थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने स्पीयर कोर का दौरा कर उभरते हुए परिचालन परिवेश की समीक्षा की और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में युद्ध-तत्परता को और मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे उपायों का आकलन किया। यह दौरा भारतीय सेना की उच्च स्तर की परिचालन तैयारी बनाए रखने के साथ-साथ क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को दोहराता है।
दौरे के दौरान जनरल धीरज सेठ को मौजूदा सुरक्षा स्थिति और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में परिचालन गतिशीलता की विस्तृत जानकारी दी गई। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने उन्हें गठन की तैयारी, क्षमता वृद्धि की पहलों और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के लिए तेज तथा प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया।
समीक्षा में भारतीय सेना के उस निरंतर फोकस को रेखांकित किया गया, जिसके तहत वह युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुरूप खुद को ढालने के लिए सतत आधुनिकीकरण और भविष्य-केंद्रित परिचालन योजना पर काम कर रही है। स्पीयर कोर उत्तर-पूर्व में भारत के रणनीतिक हितों की सुरक्षा के लिए भारतीय सेना के प्रमुख परिचालन संगठनों में से एक है।
चुनौतीपूर्ण भूभाग और विविध सुरक्षा आवश्यकताओं वाले इस क्षेत्र में कोर शांति और सुरक्षा बनाए रखने के साथ-साथ असैनिक प्रशासन के साथ मिलकर विकास और मानवीय पहलों में भी अहम भूमिका निभा रही है। जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना की जन-केंद्रित कार्यप्रणाली के तहत चल रहे जनसंपर्क कार्यक्रमों की भी समीक्षा की।
इन पहलों का उद्देश्य उत्तर-पूर्वी राज्यों में शांति, स्थिरता और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। ये कार्यक्रम स्थानीय समुदायों के साथ विश्वास और सहयोग को मजबूत करने तथा दूरस्थ और सीमा क्षेत्रों में राष्ट्र-निर्माण के प्रयासों में सार्थक योगदान देने की सेना की व्यापक सोच का हिस्सा हैं।
जनसंपर्क कार्यक्रमों के तहत शैक्षिक सहयोग, स्वास्थ्य संबंधी पहल, बुनियादी ढांचा विकास, कौशल संवर्धन कार्यक्रम और मानवीय सहायता परियोजनाएं शामिल हैं। स्थानीय आबादी के साथ निरंतर जुड़ाव के जरिए भारतीय सेना ने क्षेत्र में सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने और समावेशी विकास को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
थल सेनाध्यक्ष ने मजबूत परिचालन तैयारी और सार्थक सामुदायिक सहभागिता के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्व को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि स्थायी शांति और स्थिरता केवल प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था से ही नहीं, बल्कि विकासात्मक आकांक्षाओं को संबोधित करने और संस्थाओं तथा समुदायों के बीच पारस्परिक विश्वास बढ़ाने वाली पहलों से भी मजबूत होती है।
जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना और असम राइफल्स के अधिकारियों, कनिष्ठ नेताओं और सैनिकों से बातचीत करते हुए उनकी पेशेवर दक्षता, समर्पण और अत्यंत उच्च परिचालन मानकों की सराहना की। उन्होंने चुनौतीपूर्ण परिचालन वातावरण में कर्तव्य निभाते हुए उनकी अटूट प्रतिबद्धता की प्रशंसा की और उत्तर-पूर्व में शांति बनाए रखने तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा में उनके योगदान को स्वीकार किया।
थल सेनाध्यक्ष ने क्षेत्र में परिचालन और विकासात्मक दोनों आवश्यकताओं को पूरा करने में भारतीय सेना और असम राइफल्स के बीच सहज समन्वय की भी प्रशंसा की। उनके अनुसार, ऐसी सहयोगी व्यवस्था उभरती चुनौतियों के प्रभावी समाधान, संस्थागत क्षमताओं के सुदृढ़ीकरण और समग्र मिशन प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच सतत सतर्कता, चुस्ती और भविष्य के लिए तैयार रहने पर जोर दिया। जनरल धीरज सेठ ने कहा कि आधुनिक सैन्य अभियानों में अनुकूलनशीलता, तकनीकी दक्षता और निरंतर पेशेवर उत्कृष्टता की जरूरत होती है, इसलिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता वृद्धि परिचालन सफलता के अनिवार्य अंग हैं।
थल सेनाध्यक्ष ने यह भी दोहराया कि भारतीय सेना सभी परिचालन क्षेत्रों में युद्ध क्षमता को मजबूत करने के लिए नवाचार और आधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्नत प्रौद्योगिकी, यथार्थवादी प्रशिक्षण पद्धतियों और अनुकूल नेतृत्व का एकीकरण भविष्य के युद्ध की जटिल आवश्यकताओं के लिए संरचनाओं को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
स्पीयर कोर का यह दौरा भारतीय सेना के उस निरंतर प्रयास को दर्शाता है, जिसके तहत वह युद्ध-तैयार संरचनाओं को बनाए रखते हुए क्षेत्रीय शांति और विकास में सकारात्मक योगदान दे रही है। परिचालन उत्कृष्टता और समुदाय-केंद्रित पहलों के संयोजन के जरिए भारतीय सेना देश की सुरक्षा और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की स्थिरता को सुदृढ़ करने की अपनी स्थायी प्रतिबद्धता को बनाए रखे हुए है।