भारतीय वायु सेना की भर्ती परीक्षा में नकल के एक गंभीर मामले में हरियाणा के चार युवकों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि ये युवक अभ्यर्थियों का रूप धारण कर रहे थे और अत्याधुनिक सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे थे। यह परीक्षा रविवार, 2 अगस्त 2026 को चेन्नई के अवाडी स्थित वायु सेना स्टेशन में अग्निवीर वायु लिखित परीक्षा के लिए आयोजित की गई थी।
यह परीक्षा अग्निवीर योजना के तहत लोअर डिवीजन क्लर्क और कुछ विवरणों में नागरिक यांत्रिक परिवहन चालक पदों के लिए थी। केवल चार रिक्तियों को भरने के लिए यह परीक्षा रखी गई थी, लेकिन देशभर से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पहुंचे थे। रिपोर्टों के अनुसार इनकी संख्या लगभग 1,000 से 1,800 के बीच थी।
धोखाधड़ी का खुलासा कैसे हुआ
यह गिरोह प्रवेशपत्रों और पहचान-पत्रों की नियमित, लेकिन कई स्तरों वाली जांच के दौरान पकड़ा गया। आरोपी प्रवेश द्वार पर पहली सुरक्षा जांच पार करने में सफल रहे, लेकिन परीक्षा कक्ष के भीतर दूसरी जांच के दौरान निरीक्षकों ने एक अभ्यर्थी के पहचान-पत्र पर लगी तस्वीर और परीक्षा दे रहे व्यक्ति के बीच स्पष्ट अंतर देख लिया।
पहचान के बाद जिस व्यक्ति को पकड़ा गया, वह हरियाणा के जींद जिले के थुआ गांव का निवासी आर. गौरव उर्फ गौरव, 21 वर्ष, था। वह एस. अमन कुमार की जगह परीक्षा दे रहा था। गौरव को हिरासत में लेकर उस कमरे तक ले जाया गया, जहां वह और उसके साथी ठहरे हुए थे। वहां की तलाशी और आगे की पूछताछ में उसी जिले के तीन अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आई।
सूचना के आधार पर अधिकारियों ने तेजी से तीन और लोगों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया। इनमें जींद जिले का एस. अनिल, 27 वर्ष, शामिल था, जो एच. सुनील उर्फ सुनील कुमार की जगह परीक्षा दे रहा था। इसके अलावा थुआ गांव, जींद के डी. सावन, 25 वर्ष, और रामना पत्ती, जींद जिले के सी. दीपक उर्फ दीपक कुमार, 24 वर्ष, को भी पकड़ा गया।
सावन और दीपक के पास से अत्यंत छिपे हुए इलेक्ट्रॉनिक साधन मिले।
नकल के लिए इस्तेमाल किए गए उपकरण
जिन दो अभ्यर्थियों के पास उपकरण मिले, उन्होंने एक सेंटीमीटर से भी छोटे सिम-सक्षम जीएसएम ईयरपीस अपने कानों में गहराई तक लगाए हुए थे। ये वायरलेस उपकरण परीक्षा कक्ष के बाहर से भेजे गए उत्तरों को प्राप्त करने के लिए बनाए गए थे। अधिकारियों ने अतिरिक्त सामान भी बरामद किया, जिसमें ब्लूटूथ डुअल सिम जीएसएम बॉक्स, ब्लूटूथ ईयरपीस, आठ मोबाइल फोन और 10 सिम कार्ड शामिल थे।
माना जा रहा है कि परीक्षा स्थल पर लगाया गया सिग्नल जैमर इन उपकरणों को निष्क्रिय कर देने में सफल रहा, जिससे परीक्षार्थियों को कोई सहायता नहीं मिल पाई।
राशि और स्वीकारोक्ति
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्हें 50,000 रुपये की अग्रिम राशि दी गई थी। यह रकम या तो प्रॉक्सी के रूप में परीक्षा देने के लिए या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से नकल कराने के लिए दी गई थी। उन्हें शेष राशि मूल अभ्यर्थियों के भर्ती प्रक्रिया पार कर नौकरी हासिल करने के बाद देने का वादा किया गया था।
चारों युवक साथ ही अवाडी पहुंचे थे और एक ही आवास में ठहरे हुए थे। वहीं से कई बैग बरामद किए गए, जिनमें प्रतिबंधित उपकरण और उनसे जुड़ा सामान रखा था।
पुलिस कार्रवाई और जांच
भारतीय वायु सेना के अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद चारों आरोपियों को मुथापुदुपेट पुलिस थाने को सौंप दिया। इस मामले में केस दर्ज कर लिया गया है। आरोपियों को मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या यह समूह किसी बड़े अंतरराज्यीय परीक्षा-धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा है। मूल अभ्यर्थियों, प्रॉक्सी की व्यवस्था करने वाले बिचौलियों और उच्च तकनीक वाले उपकरण उपलब्ध कराने वालों का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।
पहले भी इसी केंद्र पर मामला
यह इसी केंद्र पर कोई पहला मामला नहीं है। नवंबर 2024 में हरियाणा के 25 वर्षीय प्रवीण कुमार को अवाडी में इसी तरह की भारतीय वायु सेना की क्लर्क परीक्षा में अभ्यर्थी का रूप धारण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बताया गया था कि प्रक्रिया पूरी होने पर उसे लगभग 3 लाख रुपये देने का वादा किया गया था।
अवाडी के इस मामले को कुछ रिपोर्टों में “वसूली राजा” जैसी संगठित व्यवस्था बताया गया है, जो देशभर में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को प्रभावित करने वाली प्रॉक्सी और नकल की पेशेवर प्रणालियों की ओर संकेत करता है। सूक्ष्म जीएसएम ईयरपीस जैसे उच्च तकनीक वाले उपकरण ऐसे गिरोहों में लगातार उपयोग किए जा रहे हैं, जिससे भर्ती परीक्षाओं की शुचिता के सामने चुनौती बढ़ रही है।
रक्षा अभ्यर्थियों और भारतीय वायु सेना के लिए यह घटना बहुस्तरीय सत्यापन, तकनीकी रोकथाम उपायों और निरंतर सतर्कता के महत्व को रेखांकित करती है। केवल कुछ रिक्तियों और कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच चयन प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी न केवल योग्यता को प्रभावित करती है, बल्कि ऐसी सेना में अयोग्य व्यक्तियों के प्रवेश का जोखिम भी बढ़ाती है, जहां उच्चतम स्तर की ईमानदारी और क्षमता अपेक्षित होती है।
जांच आगे जारी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच में अन्य भर्ती परीक्षाओं से संबंधों की भी पड़ताल की जाएगी और हरियाणा तथा उससे बाहर सक्रिय किसी व्यापक नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश की जाएगी।