केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने हरियाणा सरकार के 504 करोड़ रुपये के कथित धन गबन मामले में तीसरी आरोपपत्र दाखिल कर दी है। इस बार 19 और आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं, जिनमें हरियाणा कैडर के छह भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भी हैं।
यह आरोपपत्र 2 सितंबर 2026 को पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में पेश की गई। इसके साथ ही मामले में आरोपपत्र दाखिल किए गए व्यक्तियों की कुल संख्या 37 हो गई है। एजेंसी अब तक 26 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, 54 छापे मार चुकी है और करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य का सोना समेत आपत्तिजनक सामग्री जब्त कर चुकी है।
नवीनतम आरोपपत्र में शामिल छह हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारियों में मोह्द. शायिन, सकेट कुमार, प्रदीप कुमार, विनीत गर्ग, राम कुमार सिंह और पंकज अग्रवाल के नाम हैं। इनमें प्रदीप कुमार, राम कुमार सिंह और पंकज अग्रवाल को जांच के दौरान पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था।
आरोपपत्र में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तीन अधिकारी, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के एक अधिकारी और हरियाणा सरकार के नौ अन्य अधिकारी भी नामजद हैं। बैंक अधिकारियों में शमीम अहमद डार, सुधा गोयल, कुलदीप सिंह और चारणजीत सिंह रंधावा के नाम शामिल हैं।
सीबीआई के अनुसार, आरोपियों ने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से एक सुनियोजित योजना बनाई। हरियाणा सरकार के आठ विभागों और संगठनों की धनराशि एम्पैनल्ड बैंकों से इन दो निजी बैंकों की विशिष्ट शाखाओं में स्थानांतरित की गई, जहां खाते खोले गए।
एजेंसी का कहना है कि ये स्थानांतरण हरियाणा वित्त विभाग के वित्तीय सतर्कता और धोखाधड़ी रोकथाम संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करके किए गए। इसके बाद धनराशि को फर्जी तरीकों से गबन किया गया, असंबद्ध तीसरे पक्षों तक पहुंचाया गया, कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया और नकद में बदला गया। इससे कथित तौर पर अवैध लाभ कमाया गया।
प्रभावित आठ विभागों और संगठनों में पंचायत विभाग, पंचकूला और कालका नगर निगम, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद, हरियाणा श्रम कल्याण बोर्ड, हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड शामिल हैं। सीबीआई ने कथित धोखाधड़ी की राशि 504 करोड़ रुपये आंकी है।
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, साक्ष्य नष्ट करने, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों को असली के रूप में उपयोग करने, खातों में हेराफेरी, आपराधिक विश्वासघात और उकसावे जैसे अपराध लगाए गए हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी और आपराधिक कदाचार के आरोप भी शामिल हैं।
सीबीआई प्रवक्ता बीना यादव ने कहा कि जांच में धोखाधड़ी वाले लेन-देन की एक सुनियोजित श्रृंखला स्थापित हुई है। एजेंसी ने हरियाणा राज्य सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से राज्य सरकार के अनुरोध पर जांच अपने हाथ में ली थी।
एजेंसी ने चंडीगढ़ से जुड़े दो मामलों की जांच भी अपने पास ली है, जिनमें चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड, नगर निगम चंडीगढ़ तथा चंडीगढ़ नवीकरणीय ऊर्जा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन सोसायटी से जुड़े मामले शामिल हैं। इन मामलों में भी आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं। तीनों मामलों की जांच अन्य संदिग्धों के खिलाफ जारी है और एजेंसी पूरी धन-श्रृंखला का पता लगाने तथा कथित अपराध से अर्जित रकम की वसूली पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
सेवारत और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल होने के बावजूद, सक्षम प्राधिकार से आवश्यक अभियोजन स्वीकृति मिलने तक ट्रायल कोर्ट संज्ञान नहीं ले सकती। अदालत में आरोप अभी सिद्ध नहीं हुए हैं और दोष सिद्ध होने तक सभी आरोपियों को निर्दोष माना जाएगा।