अंडमान और निकोबार कमान के कमांडर-इन-चीफ वाइस एडमिरल विनीत मैकार्टी ने कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट, इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में एचडीएमसी-22 को संबोधित किया। उन्होंने भारत के बढ़ते राष्ट्रीय हितों के लिए अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के सामरिक महत्व पर जोर दिया।
सत्र के दौरान वाइस एडमिरल मैकार्टी ने द्वीपों के भू-रणनीतिक मूल्य और भारत की समुद्री तथा आर्थिक प्राथमिकताओं की सुरक्षा में उनकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने देश के व्यापक सुरक्षा और रणनीतिक उद्देश्यों के समर्थन में इस द्वीपसमूह की पूरी क्षमता को साकार करने की आगे की दिशा पर भी चर्चा की।
इंडो-पैसिफिक के प्रवेशद्वार पर स्थित अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह भारत की समुद्री सुरक्षा संरचना में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। इनकी भौगोलिक स्थिति उन्हें अहम समुद्री मार्गों, क्षेत्रीय स्थिरता और भारत के व्यापक समुद्री हितों की सुरक्षा के संदर्भ में विशेष महत्व देती है।
सत्र में द्वीपों की भूमिका को केवल भौगोलिक महत्व तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि समुद्री क्षेत्र में भारत के बढ़ते राष्ट्रीय हितों में उनके संभावित योगदान पर भी विचार किया गया। चर्चा में इंडो-पैसिफिक में भारत के व्यापक रणनीतिक लक्ष्यों के अनुरूप द्वीपों की क्षमताओं के विकास पर भी जोर दिया गया।
वाइस एडमिरल मैकार्टी ने अंडमान और निकोबार कमान की संयुक्तता और समुद्री सुरक्षा को सक्षम बनाने वाली अहम भूमिका पर भी चर्चा की। भारत की एकमात्र त्रि-सेवा थिएटर कमान के रूप में एएनसी सेना, नौसेना और वायु सेना के घटकों को इस सामरिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीपीय क्षेत्र में एक साथ लाती है।
थिएटर कमान अवधारणा पर हुई चर्चा में सशस्त्र बलों के बीच अधिक एकीकरण पर विशेष बल दिया गया। आधुनिक सैन्य अभियानों में संयुक्तता की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है, जिसमें विभिन्न सेवाओं को साझा उद्देश्यों के लिए अपनी क्षमताओं, संसाधनों और परिचालन योजना का समन्वय करना होता है।
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह इस संदर्भ में इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे पूर्वी हिंद महासागर में अहम समुद्री पहुंच मार्गों के किनारे स्थित हैं। यह द्वीपसमूह भारत को एक ऐसी सामरिक स्थिति प्रदान करता है, जिससे वह समुद्री जागरूकता, क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापक इंडो-पैसिफिक में राष्ट्रीय हितों की रक्षा में योगदान दे सकता है।
सीडीएम-आईडीएस में यह सत्र भूगोल, राष्ट्रीय हितों और सैन्य संगठन के बीच संबंधों को समझने का भी अवसर बना। इंडो-पैसिफिक में बदलते सामरिक परिदृश्य ने समुद्री सुरक्षा के महत्व को और बढ़ा दिया है, जिससे भारत के द्वीपीय क्षेत्र उसकी समग्र सुरक्षा संरचना का अहम हिस्सा बन गए हैं।
द्वीपों की पूर्ण क्षमता विकसित करने पर दिया गया जोर निरंतर क्षमता-वृद्धि और सैन्य तथा रणनीतिक योजना के अधिक निकट समन्वय की आवश्यकता को भी दर्शाता है। अंडमान और निकोबार कमान के लिए इसका अर्थ है परिचालन तत्परता बनाए रखते हुए भारत के व्यापक समुद्री सुरक्षा लक्ष्यों में अपना योगदान मजबूत करना।
एचडीएमसी-22 के साथ हुई इस बातचीत ने उभरती रणनीतिक चुनौतियों को समझने में पेशेवर सैन्य शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया। एएनसी, समुद्री सुरक्षा और थिएटर कमान अवधारणा पर चर्चाएं सैन्य अधिकारियों को संयुक्त अभियानों, राष्ट्रीय सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक में भारत के रणनीतिक हितों के संबंध में दृष्टि प्रदान करती हैं।
यह संबोधन अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह की भारत की सुरक्षा और आर्थिक प्राथमिकताओं में रणनीतिक प्रासंगिकता को फिर से पुष्ट करता है। महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और व्यापक इंडो-पैसिफिक सामरिक परिवेश के संगम पर स्थित इस द्वीपसमूह की भूमिका समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और सशस्त्र बलों के बीच संयुक्तता को मजबूत करने के भारत के प्रयासों से सीधे जुड़ी है।