ब्रिगेडियर रूपम चटर्जी ने 2 नवंबर 2026 को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के प्रोजेक्ट वर्तक की कमान संभाली। उन्होंने ब्रिगेडियर संजीत सिंह का स्थान लिया, जिनका कार्यकाल पूरा हो गया है।
प्रोजेक्ट वर्तक अरुणाचल प्रदेश और असम में रणनीतिक रूप से अहम सड़कों के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाता है। खासकर दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों में इसकी सड़कें सैनिकों की आवाजाही, रसद पहुंचाने और स्थानीय आबादी की यातायात जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इस परियोजना के कार्यक्षेत्र में पहाड़ी भूभाग, भारी बारिश, भूस्खलन और प्रतिकूल मौसम सड़क निर्माण तथा रखरखाव को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। इन मार्गों को चालू रखने के लिए लगातार इंजीनियरिंग कार्य, प्रभावी योजना और समय पर काम पूरा करना जरूरी होता है।
ब्रिगेडियर संजीत सिंह ने अपने कार्यकाल में रणनीतिक संपर्क मजबूत करने और जरूरी सड़क नेटवर्क को बनाए रखने में योगदान दिया। इस दौरान दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों में निर्माण से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों और रसद संबंधी कठिनाइयों के बीच काम आगे बढ़ाया गया।
कमान संभालने के बाद ब्रिगेडियर रूपम चटर्जी ने बीआरओ के आदर्श वाक्य ‘श्रमेण सर्वम् साध्यम्’ यानी ‘परिश्रम से सब कुछ संभव है’ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने क्षेत्र में सड़क संपर्क मजबूत करने के लिए समर्पण, उच्चस्तरीय इंजीनियरिंग और काम को समय पर पूरा करने को प्राथमिकता दी।
अरुणाचल प्रदेश की सीमा चीन से लगती है, इसलिए प्रोजेक्ट वर्तक का रणनीतिक महत्व भी है। भरोसेमंद सड़क नेटवर्क सैनिकों, सैन्य उपकरणों और रसद की तेज आवाजाही में मदद करता है तथा सशस्त्र बलों की अभियान संबंधी तैयारियों को सहारा देता है।
इन सड़कों से दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, बाजारों और अन्य जरूरी सुविधाओं तक पहुंच भी बेहतर होती है। बेहतर संपर्क स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है। ब्रिगेडियर चटर्जी के नेतृत्व में परियोजना जरूरी सड़क ढांचे के विकास और रखरखाव का काम जारी रखेगी, ताकि रणनीतिक मार्ग खुले और आवागमन के योग्य बने रहें।