प्रधान रक्षा प्रमुख तथा सैन्य कार्य विभाग के सचिव जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने 16 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ से शिष्टाचार भेंट की। इस उच्चस्तरीय मुलाकात में राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे के प्रमुख पहलुओं पर चर्चा हुई, जिनमें मौजूदा सुरक्षा वातावरण, सशस्त्र बलों के बीच संयुक्तता को मजबूत करना, क्षमता विकास और रक्षा सुधार शामिल थे।
बैठक के दौरान जनरल राजा सुब्रमणि ने रक्षा राज्य मंत्री को बदलते सुरक्षा परिदृश्य और समकालीन तथा उभरती चुनौतियों के जवाब में भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। चर्चाओं में सरकार के इस निरंतर फोकस को रेखांकित किया गया कि देश को एक ऐसी सैन्य शक्ति के रूप में विकसित किया जाए जो प्रौद्योगिकीय रूप से उन्नत, एकीकृत और भविष्य के लिए तैयार हो।
चर्चा का एक प्रमुख विषय भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों सेवाओं के बीच संयुक्तता और एकीकरण को बढ़ाना रहा। सैन्य कार्य विभाग भारतीय थल सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना के बीच अधिक परिचालन समन्वय और संस्थागत एकीकरण को बढ़ावा देने के प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है। रक्षा आधुनिकीकरण के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप त्रि-सेवा सहयोग को मजबूत करना लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है।
बैठक में क्षमता विकास पहलों पर भी बात हुई, जिनका उद्देश्य सशस्त्र बलों को उन्नत प्रौद्योगिकियों, आधुनिक सैन्य मंचों और बेहतर परिचालन क्षमताओं से लैस करना है। भारत के चल रहे रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम स्वदेशी क्षमता विकास, प्रौद्योगिकीय नवाचार और भविष्योन्मुख सैन्य प्रणालियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, ताकि युद्ध के बदलते स्वरूप का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
जनरल राजा सुब्रमणि और श्री संजय सेठ ने सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों को और मजबूत करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया। यथार्थपरक प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी एकीकरण और मजबूत रसद क्षमताओं के माध्यम से उच्च स्तर की तैयारी बनाए रखना, गतिशील सामरिक वातावरण में परिचालन श्रेष्ठता बनाए रखने के लिए आवश्यक माना गया।
चर्चा में सैन्य कार्य विभाग के तहत जारी रक्षा सुधारों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अपने गठन के बाद से विभाग ने संसाधनों के बेहतर उपयोग, संयुक्त योजना तंत्र को सशक्त बनाने और सेवाओं के बीच अधिक एकीकरण को सुगम करने के लिए संरचनात्मक और संगठनात्मक सुधारों में अहम भूमिका निभाई है। इन पहलों का उद्देश्य भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सक्षम अधिक सुसंगत और चुस्त सैन्य ढांचा तैयार करना है।
रक्षा सुधार भारत की दीर्घकालिक सैन्य रूपांतरण दृष्टि का महत्वपूर्ण हिस्सा बने हुए हैं। इनमें संगठनात्मक पुनर्गठन, प्रौद्योगिकीय आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और अंतर-सेवा सहयोग को बढ़ाने से जुड़ी पहलें शामिल हैं। सुधारों पर लगातार जोर सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत सशस्त्र बलों को परिचालन रूप से अधिक प्रभावी और सामरिक रूप से अधिक अनुकूल बनाया जा रहा है।
शिष्टाचार भेंट में राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा तथा रक्षा तैयारियों से जुड़े विषयों पर सतत संवाद के महत्व को भी रेखांकित किया गया। शीर्ष स्तर पर नियमित बातचीत से सूचित निर्णय लेने में मदद मिलती है और भारत की सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए व्यापक रणनीतियों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है।
प्रधान रक्षा प्रमुख और सैन्य कार्य विभाग के सचिव के रूप में जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि सेवाओं के बीच अधिक एकीकरण को बढ़ावा देने और देश के सैन्य रूपांतरण एजेंडे को आगे बढ़ाने में केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। रक्षा राज्य मंत्री के साथ उनकी यह मुलाकात परिचालन तैयारियों को बढ़ाने, संयुक्तता को प्रोत्साहित करने और रक्षा सुधारों को गति देने की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।
इन चर्चाओं से भारत के उस निरंतर प्रयास की झलक मिलती है, जिसके तहत एक ऐसी आधुनिक, एकीकृत और भविष्य के लिए तैयार रक्षा शक्ति बनाई जा रही है, जो वर्तमान और उभरती दोनों सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहे और देश की संप्रभुता तथा सामरिक हितों की प्रभावी रक्षा कर सके।