सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ की रूस की जारी आधिकारिक यात्रा के दौरान उन्होंने रूसी संघ के रक्षा मंत्रालय का दौरा किया और उप रक्षा मंत्री जनरल यूनुस-बेक येवकुरोव के साथ चर्चा की।
इस बातचीत में आपसी रुचि के विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें संयुक्त क्षमता विकास, पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान और भारत तथा रूस के बीच सैन्य-से-सैन्य सहयोग को मजबूत करने के उपाय शामिल थे।
दोनों वरिष्ठ सैन्य नेताओं की यह मुलाकात दोनों देशों के लंबे रक्षा संबंधों की पृष्ठभूमि में हुई। भारत और रूस के बीच सैन्य सहयोग परंपरागत रूप से उपकरण, प्रशिक्षण, पेशेवर आदान-प्रदान और संस्थागत संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में रहा है।
जनरल धीरज सेठ की रूसी उप रक्षा मंत्री के साथ बैठक में संयुक्त क्षमता विकास चर्चा का एक प्रमुख विषय रहा। यह सहयोग दोनों पक्षों को आपसी रुचि के क्षेत्रों को तलाशने और अधिक संपर्क तथा सहयोग के माध्यम से अपनी-अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के अवसर दे सकता है।
दोनों पक्षों ने पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान पर भी चर्चा की, जो द्विपक्षीय रक्षा सहभागिता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सैन्य कर्मियों और संस्थानों के बीच नियमित आदान-प्रदान से पेशेवर अनुभव साझा करने और सशस्त्र बलों के बीच आपसी समझ बढ़ाने का अवसर मिलता है।
चर्चा में सैन्य-से-सैन्य सहयोग को और बढ़ाने के रास्तों पर भी विचार किया गया, जिससे भारत और रूस के रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच नियमित संस्थागत संपर्क बनाए रखने पर जोर दिखाई दिया।
यात्रा के दौरान जनरल धीरज सेठ ने रूस में भारत के राजदूत श्री विनय कुमार से भी मुलाकात की। सेना प्रमुख ने भारत-रूस द्विपक्षीय सहयोग और दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत करने के उपायों पर राजदूत के साथ चर्चा की।
भारतीय राजदूत के साथ यह बातचीत रूस के साथ भारत की रक्षा सहभागिता से जुड़े व्यापक द्विपक्षीय संदर्भ पर चर्चा का अवसर बनी। कूटनीतिक और सैन्य माध्यम दोनों देशों के बीच सहयोग को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मास्को में जनरल सेठ की मुलाकातों में भारत-रूस संबंधों के सैन्य और कूटनीतिक, दोनों पहलू शामिल रहे। रूसी उप रक्षा मंत्री के साथ उनकी बैठक का केंद्र सैन्य सहयोग और क्षमता विकास रहा, जबकि भारतीय राजदूत के साथ बातचीत द्विपक्षीय सहयोग और रक्षा संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित थी।
पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान दोनों सशस्त्र बलों के व्यापक संबंधों के लिए भी प्रासंगिक बने हुए हैं। ऐसे संपर्कों से संचालनगत तरीकों, संस्थागत ढांचों और साझा रुचि के क्षेत्रों की बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिल सकती है।
संयुक्त क्षमता विकास पर जोर रक्षा क्षमताओं के निर्माण में सहयोग के निरंतर महत्व को भी दर्शाता है। साथ ही, बढ़ा हुआ सैन्य-से-सैन्य संपर्क नियमित संवाद बनाए रखने और भविष्य के सहयोग के अवसर पहचानने के लिए एक ढांचा प्रदान करता है।
सेना प्रमुख की यह जारी यात्रा भारतीय और रूसी रक्षा प्रतिष्ठानों के बीच उच्चस्तरीय संस्थागत संपर्क को बनाए रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इन बैठकों से द्विपक्षीय रक्षा सहयोग, पेशेवर आदान-प्रदान और क्षमता विकास को संवाद के माध्यम से आगे बढ़ाने पर बल मिलता है।
रूस में जनरल धीरज सेठ की चर्चाएं भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को समर्थन देने में वरिष्ठ सैन्य स्तर की सहभागिता की भूमिका को भी रेखांकित करती हैं। यह यात्रा दोनों पक्षों को मौजूदा सहयोग के रास्तों की समीक्षा करने और सैन्य संपर्क को और गहरा करने की संभावनाएं तलाशने का अवसर देती है।
जनरल यूनुस-बेक येवकुरोव और राजदूत विनय कुमार के साथ हुई ये मुलाकातें संयुक्त रूप से रूस के साथ मजबूत रक्षा संबंध बनाए रखने तथा पेशेवर और सैन्य सहयोग के दायरे को विस्तार देने पर भारत के निरंतर ध्यान को दर्शाती हैं।