नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026: गृह मंत्रालय ने भारतीय सेना के साथ समन्वय में एक पहली तरह की संयुक्त पहल शुरू की है। इसके तहत अग्निशमन सेवाएं, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड महानिदेशालय के माध्यम से 600 नागरिक सुरक्षा मास्टर प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करने का पायलट कार्यक्रम शुरू किया गया है। ये प्रशिक्षक आगे 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 60,000 नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को तैयार करेंगे, जिससे उभरते सुरक्षा खतरों और आपात स्थितियों के प्रति देश की नागरिक सुरक्षा तैयारियां मजबूत होंगी।
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2026 को लाल किले से दिए गए स्वतंत्रता दिवस संबोधन में रखी गई उस परिकल्पना के अनुरूप है, जिसमें उन्होंने आधुनिक प्रणालियों, प्रौद्योगिकियों और समकालीन तैयारियों से लैस एक सशक्त नागरिक सुरक्षा नेटवर्क के निर्माण का आह्वान किया था।
पहले चरण में प्रत्येक सहभागी क्षेत्र से 50 मास्टर प्रशिक्षक भारतीय सेना के निर्धारित प्रशिक्षण संस्थानों में तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण लेंगे। यह प्रशिक्षण नवंबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक पूरा किए जाने की योजना है। इसमें जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, दिल्ली, मेघालय, सिक्किम, असम, उत्तर प्रदेश, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु शामिल हैं।
पाठ्यक्रम को तीन व्यापक क्षेत्रों में बांटा गया है। इनमें खतरे की जागरूकता, संरक्षण और आपात प्रतिक्रिया, तथा संचार और समन्वय शामिल हैं। आधुनिक और मिश्रित युद्ध, ड्रोन संबंधी जागरूकता, हवाई हमले के खतरे, महत्वपूर्ण अवसंरचना की सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु जागरूकता, हताहत प्रबंधन, खोज एवं बचाव, आपात संचार, साइबर स्वच्छता, डिजिटल लचीलापन, नागरिक-सेना समन्वय और घटना कमान जैसे विषय इसमें शामिल हैं।
कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता इसका मास्टर प्रशिक्षक आधारित प्रसार मॉडल है। सेना-आधारित प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 600 में से प्रत्येक मास्टर प्रशिक्षक अपने-अपने राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में 100 नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करेगा। गृह मंत्रालय के अनुसार, यह तंत्र 12 सहभागी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 60,000 नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवकों तक विशेष तैयारियों के कौशल पहुंचा सकता है, जिससे इस पहल का दायरा और प्रभाव काफी बढ़ जाएगा।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिक सुरक्षा कर्मियों की क्षमता को बढ़ाना है, ताकि वे समकालीन सुरक्षा खतरों, प्रतिकूल परिस्थितियों और आपात स्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना कर सकें। भारतीय सेना की परिचालन विशेषज्ञता और मौजूदा नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवी नेटवर्क को जोड़कर यह पहल नागरिक-सेना समन्वय और संस्थागत तैयारी को मजबूत करने का प्रयास करती है।
पायलट चरण के परिणाम इस पहल के शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चरणबद्ध विस्तार की योजना को दिशा देंगे। यह कदम एक सुदृढ़, उत्तरदायी और भविष्य के लिए तैयार नागरिक सुरक्षा नेटवर्क के लक्ष्य को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
यह घोषणा 23 अक्टूबर 2026 को प्रेस सूचना ब्यूरो की ओर से जारी की गई थी। आधिकारिक वक्तव्य के आधार पर कई मीडिया माध्यमों ने पायलट दायरे, प्रशिक्षण समय-सीमा, पाठ्यक्रम के प्रमुख क्षेत्रों और 60,000 स्वयंसेवकों तक संभावित पहुंच की पुष्टि की है।
यह पहल भारत की नागरिक सुरक्षा संरचना को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, ताकि मिश्रित खतरों, तकनीकी चुनौतियों और बड़े पैमाने पर आपात प्रतिक्रिया की आवश्यकताओं से निपटा जा सके।