वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने 3 अगस्त 2026 को वियतनाम की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा शुरू की। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी की पुष्टि हुई है। इसका उद्देश्य भारतीय वायु सेना और वियतनाम जन सेना की वायु रक्षा-वायु सेना सेवा के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करना, कार्यात्मक सहयोग बढ़ाना और नए क्षेत्रों की संभावनाएं तलाशना है।
वियतनामी वायु सेना ने वायु सेना प्रमुख का औपचारिक स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने वायु रक्षा-वायु सेना सेवा के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वू होंग सोन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक में दोनों पक्षों ने जारी रक्षा सहयोग की प्रगति की समीक्षा की और सैन्य संबंधों को और मजबूत करने के लिए नई पहलों पर चर्चा की।
वियतनाम स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, बातचीत का केंद्र भारत-वियतनाम उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी के तहत मौजूदा रक्षा साझेदारी को सुदृढ़ करना और सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करना रहा। यह यात्रा इंडो-पैसिफिक में बदलती क्षेत्रीय सुरक्षा परिस्थितियों के बीच रक्षा संबंधों को विस्तार देने की दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
आधिकारिक बैठकों से पहले वियतनाम में भारत के राजदूत त्शेरिंग डब्ल्यू. शेर्पा ने एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह को भारत-वियतनाम संबंधों की वर्तमान स्थिति और दोनों देशों की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी की जानकारी दी।
भारत और वियतनाम के बीच पिछले दो दशकों में घनिष्ठ रक्षा संबंध विकसित हुए हैं, जिनमें सैन्य प्रशिक्षण सहयोग का एक प्रमुख आधार रहा है। लगभग एक दशक से भारतीय वायु सेना वियतनामी पायलटों और तकनीकी कर्मियों को सुखोई सु-30 लड़ाकू विमान के संचालन और रखरखाव का प्रशिक्षण दे रही है। दोनों वायु सेनाएं रूसी मूल के इस लड़ाकू विमान के अलग-अलग संस्करणों का संचालन करती हैं, जिससे भारत का परिचालन अनुभव वियतनाम के क्षमता विकास के लिए उपयोगी रहा है।
नौसेना सहयोग भी द्विपक्षीय रक्षा संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरा है। भारतीय नौसेना ने वियतनामी नौसैनिक कर्मियों को किलो श्रेणी की पनडुब्बियों के संचालन का प्रशिक्षण दिया है, जिससे वियतनाम की जलमग्न युद्ध क्षमता मजबूत हुई है और दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग बढ़ा है।
भारत ने अनुदान और तकनीकी सहायता के माध्यम से वियतनाम की रक्षा क्षमता बढ़ाने में भी सहयोग किया है। वियतनाम के वायु सेना अधिकारी विद्यालय में एक विदेशी भाषा कक्षा के निर्माण के लिए 10 लाख अमेरिकी डॉलर का अनुदान दिया गया। इसके अलावा, भारतीय सहायता से न्हा ट्रांग स्थित दूरसंचार विश्वविद्यालय में एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रयोगशाला की स्थापना हुई, जिससे तकनीकी प्रगति और शोध सहयोग को समर्थन मिला।
भविष्य के सहयोग का दायरा विमानन रखरखाव और रसद तक भी बढ़ सकता है। दोनों देशों द्वारा एयरबस सी-295 परिवहन विमान के संचालन को देखते हुए, भारत और वियतनाम रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल गतिविधियों में सहयोग के अवसर तलाश रहे हैं। भारत का बढ़ता स्वदेशी विमानन तंत्र, जिसमें एयरबस-टाटा सी-295 विनिर्माण और रखरखाव सुविधाएं शामिल हैं, क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक उपयोगी मंच बन सकता है।
भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग की औपचारिक शुरुआत मार्च 2000 में एक द्विपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी। इस समझौते के तहत भारत ने वियतनाम के मिग-21 लड़ाकू बेड़े के ओवरहाल में सहायता की और वियतनामी लड़ाकू पायलटों तथा तकनीशियनों को व्यापक प्रशिक्षण दिया। भारत ने 2006 तक आवश्यक पुर्जे और तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई।
आज दोनों देशों के बीच रक्षा सहभागिता में संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा नीति वार्ताएं, नौसैनिक बंदरगाह दौरे, वायु सेना आदान-प्रदान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, शोध सहयोग और रक्षा प्रौद्योगिकियों का सह-विकास शामिल है। इन पहलों ने इस संबंध को दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की सबसे महत्वपूर्ण रक्षा साझेदारियों में शामिल कर दिया है।
एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह की यह यात्रा इस बात को रेखांकित करती है कि भारत वियतनाम के साथ रक्षा सहयोग को लगातार मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने, परस्पर संचालन क्षमता सुधारने और सुदृढ़ रक्षा क्षमताएं विकसित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।