देहरादून, 5 अक्टूबर 2026: राष्ट्रीय जललेखी कार्यालय, देहरादून ने सोमवार को शौर्य चक्र से सम्मानित लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए का एक प्रेरक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर नौसैनिक और नागरिक कर्मियों के साथ-साथ स्कूलों और महाविद्यालयों के छात्र भी मौजूद रहे।
लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए, जो तीनों सशस्त्र बलों में शौर्य चक्र पाने वाली केवल दो महिला अधिकारियों में से एक हैं, ने समुद्र के रास्ते विश्व की 238 दिन की परिक्रमा के अपने असाधारण अनुभव साझा किए।
संवाद के दौरान उन्होंने लंबी समुद्री यात्रा में सामने आई कठिन चुनौतियों के बारे में बताया। उन्होंने विश्व के महासागरों को पार करते समय साहस, धैर्य, अनिश्चितता और दृढ़ संकल्प के क्षणों का उल्लेख किया।
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि ऐसी चुनौतीपूर्ण समुद्री यात्रा के लिए शारीरिक और मानसिक दृढ़ता कितनी आवश्यक होती है। उन्होंने नेतृत्व, टीम भावना, लगन और समुद्र में कठिन तथा अप्रत्याशित परिस्थितियों के बीच संयम बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया।
इस सत्र में राष्ट्रीय जललेखी कार्यालय, देहरादून के नौसैनिक और नागरिक कर्मचारी तथा विभिन्न स्कूलों और महाविद्यालयों के छात्र शामिल हुए। उनके अनुभवों ने युवा प्रतिभागियों को आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय के साथ चुनौतियों का सामना करने के लिए विशेष रूप से प्रेरित किया।
यह संवाद इस बात को रेखांकित करता है कि कठिन सैन्य और समुद्री अभियानों से मिले सबक युवाओं में दृढ़ता, नेतृत्व गुण और निरंतर प्रयास की मजबूत भावना विकसित करने के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।
लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा की यात्रा और शौर्य चक्र से उनका सम्मान साहस और संकल्प का उदाहरण माना जा रहा है, विशेष रूप से उन युवा महिलाओं के लिए जो चुनौतीपूर्ण करियर और नेतृत्व भूमिकाएँ अपनाना चाहती हैं।