सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में मैकेनाइज्ड बलों के द्विवार्षिक सम्मेलन 2026 में शामिल हुए। आर्मर्ड कोर सेंटर एंड स्कूल में आयोजित इस सम्मेलन में वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व ने इन बलों के आधुनिकीकरण और भविष्य की युद्धक जरूरतों पर चर्चा की।
अहिल्यानगर से 2 नवंबर 2026 को मिली जानकारी के अनुसार, सम्मेलन में बदलती अभियानगत आवश्यकताओं, भविष्य में सैन्य बलों के इस्तेमाल और उपलब्ध मानव संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर रहा। नई तकनीकों को अपनाकर मैकेनाइज्ड फॉर्मेशनों की युद्धक क्षमता बढ़ाना भी चर्चा का प्रमुख विषय था।
मैकेनाइज्ड बलों में बख्तरबंद इकाइयां और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री शामिल हैं। गतिशीलता, मारक क्षमता और सुरक्षा के साथ तेजी से पैंतरा बदलने की उनकी क्षमता आक्रामक अभियानों में अहम होती है। ये बल युद्धक्षेत्र में मिली बढ़त को आगे बढ़ाने और अभियानगत श्रेष्ठता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रतिभागियों ने आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप और मैकेनाइज्ड फॉर्मेशनों के इस्तेमाल पर उसके असर की समीक्षा की। उभरती सैन्य तकनीकों, बदलते युद्धक सिद्धांतों और विभिन्न सैन्य क्षमताओं को एक साथ प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करने की जरूरत पर विचार हुआ।
युद्धक्षेत्र की स्थिति की बेहतर जानकारी, इकाइयों के बीच समन्वय और युद्धक प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए उन्नत तकनीकों के एकीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया। इसमें निगरानी प्रणालियों, मानवरहित प्लेटफॉर्म, सुरक्षित संचार और डिजिटल कमान एवं नियंत्रण क्षमताओं की भूमिका प्रमुख रही।

मानव संसाधनों से जुड़ी चर्चा में जटिल सैन्य उपकरणों के संचालन के लिए जरूरी कौशल, प्रशिक्षण और संगठनात्मक ढांचे पर जोर दिया गया। उद्देश्य यह था कि मैकेनाइज्ड फॉर्मेशन नई अभियानगत चुनौतियों के अनुरूप खुद को ढाल सकें।
भविष्य में इन बलों की तैनाती और उपयोग भी सम्मेलन का अहम विषय रहा। अलग-अलग सैन्य परिस्थितियों में मैकेनाइज्ड इकाइयों को अधिक लचीला बनाने, उनकी त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने और युद्धक क्षमताओं को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

सम्मेलन सेना की ‘जय से विजय’ परिकल्पना के अनुरूप था, जिसमें संयुक्त रूप से काम करने, आत्मनिर्भरता और नवाचार पर जोर है। इसके तहत आधुनिक तकनीक को सैन्य अभियानों के अनुभव से जोड़ने, स्वदेशी क्षमताएं मजबूत करने और युद्ध के विभिन्न क्षेत्रों में समन्वय बढ़ाने को प्राथमिकता दी गई।

अहिल्यानगर स्थित आर्मर्ड कोर सेंटर एंड स्कूल भारतीय सेना की आर्मर्ड कोर के कार्मिकों को प्रशिक्षण देने वाला प्रमुख संस्थान है। यहां बख्तरबंद युद्ध संचालन से जुड़ी पेशेवर विशेषज्ञता विकसित की जाती है।
चर्चा में सैन्य सिद्धांतों और प्रशिक्षण पद्धतियों को युद्धक्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुरूप ढालने पर भी जोर रहा। इनमें गति, सटीकता, तकनीकों का एकीकृत इस्तेमाल और समन्वित सैन्य अभियान प्रमुख आवश्यकताओं के रूप में सामने आए।