सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने त्रिशक्ति कोर और त्रिनिटी क्षेत्र मुख्यालय का दौरा कर मौजूदा सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की और संरचनाओं की परिचालन तैयारी का आकलन किया। इस दौरान भारतीय सेना की युद्ध तत्परता बनाए रखने, उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने और अंतर-एजेंसी सहयोग को मजबूत करने पर लगातार जोर को रेखांकित किया गया।
दौरे के दौरान जनरल धीरज सेठ को संरचनाओं की तैनाती, बदलती सुरक्षा परिस्थितियों और उन्नत प्रौद्योगिकियों के उपयोग से परिचालन प्रभावशीलता बढ़ाने की चल रही पहलों के बारे में जानकारी दी गई। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने सेना प्रमुख को निगरानी क्षमता बढ़ाने, रसद सहायता प्रणाली को बेहतर बनाने और उभरती चुनौतियों पर त्वरित प्रतिक्रिया को अनुकूल बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों से अवगत कराया।
प्रौद्योगिकी आत्मसात करने की पहलों पर विशेष बल दिया गया, जो कई क्षेत्रों में परिचालन क्षमताओं को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। भारतीय सेना ने उन्नत तकनीकी समाधानों को अपने परिचालन ढांचे में शामिल करने पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें बेहतर स्थिति-जागरूकता प्रणाली, संचार नेटवर्क, रसद प्रबंधन उपकरण और बल-वर्धन क्षमताएं शामिल हैं।
सेना प्रमुख ने रसद क्षमताओं को मजबूत करने से जुड़ी पहलों की भी समीक्षा की। उन्होंने विविध भौगोलिक परिस्थितियों और परिचालन वातावरण में सैन्य अभियानों को बनाए रखने में मजबूत और त्वरित रसद प्रणाली की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार किया।
जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के कर्मियों से बातचीत की और उनके अटूट समर्पण, व्यावसायिकता तथा कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की। उन्होंने सभी रैंकों द्वारा बनाए गए उत्कृष्ट परिचालन तैयारियों के मानकों की प्रशंसा की और कठिन परिस्थितियों में राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा में उनके योगदान को स्वीकार किया।
सेना प्रमुख ने क्षेत्र में तैनात विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच दिखाई गई समन्वित कार्यशैली की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि आज की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए अनेक पक्षों की संयुक्त प्रतिक्रिया आवश्यक होती है, इसलिए परस्पर कार्यसंगति और संस्थागत सहयोग परिचालन सफलता के महत्वपूर्ण आधार हैं।
उन्होंने आधुनिक सैन्य अभियानों में संयुक्तता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि एकीकृत योजना, साझा परिचालन लक्ष्य और सुरक्षा एजेंसियों के बीच निर्बाध समन्वय आज के जटिल सुरक्षा परिवेश से निपटने के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की परिचालन परिस्थितियों में प्रौद्योगिकीय क्षमता, व्यावसायिक विशेषज्ञता और संस्थागत दृढ़ता को जोड़ने वाले सहयोगी दृष्टिकोण की आवश्यकता और अधिक बढ़ेगी।
सेना प्रमुख ने राष्ट्रीय सुरक्षा और परिचालन प्रभावशीलता बढ़ाने में सैन्य-नागरिक समन्वय के बढ़ते महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सैन्य संस्थानों, नागरिक प्रशासन और अन्य पक्षों के बीच सार्थक सहयोग संकट प्रबंधन तंत्र को बेहतर बनाने, लचीलापन बढ़ाने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सतत विकासात्मक परिणामों को सुगम बनाने में मदद करता है।
जनरल धीरज सेठ ने सभी रैंकों को नवाचार अपनाने, व्यावसायिक उत्कृष्टता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने और बदलती परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को ढालते रहने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने दोहराया कि सतर्कता, प्रौद्योगिकीय दक्षता और निरंतर क्षमता वृद्धि भविष्य में परिचालन श्रेष्ठता बनाए रखने के लिए केंद्रीय तत्व बने रहेंगे।
यह दौरा भारतीय सेना की उस निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत वह प्रौद्योगिकीय आधुनिकीकरण, बेहतर परिचालन तैयारी और मजबूत अंतर-एजेंसी सहयोग के माध्यम से भविष्य के लिए सक्षम संरचनाएं विकसित कर रही है। संयुक्तता, निर्बाध समन्वय और सैन्य-नागरिक सहयोग पर ध्यान राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए मूल आधार बना हुआ है।
भारतीय सेना ने कहा कि परिचालन उत्कृष्टता को बढ़ावा देकर और सुरक्षा के एकीकृत दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करके वह एक ऐसी युद्ध-सक्षम शक्ति के रूप में अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत कर रही है, जो वर्तमान और भविष्य के सैन्य अभियानों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार है।