सैनिकों को भत्तों के मद में 5.58 करोड़ रुपये का अनियमित भुगतान कराने के आरोप में सेना के एक हवलदार क्लर्क के खिलाफ पश्चिम बंगाल के बिन्नागुड़ी में समरी कोर्ट मार्शल की कार्यवाही चल रही है। आरोप है कि उसने आधिकारिक सेवा रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा किया और इसके बदले 1.73 करोड़ रुपये कमीशन के तौर पर लिए।
हवलदार की तैनाती 20 माउंटेन आर्टिलरी ब्रिगेड कैंप में थी। मामला 2022 में सामने आया, जब प्रधान रक्षा लेखा नियंत्रक (पीसीडीए) ने पार्ट-II आदेश देरी से जारी किए जाने पर ऑडिट आपत्ति उठाई। जांच के अनुसार, कथित अनियमितताएं दिसंबर 2019 से सितंबर 2022 के बीच हुईं।
20 माउंटेन आर्टिलरी ब्रिगेड कैंप की आंतरिक जांच में पाया गया कि हवलदार ने अस्थायी ड्यूटी से जुड़े 75 गलत आदेश, बच्चों के शिक्षा भत्ते के 43, छात्रावास सब्सिडी भत्ते के 51 और मकान किराया भत्ते के 49 गलत आदेश जारी किए थे। छात्रावास सब्सिडी भत्ता रक्षा कर्मियों के उन बच्चों के रहने और खाने का खर्च पूरा करने के लिए दिया जाता है, जो आवासीय स्कूलों में पढ़ते हैं।
सेना के सूत्रों के मुताबिक, पीसीडीए ने एक जवान के खाते में असामान्य रूप से अधिक राशि और उससे संबंधित पार्ट-II आदेश देर से जारी होने पर सवाल उठाए थे। इसके बाद जवान को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। उसने 2 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2022 की अवधि के लिए बढ़ी हुई दर पर छात्रावास भत्ते का दावा किया था, जबकि उसके बच्चे एलकेजी, पहली और दूसरी कक्षा में पढ़ रहे थे।
जवान ने गलत दावा करने की बात स्वीकार की और आरोप लगाया कि हवलदार ने कमीशन लेकर उसका दावा आगे बढ़ाया था। इसके बाद विस्तृत कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का आदेश दिया गया।
सेना ने हवलदार पर करीब एक दर्जन आरोप लगाए हैं। इनमें विभिन्न भत्तों के लिए फर्जी पार्ट-II आदेश जारी करने के बदले कमीशन लेना, कैंप कमांडेंट के हस्ताक्षर जाली बनाना, कमांडेंट के मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (एचआरएमएस) टोकन का बिना अनुमति इस्तेमाल करना और स्कूल प्राधिकारियों की फर्जी मुहर का उपयोग करना शामिल है।
हवलदार ने समरी कोर्ट मार्शल की कार्यवाही शुरू किए जाने को सशस्त्र बल अधिकरण (एएफटी) में चुनौती दी थी। उसकी दलील थी कि सेना अधिनियम, 1950 की धारा 122 के तहत इन आरोपों पर कार्रवाई की समय-सीमा समाप्त हो चुकी है।
एएफटी ने जून 2026 में उसकी अर्जी का निपटारा करते हुए कहा कि वह सेना नियम, 1954 में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कोर्ट मार्शल के दौरान उचित चरण पर समय-सीमा का मुद्दा उठा सकता है। बिन्नागुड़ी में उसके खिलाफ समरी कोर्ट मार्शल की कार्यवाही जारी है।