कमांड अस्पताल (पूर्वी कमान), कोलकाता ने 39 वर्षीय सेवारत सैनिक को स्वदेशी रूप से विकसित सीएआर-टी कोशिका चिकित्सा सफलतापूर्वक दी है। यह सैनिक पुनरावर्ती/प्रतिरोधी बी-कोशिका तीव्र लसिकाजन्य रक्त कैंसर से पीड़ित था।
यह उपलब्धि पूर्वी कमान के तत्वावधान में हासिल की गई और इससे भारतीय सशस्त्र बलों के लिए उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव सामने आया है।
दी गई चिकित्सा का नाम नेक्सकार१९ है, जिसे भारत की पहली स्वदेशी सीएआर-टी कोशिका चिकित्सा बताया गया है। इसे रक्त कैंसर, जिनमें ल्यूकेमिया और लिंफोमा शामिल हैं, के लिए अधिक सुलभ और किफायती प्रतिरक्षा चिकित्सा विकल्प के रूप में विकसित किया गया है।
नेक्सकार१९ का विकास आईआईटी बॉम्बे, टाटा मेमोरियल सेंटर और जैव प्रौद्योगिकी स्टार्ट-अप इम्यूनोएसीटी की साझेदारी से हुआ है। यह स्वदेशी चिकित्सा सीएआर-टी कोशिका उपचार के क्षेत्र में भारतीय विकास का प्रतिनिधित्व करती है।
सीएआर-टी कोशिका चिकित्सा में रोगी की अपनी टी-कोशिकाओं का उपयोग कर उन्हें चिमेरिक एंटीजेन रिसेप्टर्स के साथ पुनः प्रोग्राम किया जाता है। इस तरह बदली गई कोशिकाएँ सीडी१९ प्रोटीन व्यक्त करने वाली कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन्हें नष्ट करने के लिए बनाई जाती हैं।
इस उपचार प्रक्रिया में रोगी से टी-कोशिकाएँ एकत्र की जाती हैं, उन्हें आनुवंशिक रूप से परिवर्तित किया जाता है और फिर तैयार कोशिकाएँ वापस शरीर में डाली जाती हैं। एक बार देने के बाद ये संशोधित कोशिकाएँ लक्षित कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन पर हमला करती हैं।
नेक्सकार१९ में म्यूरिन, यानी चूहे से प्राप्त, घटकों के बजाय मानवीकृत संरचना का उपयोग किया गया है। दी गई जानकारी के अनुसार, इस संरचना से गंभीर तंत्रिका संबंधी दुष्प्रभावों का जोखिम कम रहता है।
पुनरावर्ती या प्रतिरोधी रक्त कैंसर के उन रोगियों के लिए सीएआर-टी कोशिका चिकित्सा को एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जाता है, जिनके लिए पारंपरिक उपचार विकल्प समाप्त हो चुके हों। इसलिए कमांड अस्पताल कोलकाता में इस चिकित्सा का उपयोग सैन्य स्वास्थ्य व्यवस्था की उन्नत उपचार क्षमता में एक महत्वपूर्ण वृद्धि के रूप में देखा जा रहा है।
नेक्सकार१९ को विश्व स्तर पर अधिक किफायती सीएआर-टी उपचारों में भी गिना गया है, जिसकी लागत पश्चिमी देशों में उपलब्ध समान उपचारों की तुलना में लगभग दसवां हिस्सा बताई गई है। भारत के कमांड अस्पतालों को इस चिकित्सा को देने के लिए अधिकृत संस्थानों में शामिल किया गया है।
पूर्वी कमान ने सेवारत सैनिक को यह स्वदेशी चिकित्सा सफलतापूर्वक दिए जाने को “मील का पत्थर” उपलब्धि बताया है। इसे नैदानिक उत्कृष्टता, नवाचार और भारतीय सशस्त्र बलों के लिए अत्याधुनिक, रोगी-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता से जोड़ा गया है।
यह विकास सेना के चिकित्सा तंत्र के उस प्रयास को भी रेखांकित करता है, जिसके तहत सेवारत कर्मियों और उनके आश्रितों के लिए उन्नत चिकित्सा तकनीकों को अपनाया जा रहा है।
कमांड अस्पताल, कोलकाता की यह उपलब्धि कमांड अस्पताल (पश्चिमी कमान), चंडीमंदिर में सीएआर-टी कोशिका चिकित्सा दिए जाने के बाद सामने आई है, जहाँ सितंबर में 16 वर्षीय बी-कोशिका तीव्र लसिकाजन्य रक्त कैंसर से पीड़ित रोगी को पहली बार यह उपचार दिया गया था।
कमांड अस्पताल कोलकाता में नेक्सकार१९ का सफल उपयोग सशस्त्र बलों की स्वास्थ्य व्यवस्था में उन्नत कैंसर उपचार की उपलब्धता की दिशा में एक महत्वपूर्ण विकास है। साथ ही यह पुनरावर्ती/प्रतिरोधी बी-कोशिका तीव्र लसिकाजन्य रक्त कैंसर से पीड़ित एक सेवारत सैनिक के इलाज में स्वदेशी चिकित्सा तकनीक के उपयोग को भी दर्शाता है।