सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने लखनऊ की अपनी यात्रा के दौरान चार विशिष्ट भारतीय सेना पूर्व सैनिकों को प्रतिष्ठित योद्धा सेवा सम्मान से सम्मानित किया। यह सम्मान उन पूर्व सैनिकों को दिया गया, जिन्होंने वर्दी उतारने के बाद भी समाज के लिए असाधारण योगदान दिया है।
यह सम्मान राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, मानवीय सेवा, कृषि, खेल, पर्यावरण संरक्षण और पूर्व सैनिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में निस्वार्थ कार्य करते रहने वाले पूर्व सैनिकों को मान्यता देता है। इसका ध्येय वाक्य “कर्म से गौरव, सेवा से विजय” है, जो सैनिक के उस स्थायी भाव को दर्शाता है जिसमें सक्रिय सैन्य सेवा समाप्त होने के बाद भी राष्ट्रसेवा की भावना बनी रहती है।
कार्यक्रम में जनरल धीरज सेठ ने कहा कि एक सैनिक कभी वास्तव में सेवानिवृत्त नहीं होता। सैन्य सेवा समाप्त हो सकती है, लेकिन कर्तव्य, ईमानदारी और सेवा के आदर्श उसके जीवन में आगे भी मार्गदर्शन करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन लोगों के लिए है, जिन्होंने सामुदायिक नेतृत्व और जनकल्याण के माध्यम से राष्ट्रसेवा जारी रखी है।
सम्मानित किए गए लोगों में मेजर जनरल हर्ष कक्कड़ (सेवानिवृत्त) शामिल थे, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और सामरिक चिंतन में उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। संयुक्त राष्ट्र के शांति स्थापना मिशनों में सेवा दे चुके इस पूर्व सैनिक ने स्ट्राइव इंडिया के संस्थापक सदस्य और उपाध्यक्ष के रूप में भी भारत की सामरिक चर्चा को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाई है।
कर्नल अरविंद सिंह कुशवाहा (सेवानिवृत्त) को स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा में उनके उल्लेखनीय कार्य के लिए योद्धा सेवा सम्मान दिया गया। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने एम्स नागपुर की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने में व्यापक योगदान दिया। महाराष्ट्र में कोविड-19 महामारी के दौरान उनके प्रयासों और अरुणाचल प्रदेश में चिकित्सा महाविद्यालयों के विकास में उनकी भूमिका का भी उल्लेख किया गया।
नायब सूबेदार राधे श्याम (सेवानिवृत्त) को उनके मानवीय कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने अपनी निजी संसाधनों से एक वृद्धाश्रम स्थापित किया, जहाँ पूर्व सैनिकों, युद्ध विधवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आश्रय, भोजन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। उनके कार्यों को सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में सराहना मिली है।
रिसालदार मेजर (मानद कैप्टन) विजय कुमार (सेवानिवृत्त) को पूर्व सैनिक कल्याण और युवा सशक्तिकरण में उनके योगदान के लिए सम्मान मिला। उन्होंने अपनी पहल और निजी संसाधनों से सैनिक पुस्तकालय और प्रेरणा केंद्र स्थापित किया, जहाँ युवाओं और पूर्व सैनिकों को निःशुल्क करियर परामर्श, अध्ययन सामग्री और कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जाता है।
योद्धा सेवा सम्मान यह संदेश भी देता है कि सेवा की भावना सेवानिवृत्ति के बाद समाप्त नहीं होती। भारतीय सेना का मानना है कि जो पूर्व सैनिक नागरिक जीवन में भी सार्थक योगदान देते रहते हैं, वे सेवा, नेतृत्व और राष्ट्र-निर्माण की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।
समारोह में यह भी रेखांकित किया गया कि पूर्व सैनिकों की विशेषज्ञता, अनुभव और समर्पण देशभर के समुदायों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके योगदान से राष्ट्रीय विकास और सामाजिक प्रगति को बल मिलता है।