इंडियन मिलिट्री हेरिटेज फेस्टिवल (आईएमएचएफ) 2026 में सैन्य परिवारों के त्याग, अपनों को खोने के दुख और मुश्किलों से उबरने के अनुभवों पर चर्चा हुई। यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया (यूएसआई) की ओर से आयोजित महोत्सव में इस सत्र का विषय वर्दी के पीछे परिवारों के प्रेम, वियोग और हौसले की कहानियां थीं।
सत्र में गीतिका लिड्डर, अंबरीन जैदी और मेघना गिरीश ने अपने अनुभव साझा किए। अदिति प्रसाद ने चर्चा का संचालन किया। बातचीत में सैन्य परिवारों के जीवन की उन चुनौतियों को सामने रखा गया, जो अक्सर लोगों की नजरों से दूर रहती हैं।
चर्चा का खास ध्यान अपनों को खोने के दुख, उनसे दूर रहने और सैन्य सेवा से इतर परिवारों पर आने वाली जिम्मेदारियों पर रहा। वक्ताओं के अनुभवों में यह बात उभरकर आई कि सेवा और त्याग में वर्दी पहनने वालों के साथ उनके परिवारों की भी अहम भूमिका होती है।

सत्र के बाद मेघना गिरीश ने दो दिवसीय महोत्सव में भाग लेने और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों व विशेषज्ञों से संवाद का अवसर मिलने पर आभार जताया।
उन्होंने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने युद्ध में दिव्यांग हुए सैनिकों और दिव्यांग कैडेटों से संबंधित एक अध्ययन रिपोर्ट साझा की।

गिरीश ने इन सैनिकों और कैडेटों के लिए नीतियों, उनके क्रियान्वयन और सहायता तक पहुंच में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए लगातार आवाज उठाने की जरूरत पर जोर दिया।