रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को नई दिल्ली में नवनियुक्त वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आशुतोष दीक्षित से मुलाकात की और उनके सफल कार्यकाल की कामना की। पदभार संभालने के बाद रक्षा मंत्री के साथ उनकी यह पहली औपचारिक मुलाकात थी।
राजनाथ सिंह ने एक्स पर इस मुलाकात की जानकारी दी। उन्होंने दीक्षित को उत्कृष्ट नेतृत्व के लिए पहचाने जाने वाला विशिष्ट वायु योद्धा बताया और आने वाले कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं।
परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, वायु सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित एयर चीफ मार्शल दीक्षित ने 31 अक्टूबर 2026 को देश के 29वें वायुसेना प्रमुख का पदभार संभाला था। उन्होंने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (एपी सिंह) का स्थान लिया, जो 42 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।
पदभार संभालने के अगले दिन, 1 नवंबर को दीक्षित ने भारतीय वायुसेना के लिए अपनी प्राथमिकताएं सामने रखीं। उन्होंने इन्हें ‘VAYU’ के चार स्तंभों में रखा है—सतर्कता और तैयारी, आत्मनिर्भरता, युक्ति यानी नवाचार तथा एकजुट प्रयास।
सतर्कता और तैयारी के तहत हर स्क्वाड्रन, रडार, वायु रक्षा इकाई और वायु योद्धा को तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रखने पर जोर है। वायुसेना की युद्धक क्षमता को स्वीकृत स्तर की ओर वापस ले जाना भी उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
आत्मनिर्भरता के मोर्चे पर तेजस एमके1ए और एमके2, उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (एएमसीए), भारतीय सेंसर और स्वदेशी हथियारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उद्देश्य है कि स्वदेशी प्रणालियां पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हों, ताकि अभियान लगातार चलाए जा सकें और विश्वसनीय वायु शक्ति के जरिए संघर्ष को रोका जा सके।

‘युक्ति’ के तहत सैन्य सिद्धांतों, प्रक्रियाओं और तकनीक में नवाचार पर ध्यान दिया जाएगा। इसमें नेटवर्क से जुड़ी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित कमान एवं नियंत्रण प्रणाली, ड्रोन से बचाव की बहुस्तरीय व्यवस्था, जरूरत के मुताबिक त्वरित रखरखाव, सैन्य बलों की सुरक्षा, व्यवधानों के बीच काम जारी रखने की क्षमता और अंतरिक्ष के निचले सीमावर्ती क्षेत्र का सैन्य अभियानों में इस्तेमाल शामिल है।
एकजुट प्रयास का अर्थ थलसेना, नौसेना और राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर योजना बनाना और युद्ध लड़ना है। यह संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार की व्यापक ‘JAI’ अवधारणा के अनुरूप है।
9 दिसंबर 1966 को जन्मे एयर चीफ मार्शल दीक्षित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, बांग्लादेश के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। उन्हें 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की लड़ाकू विमान शाखा में कमीशन मिला था। वह योग्य उड़ान प्रशिक्षक और प्रायोगिक परीक्षण पायलट भी हैं। मिराज-2000, मिग के विभिन्न संस्करणों, जगुआर, तेजस और हॉक सहित कई विमानों पर उनका उड़ान अनुभव 3,300–3,500 घंटे से अधिक का है।
करीब चार दशक के सेवाकाल में उन्होंने अभियान, कमान, स्टाफ और प्रशिक्षण से जुड़ी कई जिम्मेदारियां निभाई हैं। वह मिराज-2000 स्क्वाड्रन, पश्चिमी क्षेत्र की एक अग्रिम बेस सपोर्ट यूनिट और वायुसेना स्टेशन बीदर की कमान संभाल चुके हैं। उन्होंने दक्षिणी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर, दक्षिण पश्चिमी वायु कमान में वरिष्ठ एयर स्टाफ अधिकारी और उप वायुसेना प्रमुख के रूप में भी सेवाएं दी हैं।
दीक्षित मध्य वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ भी रहे हैं। उन्होंने चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष के अधीन एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली, जिसमें ऑपरेशन सिंदूर का समय भी शामिल था। वायुसेना प्रमुख बनने से पहले उन्होंने 1 जुलाई 2026 को वाइस चीफ ऑफ द एयर स्टाफ का पदभार ग्रहण किया था।
वायुसेना के आधुनिकीकरण में उनकी भूमिका में जगुआर और मिग-27 के उन्नयन की परियोजनाएं शामिल हैं। हल्के लड़ाकू विमान तेजस एमके-I की प्रारंभिक और अंतिम परिचालन मंजूरी की प्रक्रिया पूरी करने में भी उनका अहम योगदान रहा है। वह ऑपरेशन सफेद सागर, ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन सिंदूर में भाग ले चुके हैं।
इससे पहले 7 अक्टूबर 2026 को भी दीक्षित ने राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी। सरकार ने उस समय उन्हें 31 अक्टूबर की दोपहर से अगला वायुसेना प्रमुख नियुक्त करने की घोषणा की थी। तब एयर मार्शल के पद पर रहे दीक्षित को रक्षा मंत्री ने नियुक्ति पर बधाई और शुभकामनाएं दी थीं।