुड़े एक गुप्त मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने का दावा किया। इस मामले में चार महिलाओं सहित छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार यह मॉड्यूल पाकिस्तान स्थित हैंडलर के निर्देश पर काम कर रहा था और जेल से जुड़े नेटवर्क, गुप्त बैठकों, महिलाओं के वैचारिक उकसावे तथा अलगाववादी प्रचार गतिविधियों के लिए सीमा पार से धन प्राप्त करने में शामिल था।
इस संबंध में पुलिस थाना बांदीपोरा में प्राथमिकी संख्या 168/2026 दर्ज की गई है। मामला गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967, यथासंशोधित, की धारा 10 और 13 के तहत दर्ज किया गया है। ये धाराएं गैरकानूनी संगठन की सदस्यता और उसके उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए समर्थन जुटाने जैसी गतिविधियों से संबंधित हैं।
गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान वाहिद अहमद भट उर्फ बट, मुबीना बानो उर्फ बानू, खुशबू जान, मेहक जान, आलिया जान उर्फ आलिया/आलिया जान और इरफान अहमद रेशी उर्फ रईस के रूप में हुई है। पुलिस ने वाहिद अहमद भट को इस मामले का मुख्य आरोपी बताया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में से दो कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा से हैं, जबकि शेष चार बांदीपोरा के रहने वाले हैं। पुलिस एक धार्मिक उपदेशक और कुपवाड़ा के दो संदिग्ध वाहकों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जो अभी फरार हैं।
जांचकर्ताओं ने बताया कि प्रारंभिक जांच वाहिद अहमद भट को लेकर शुरू हुई थी। उसे 2022 में एक सम्मेलन के मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत पहले भी गिरफ्तार किया गया था। कुपवाड़ा जेल में रहने के दौरान उसके कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित हैंडलर मंसूर अहमद शाह से फिर संपर्क स्थापित हुए। एक अन्य बंदी की सहायता से अलगाववादी विचारधारा फैलाने, बैठकें आयोजित करने और महिला भागीदारी के जरिए समर्थन बढ़ाने का नेटवर्क तैयार किया गया।
भट के अगस्त 2024 में चिकित्सकीय आधार पर रिहा होने के बाद यह नेटवर्क और सक्रिय हो गया। पुलिस का कहना है कि बांदीपोरा और आसपास के क्षेत्रों में 14 से 15 गुप्त बैठकें हुईं। इनमें से पांच से छह बैठकें बांदीपोरा-बड़ामुला मार्ग पर स्थित एक छोटे होटल में हुईं। पुलिस के मुताबिक प्रचार संबंधी गतिविधियों के लिए महिलाओं को प्रमुख लक्ष्य बनाया गया।
जांच में इस मॉड्यूल से जुड़ी वित्तीय कड़ी भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार एक वर्ष से अधिक समय में लगभग 7 से 8 लाख रुपये का लेन-देन हुआ। इसमें से करीब 2.26 लाख रुपये बांदीपोरा के दाचीगाम निवासी मुबीना बानो के जम्मू-कश्मीर बैंक खाते में जमा किए गए। शेष धनराशि कथित तौर पर नकद वाहकों के जरिए पहुंचाई गई। इस रकम का कुछ हिस्सा साथियों में बांटा गया, जबकि कुछ राशि भट के चिकित्सा उपचार और संबंधित खर्चों में इस्तेमाल की गई।
जेकेआईएम, जिसका नेतृत्व मसरूर अब्बास अंसारी करते हैं और जो ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का घटक है, को गृह मंत्रालय ने 11 मार्च 2025 को गैरकानूनी संगठन घोषित किया था। गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत इस पर पांच वर्ष के लिए प्रतिबंध लगाया गया था। सरकार ने उस समय संगठन पर राष्ट्रविरोधी और विध्वंसक गतिविधियों, आतंकवाद को समर्थन देने, अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने, अवैध उद्देश्यों के लिए धन जुटाने और स्थापित सरकार के खिलाफ घृणा फैलाने के आरोप लगाए थे। बाद में विशेष न्यायाधिकरण ने इस प्रतिबंध को बरकरार रखा।
बांदीपोरा पुलिस ने कहा है कि जांच अभी जारी है, ताकि नेटवर्क की पूरी संरचना, उसके संचालन के तरीके, संचार माध्यम, धन के स्रोत और गिरफ्तार लोगों तथा जांच के दायरे में आए अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इस मॉड्यूल ने महिलाओं का इस्तेमाल अलगाववादी विचारधारा फैलाने के लिए करने की कोशिश की, संभवतः इस धारणा के साथ कि उन पर कम निगरानी होगी।
यह कार्रवाई उत्तरी कश्मीर में प्रतिबंधित संगठनों और सीमा पार हैंडलरों से जुड़े कथित बचे हुए नेटवर्क के खिलाफ चल रही सुरक्षा कार्रवाइयों का हिस्सा है। जांच आगे बढ़ने पर और विवरण सामने आने की उम्मीद है।