प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार, 8 नवंबर 2026 को छत्तीसगढ़ के बस्तर में तैनात सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दिवाली मनाने जा रहे हैं। यह त्योहार जवानों के साथ मनाने की उनकी वार्षिक परंपरा का हिस्सा है।
मोदी ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि वह जवानों के बलिदान और देश के प्रति उनकी सेवा को नमन करने बस्तर जा रहे हैं। उन्होंने हिंदी में लिखा, “दीपावली के पावन अवसर पर बस्तर जा रहा हूं। कल तक जहां नक्सलियों का कहर था वहां आज विकास की बहार है। वीर जवानों, उनके बलिदान, त्याग और तपस्या को नमन करने जा रहा हूं।”
पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने भी दौरे की पुष्टि की। उसने कहा कि प्रधानमंत्री बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दिवाली मनाएंगे और उनके बलिदान तथा देश के प्रति समर्पण को नमन करेंगे।
बस्तर लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद का प्रमुख केंद्र रहा है। 31 मार्च 2026 को सरकार ने कई नेताओं और कैडरों के मारे जाने तथा सैकड़ों लोगों के आत्मसमर्पण के बाद देश को माओवाद के खतरे से मुक्त घोषित किया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मई 2026 में बस्तर को नक्सल-मुक्त बताया था।
क्षेत्र में माओवाद-विरोधी अभियानों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की अहम भूमिका रही है। इनमें सीआरपीएफ और उसकी कोबरा इकाइयां शामिल हैं। छत्तीसगढ़ पुलिस और जिला रिजर्व गार्ड भी अभियानों में शामिल रहे हैं।
यह दौरा सीआरपीएफ के उस रिकॉर्ड के कुछ दिन बाद हो रहा है, जब बल ने लगातार 12 महीने तक किसी भी अभियान में जवान की मौत के बिना काम किया। 47 वर्षों में यह पहली बार हुआ है। सीआरपीएफ की पिछली अभियान-संबंधी मौत 30 अक्टूबर 2025 को दर्ज हुई थी। मोदी ने एक्स पर इस उपलब्धि की तारीफ करते हुए लिखा था, “A ZERO that speaks volumes।”
सीआरपीएफ महानिदेशक जीपी सिंह ने इस रिकॉर्ड का श्रेय आधुनिक उपकरणों, बेहतर प्रशिक्षण, रणनीतिक योजना और घायल जवानों को तेजी से चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने को दिया।
शनिवार को दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए मोदी ने कहा था कि वह देश के सैनिकों के साथ त्योहार मनाने की अपनी परंपरा जारी रखेंगे। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री का बस्तर में स्वागत किया और कहा कि उनका दौरा सुरक्षा बलों के साहस और बलिदान का सम्मान है। उन्होंने इसे क्षेत्र में शांति और विकास की ओर बदलाव का प्रतीक भी बताया।
बस्तर में जवानों से मुलाकात की सटीक जगह आधिकारिक तौर पर नहीं बताई गई है। प्रधानमंत्री के क्षेत्र में तैनात जवानों के साथ समय बिताने की उम्मीद है।