एयर मार्शल एस. शिवकुमार, एयर ऑफिसर-इन-चार्ज प्रशासन (एओए) और वायु सेना प्रशासनिक महाविद्यालय (एएफएसी) के कमोडोर कमांडेंट, ने 30 से 31 जुलाई 2026 के बीच वायु सेना प्रशासनिक महाविद्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षण मानकों, आधारभूत संरचना और उन चल रही पहलों की समीक्षा की, जिनका उद्देश्य पेशेवर उत्कृष्टता और जीवन-स्तर को बेहतर बनाना है।
दौरे के दौरान एयर मार्शल का स्वागत एयर कमोडोर शिवानंद, कमांडेंट, एएफएसी ने किया। उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने महाविद्यालय के विभिन्न संकायों, प्रशिक्षण संस्थानों और कार्यात्मक अनुभागों का दौरा कर प्रशिक्षण को आधुनिक बनाने तथा संस्थागत ढांचे को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का आकलन किया।
एयर मार्शल को महाविद्यालय के उन प्रयासों की जानकारी दी गई, जिनके तहत अद्यतन पाठ्यक्रम, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और भारतीय वायु सेना की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार की गई पहलों के माध्यम से प्रशिक्षण की गुणवत्ता लगातार बढ़ाई जा रही है। उन्होंने इस स्थापना में अधिकारियों, वायु योद्धाओं और प्रशिक्षुओं के जीवन-स्तर तथा समग्र कल्याण में सुधार के लिए लागू उपायों की भी समीक्षा की।
संस्थान के प्रदर्शन की सराहना करते हुए एयर मार्शल शिवकुमार ने वायु सेना प्रशासनिक महाविद्यालय को प्रशासनिक अधिकारियों और कार्मिकों के प्रशिक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका सफलतापूर्वक निभाने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय पेशेवर क्षमता और संस्थागत उत्कृष्टता को मजबूत करने के लिए लगातार नई पहलें कर रहा है।
अपने संवाद के दौरान उन्होंने अधिकारियों, प्रशिक्षकों और प्रशिक्षुओं से कहा कि एएफएसी भारतीय वायु सेना की बढ़ती परिचालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभालने में सक्षम, भविष्य के लिए तैयार, पेशेवर रूप से दक्ष और प्रौद्योगिकी के प्रति जागरूक बल विकसित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने सभी कार्मिकों को प्रशिक्षण और प्रशासन के हर क्षेत्र में उत्कृष्टता, नवाचार और पेशेवरता की दिशा में निरंतर प्रयास करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया।
वायु सेना प्रशासनिक महाविद्यालय भारतीय वायु सेना के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित प्रशिक्षण संस्थानों में से एक है। यह प्रशासन, रसद, लेखा, शिक्षा, कार्मिक प्रबंधन और अन्य सहायक सेवाओं में विशेष प्रशिक्षण देने वाला प्रमुख संस्थान है, जो वायु सेना की परिचालन क्षमता बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।
यह दौरा भारतीय वायु सेना में पेशेवर सैन्य शिक्षा, संस्थागत विकास और प्रशासनिक उत्कृष्टता को सुदृढ़ करने पर लगातार दिए जा रहे जोर की पुष्टि करता है, ताकि उसके कार्मिक एक अधिक प्रौद्योगिकी-आधारित और गतिशील परिचालन वातावरण की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रह सकें।