मेजर नव्या शेखावत ने इतिहास रचते हुए भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी के रूप में भारत के राष्ट्रपति की सहयोगी सहायक अधिकारी बनने का गौरव हासिल किया है। राष्ट्रपति भवन में यह नियुक्ति भारतीय सशस्त्र बलों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और जिम्मेदारी, सम्मान तथा राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के पदों पर महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका का प्रतीक भी है।
आर्मी सर्विस कोर की अधिकारी मेजर शेखावत इस समय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सहयोगी सहायक अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी के रूप में यह पद संभालने वाली वह पहली हैं, जबकि कुल मिलाकर राष्ट्रपति की सहयोगी सहायक अधिकारी बनने वाली वह दूसरी महिला अधिकारी हैं। इससे पहले मई 2025 में भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी पहली महिला सहयोगी सहायक अधिकारी बनी थीं।
उनकी यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि वर्दी में महिलाओं की यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय भी है। यह भारतीय सैन्य व्यवस्था में आए बदलाव को दर्शाती है, जहां महिला अधिकारियों को अब उनकी योग्यता, पेशेवर दक्षता और नेतृत्व क्षमता के लिए अधिक पहचान मिल रही है।
मेजर शेखावत का भारतीय सेना में प्रवेश संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा के माध्यम से हुआ। उन्होंने यह परीक्षा उत्तीर्ण की और अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी, चेन्नई में लघु सेवा आयोग महिला गैर-तकनीकी पाठ्यक्रम की मेरिट सूची में स्थान प्राप्त किया।
अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी, चेन्नई भारत की प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण संस्थाओं में से एक है, जहां युवाओं को भारतीय सेना के कमीशंड अधिकारी के रूप में तैयार किया जाता है। यहां का प्रशिक्षण शारीरिक दृढ़ता, मानसिक धैर्य, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और अधिकारी-सम योग्य गुणों की मांग करता है। मेजर शेखावत ने यह कठिन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर सेना में कमीशन प्राप्त किया।
उन्हें आर्मी सर्विस कोर में नियुक्त किया गया, जो भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण सेवाओं में से एक है। यह कोर रसद, आपूर्ति, परिवहन, ईंधन, राशन और अन्य आवश्यक जरूरतों को संभालकर बल की संचालन क्षमता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। किसी भी सैन्य अभियान में सैनिकों की लड़ाकू क्षमता काफी हद तक प्रभावी रसद व्यवस्था पर निर्भर करती है।
संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थी से लेकर कमीशंड अधिकारी और फिर सैन्य प्रतिष्ठान में एक अत्यंत प्रतिष्ठित नियुक्ति तक मेजर शेखावत की यात्रा उनकी समर्पण भावना, दक्षता और पेशेवर उत्कृष्टता को दर्शाती है। सेवा के कुछ ही वर्षों में राष्ट्रपति की सहयोगी सहायक अधिकारी के रूप में उनका चयन संस्था द्वारा उन पर जताए गए भरोसे को भी दिखाता है।
राष्ट्रपति की सहयोगी सहायक अधिकारी की नियुक्ति भारतीय सशस्त्र बलों में सबसे सम्मानित और सबसे अधिक दिखाई देने वाले स्टाफ पदों में मानी जाती है। सहयोगी सहायक अधिकारी राष्ट्रपति के निजी स्टाफ का हिस्सा होते हैं और आधिकारिक, औपचारिक तथा प्रोटोकॉल से जुड़ी जिम्मेदारियों में सहायता करते हैं। वे राष्ट्रीय आयोजनों, राज्य समारोहों, अलंकरण समारोहों, आधिकारिक कार्यक्रमों और राजनयिक अवसरों पर दिखाई देते हैं।
इस भूमिका में असाधारण अनुशासन, आत्मविश्वास, शारीरिक गरिमा, संवाद कौशल और सैन्य प्रोटोकॉल की गहरी समझ आवश्यक होती है। एक सहयोगी सहायक अधिकारी अपने सेवा-बल का ही नहीं, बल्कि गणराज्य के सर्वोच्च स्तर पर सशस्त्र बलों की गरिमा और पेशेवर छवि का भी प्रतिनिधित्व करता है।
