दिल्ली पुलिस ने 23 वर्षीय एक युवक विक्रांत तोमर, जो विक्रांत कुमार और विक्की तोमर के नाम से भी जाना जाता है, को बुराड़ी से गिरफ्तार किया है। उस पर आरोप है कि उसने खुद को एक धनी कारोबारी बताकर महिला पुलिस कांस्टेबलों को शादी का झांसा दिया और उच्च लाभ वाले निवेश के बहाने उनसे पैसे ट्रांसफर कराए। पुलिस को संदेह है कि एक ही बैच की लगभग 20 महिला कांस्टेबलों को निशाना बनाया गया और कुल रकम करीब 24 लाख रुपये हो सकती है। इनमें से कई महिलाओं ने अभी तक औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब करोल बाग थाने में तैनात कांस्टेबल शिवानी ने शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के मुताबिक तोमर ने पहले इंस्टाग्राम पर उनसे संपर्क किया और दिल्ली पुलिस में खेल कोटे से भर्ती को लेकर मार्गदर्शन मांगने का बहाना बनाया। इसके बाद बातचीत एक संदेश ऐप पर चली गई, जहां उसने नजदीकी बढ़ाई और खुद को एक चर्चित क्रिकेट पेशेवर तथा सफल कारोबारी के रूप में पेश किया।
पुलिस के अनुसार उच्च लाभ के वादों पर भरोसा कर कांस्टेबल ने अपने एचडीएफसी बैंक खाते से बचत राशि निकालकर दी, 12 लाख रुपये का निजी कर्ज लिया और परिचितों से अतिरिक्त रकम उधार ली। इस तरह कुल रकम लगभग 24 लाख रुपये तक पहुंच गई। इनमें से करीब 8 लाख रुपये तोमर के निर्देश पर 1x.com (वनएक्स) सट्टेबाजी मंच से जुड़े बैंक खातों में भेजे गए। शिकायत में यह भी आरोप है कि आमने-सामने मुलाकात के दौरान तोमर ने कांस्टेबल की कमर को अनुचित तरीके से छुआ, जिससे उनकी मर्यादा भंग करने का इरादा था। 8 सितंबर 2026 को मामला दर्ज किया गया।
ठगी का तरीका
जांचकर्ताओं का कहना है कि तोमर ने इंस्टाग्राम पर लग्जरी कारों, महंगे रेस्तरां और आलीशान जीवनशैली के वीडियो डालकर अपनी समृद्ध छवि बनाई। आरोप है कि वह महिलाओं को घुमाने के लिए महंगी कारें आठ घंटे के लिए किराये पर लेता था और अक्सर अलग-अलग महिलाओं के साथ वही वाहन इस्तेमाल करता था, ताकि उसका प्रभावशाली जीवन दिख सके। भरोसा जीतने और शादी का वादा करने के बाद वह अलग-अलग बहानों से पैसे मांगता था। पुलिस का यह भी कहना है कि एक महिला से मिली रकम का उपयोग कई बार दूसरी महिला के साथ घूमने-फिरने में किया गया।
जांच का एक अहम पहलू यह है कि तोमर की लिव-इन साथी भी दिल्ली पुलिस की महिला कांस्टेबल है। अधिकारियों को संदेह है कि उसने उसकी बैचमेट्स की जानकारी का इस्तेमाल कर अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान की और उनसे संपर्क किया। जिन महिलाओं से संपर्क किया गया, वे सभी एक ही बैच की बताई जा रही हैं।
पहले के मामले और मौजूदा जांच
तोमर पर दिल्ली में इसी तरह की कथित ठगी के पांच प्राथमिकी पहले से दर्ज थीं। ये मामले मायापुरी, हरि नगर और इंद्रपुरी थानों के साथ-साथ पूर्वी जिला साइबर पुलिस थाने में दर्ज किए गए थे। उसे जून 2026 में जमानत मिली थी।
केंद्रीय जिला साइबर पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। जांचकर्ता बैंक लेनदेन, सट्टेबाजी मंच से जुड़े खातों वाले वित्तीय रास्ते और अन्य अभिलेखों की जांच कर रहे हैं, ताकि पीड़ितों की सही संख्या, कुल रकम और यह पता लगाया जा सके कि क्या किसी ने लक्ष्यों की पहचान करने या रकम ट्रांसफर कराने में मदद की थी। अन्य संभावित पीड़ितों से आगे आकर शिकायत दर्ज कराने की अपील भी की जा रही है।
यह मामला दिखाता है कि सामाजिक माध्यमों का इस्तेमाल किस तरह धन और हैसियत की मनगढ़ंत छवि बनाकर वित्तीय धोखाधड़ी के लिए किया जा सकता है। पुलिस अब रकम के प्रवाह का पता लगाने और मुख्य शिकायत से आगे जांच का दायरा बढ़ाने में जुटी है।