केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने चंडीगढ़ नगर निगम के एक स्वच्छता निरीक्षक को कथित तौर पर एक ठेकेदार से 14 लाख रुपये की रिश्वत मांगने और 5 लाख रुपये की आंशिक रकम स्वीकार करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या रिश्वत की यह राशि नगर निकाय के वरिष्ठ अधिकारियों में भी बांटी जानी थी।
यह गिरफ्तारी 7 अक्टूबर 2026 को उस शिकायत के बाद की गई, जो नगर निगम के लिए लैंडफिल से जुड़े कार्य करने वाले एक ठेकेदार ने दर्ज कराई थी। सीबीआई के अनुसार, आरोपी ने फर्म के लंबित और भविष्य के बिलों को आगे बढ़ाने और मंजूरी देने के बदले अवैध धन की मांग की थी।
सीबीआई ने स्वच्छता निरीक्षक को रंगे हाथ पकड़ा
शिकायत के आधार पर सीबीआई की चंडीगढ़ स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने 7 अक्टूबर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद एजेंसी ने जाल बिछाया और आरोपी को 5 लाख रुपये की आंशिक रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ने का दावा किया।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, यह लेनदेन चंडीगढ़ के सेक्टर 11 बाजार में एक कार के भीतर हुआ, जहां सीबीआई अधिकारियों ने आरोपी को रोका। गिरफ्तारी के बाद उसे चंडीगढ़ की अदालत में पेश किया गया, जिसने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सीबीआई टीमों ने उसके कार्यालय और आवास पर भी तलाशी ली, जहां कथित तौर पर आपत्तिजनक दस्तावेज मिले। इनमें अचल संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड भी शामिल बताए गए हैं।
बिलों की मंजूरी के लिए 14 लाख रुपये की मांग का आरोप
शिकायतकर्ता की फर्म नगर निगम को लैंडफिल संबंधी कार्यों के लिए जनशक्ति, मिट्टी हटाने वाले उपकरण, जेसीबी मशीनें और टिप्पर उपलब्ध कराती है। बताया गया है कि कंपनी के पास इन सेवाओं के लिए तीन साल का अनुबंध है, और मासिक बिल लगभग 10 लाख रुपये के हैं।
शिकायत के मुताबिक, स्वच्छता निरीक्षक जुलाई 2025 से हर महीने 1 लाख रुपये की मांग कर रहा था। कुल मांग 14 लाख रुपये बताई गई, जो पहले जमा किए गए, लंबित और भविष्य के बिलों के निपटारे से जुड़ी थी।
ठेकेदार का आरोप है कि मांगी गई रकम न देने पर भुगतान रोकने और फर्म की निविदा रद्द कराने की धमकी दी गई। सितंबर 2026 में फर्म के प्रतिनिधियों ने सेक्टर 17, चंडीगढ़ स्थित स्वास्थ्य और स्वच्छता विभाग कार्यालय में आरोपी से मुलाकात की थी।
बैठक के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर बिलों के निपटान के लिए उपस्थिति पत्रक और वाहनों की लॉगबुक मांगी, और साथ ही अवैध धन की मांग दोहराई। इसके बाद शिकायतकर्ता सीबीआई के पास पहुंचा, जिसके बाद सत्यापन कराकर जाल कार्रवाई की गई।
वरिष्ठ नगर निगम अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
मामले ने चंडीगढ़ नगर निगम के अन्य अधिकारियों की संभावित भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं। शिकायत के अनुसार, गिरफ्तार निरीक्षक ने कथित तौर पर कहा था कि मांगी गई राशि केवल उसके लिए नहीं, बल्कि अन्य अधिकारियों में भी बांटी जाएगी।
ठेकेदार ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी इस मांग से अवगत थे और उन्होंने इसका पालन करने की सलाह दी थी, साथ ही चेतावनी दी थी कि ऐसा न करने पर भुगतान रोका जा सकता है और अनुबंध रद्द किया जा सकता है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और सीबीआई ने इस मामले में अभी किसी और गिरफ्तारी की घोषणा नहीं की है।
प्राथमिकी में स्वच्छता निरीक्षक को ही आरोपी बताया गया है, जबकि अन्य नगर निगम अधिकारियों की संभावित संलिप्तता की जांच जारी है।
2018 में नगर निगम में शामिल हुआ था आरोपी
गिरफ्तार स्वच्छता निरीक्षक की उम्र 34 वर्ष बताई गई है और वह 2018 में सीधे भर्ती के माध्यम से चंडीगढ़ नगर निगम में शामिल हुआ था। नगर सेवा में आने से पहले वह दिल्ली में प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक के रूप में कार्य कर चुका था।
इसके बाद उसे स्वास्थ्य और स्वच्छता विभाग में तैनात किया गया, जहां उसकी जिम्मेदारियों में डंपिंग ग्राउंड और नगर कार्यों के लिए लगाए गए वाहनों से जुड़ा काम शामिल था।
सीबीआई अब जब्त दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और रिश्वत की रकम के अन्य अधिकारियों में वितरण से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या इस कथित भ्रष्टाचार में और लोग शामिल थे।