दशकों तक ऐसे पदों पर मुख्यतः पुरुष अधिकारी ही नियुक्त होते रहे। हालांकि, 2025 में भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर यशस्वी सोलंकी के पहले महिला सहयोगी सहायक अधिकारी बनने से इतिहास का एक नया अध्याय शुरू हुआ। अब भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी के रूप में मेजर नव्या शेखावत का चयन इस प्रगति को और मजबूत करता है।
राष्ट्रपति भवन में उनकी मौजूदगी ने अनेक युवा रक्षा अभ्यर्थियों, खासकर उन महिलाओं को प्रेरित किया है जो सशस्त्र बलों में शामिल होने का सपना देखती हैं। आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रपति के साथ खड़ी मेजर शेखावत की तस्वीरें और वीडियो व्यापक ध्यान और सराहना का विषय बने हैं। कई लोगों के लिए वह वर्दी में नारी शक्ति का एक सशक्त प्रतीक बन गई हैं।
मेजर शेखावत की उपलब्धि को भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी के व्यापक संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। महिला अधिकारियों ने 1990 के दशक की शुरुआत में लघु सेवा आयोग के माध्यम से सेना में प्रवेश किया था। वर्षों में उनकी भूमिका विभिन्न शस्त्रों और सेवाओं में काफी विस्तृत हुई है।
2020 के उच्चतम न्यायालय के उस निर्णय ने, जिसमें महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया गया, एक बड़ा मोड़ लाया। तब से महिला अधिकारियों को कमान, स्टाफ नियुक्तियों और दीर्घकालिक सेवा प्रगति के अधिक अवसर मिले हैं। मेजर शेखावत की यह नियुक्ति उसी बड़े परिवर्तन का हिस्सा है।
उनकी उपलब्धि यह भी दिखाती है कि उत्कृष्टता किसी एक शाखा तक सीमित नहीं होती। जहां युद्धक शाखाएं अक्सर अधिक चर्चा में रहती हैं, वहीं आर्मी सर्विस कोर जैसी सेवाएं सैन्य अभियानों की रीढ़ होती हैं। मेजर शेखावत की यात्रा बताती है कि हर शाखा के अधिकारी योग्यता, पेशेवर रवैये और निरंतर प्रदर्शन के बल पर अत्यंत प्रतिष्ठित पदों तक पहुंच सकते हैं।
संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा, एसएसबी साक्षात्कार और सशस्त्र बलों में प्रवेश के अन्य मार्गों की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए उनकी कहानी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। सेना में सफलता अकादमिक तैयारी, शारीरिक फिटनेस, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास, अनुशासन और चरित्र के मेल से बनती है। अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी से राष्ट्रपति भवन तक का उनका सफर इन्हीं गुणों के महत्व को रेखांकित करता है।
यह नियुक्ति यह भी याद दिलाती है कि भारतीय सेना समय के साथ बदलते हुए भी अपने मूल मूल्यों, कर्तव्य, सम्मान और सेवा, को बनाए हुए है। सक्षम महिला अधिकारियों को इतने उच्च दृश्यता वाले पदों पर पहचान देकर संस्था यह स्पष्ट संदेश देती है कि नेतृत्व और उत्कृष्टता का आधार लैंगिक पहचान नहीं, बल्कि योग्यता है।
भारत के राष्ट्रपति की सहयोगी सहायक अधिकारी के रूप में भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी मेजर नव्या शेखावत की ऐतिहासिक नियुक्ति देश के लिए गर्व का क्षण है। यह महिला अधिकारियों में बढ़ते विश्वास और अत्यंत चुनौतीपूर्ण तथा प्रतिष्ठित नियुक्तियों में उनके सफलतापूर्वक सेवा देने की क्षमता को दर्शाती है।
राष्ट्रपति भवन में अपनी जिम्मेदारियां निभाते हुए मेजर शेखावत अनगिनत युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं। उनकी यात्रा अनुशासन, संकल्प, पेशेवर दक्षता और सेवा की मौन शक्ति को दर्शाती है। वर्दी पहनने का सपना देखने वाले हर अभ्यर्थी के लिए उनकी कहानी यह याद दिलाती है कि समर्पण और योग्यता इतिहास के द्वार खोल सकते हैं।