उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने जम्मू-कश्मीर के रियासी क्षेत्र का दौरा कर आतंकवाद-रोधी अभियानों और सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने क्षेत्र की मौजूदा सुरक्षा स्थिति का भी जायजा लिया।
इस दौरान खुफिया और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि भी उनके साथ थे। समीक्षा में सीमावर्ती इलाकों से दूर के क्षेत्रों की सुरक्षा, जारी आतंकवाद-रोधी अभियानों और एजेंसियों के बीच खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया।

सैन्य कमांडरों और सुरक्षा अधिकारियों ने लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा को अभियान संबंधी हालात और आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए किए जा रहे उपायों की विस्तृत जानकारी दी। मौजूदा सुरक्षा तंत्र की प्रभावशीलता पर भी चर्चा हुई। साथ ही निगरानी, खुफिया समन्वय और खतरों पर कार्रवाई की व्यवस्था को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

समीक्षा का एक प्रमुख विषय सेना, खुफिया संगठनों और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त खुफिया व्यवस्था को अधिक समन्वित बनाना था। इसका उद्देश्य संभावित खतरों की समय रहते पहचान करना, जरूरी सूचनाएं तेजी से साझा करना और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने सुरक्षा अभियानों से जुड़ी सभी एजेंसियों के बीच करीबी तालमेल बनाए रखने पर जोर दिया। चर्चा में उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए साझा योजना, प्रभावी सूचना आदान-प्रदान और लगातार सतर्कता की जरूरत रेखांकित की गई।
दुर्गम भूभाग, बड़े वन क्षेत्रों और पड़ोसी जिलों से जुड़ाव के कारण रियासी जिला जम्मू क्षेत्र में सामरिक महत्व रखता है। यहां प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था के लिए निरंतर निगरानी, खुफिया सूचनाओं पर आधारित अभियान और सैन्य व असैन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच सहयोग जरूरी है।
समीक्षा में इस बात पर भी जोर रहा कि कठिन भौगोलिक और अभियान संबंधी परिस्थितियों के बीच सुरक्षा बल संभावित खतरों का जवाब देने के लिए तैयार रहें।
जवानों से बातचीत के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा ने चुनौतीपूर्ण हालात में उनकी कर्तव्यनिष्ठा, उच्च स्तर की अभियान संबंधी तैयारियों और पेशेवर दक्षता की सराहना की। उन्होंने क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखने और आतंकवाद-रोधी अभियानों में जुटे कर्मियों के समर्पण तथा कठिन परिस्थितियों में डटे रहने के जज्बे को भी सराहा।