रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार रक्षा क्षेत्र से संचालित सैन्य आधुनिकीकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने यह बात भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारी के संदर्भ में कही।
14 अगस्त को आकाशवाणी के माध्यम से सैनिकों को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने पिछले 12 वर्षों में भारत के रक्षा क्षेत्र में आए बदलाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसी पहलों के कारण देश अपनी सुरक्षा जरूरतों को अधिकाधिक स्वयं पूरा कर रहा है और एक वैश्विक रक्षा निर्माण केंद्र तथा शुद्ध रक्षा निर्यातक के रूप में उभर रहा है।
रक्षा मंत्री ने बताया कि रक्षा उत्पादन 2014 में 46,000 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह पिछले एक दशक में लगभग चार गुना वृद्धि है। कुल उत्पादन में रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की हिस्सेदारी लगभग 76 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र का योगदान 24 प्रतिशत रहा।
भारत के रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह वित्त वर्ष 2013-14 में 686 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक के उच्चतम स्तर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि देश में अब 145 रक्षा निर्यातक हैं और भारतीय रक्षा उत्पाद 80 से अधिक देशों में भेजे जा रहे हैं। उन्होंने 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के रक्षा निर्यात लक्ष्य को हासिल करने का भरोसा भी जताया।
रक्षा आधुनिकीकरण पर बढ़ते वित्तीय ध्यान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रक्षा बजट वित्त वर्ष 2013-14 के 2.53 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में 7.85 लाख करोड़ रुपये हो गया है। पूंजीगत व्यय 94,588 करोड़ रुपये से बढ़कर 2.19 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट वित्त वर्ष 2014-15 के 15,283 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में 29,100 करोड़ रुपये हो गया है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा अधिग्रहण परिषद ने पिछले एक वर्ष में 8.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं के लिए आवश्यकता की स्वीकृति दी है। उन्होंने रक्षा खरीद में किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया, जिनमें क्षेत्रीय कमांडरों के लिए उपलब्ध वित्तीय सीमा में वृद्धि और स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के लिए राजस्व मार्ग से 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की खरीद शामिल है।
उन्होंने डीआरडीओ और सशस्त्र बलों की कई हालिया तकनीकी उपलब्धियों का उल्लेख किया। इनमें टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन प्रणाली का सफल परीक्षण शामिल है, जिसका उद्देश्य पारंपरिक हथियारों की सटीकता बढ़ाना है।
रक्षा मंत्री ने एमआईआरवी तकनीक से लैस उन्नत अग्नि मिसाइल के परीक्षण का भी उल्लेख किया। साथ ही लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल, रुद्र-एमआईआई एयर-टू-सर्फेस मिसाइल, नेवल एंटी-शिप मिसाइल-एसआर और पिनाका लॉन्ग-रेंज गाइडेड रॉकेट के परीक्षणों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों से भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता और प्रहार क्षमता मजबूत हो रही है।
राजनाथ सिंह ने 1,200 सेकंड से अधिक समय तक सक्रिय रूप से शीतलित पूर्ण-स्तरीय स्क्रामजेट दहनकक्ष के सफल परीक्षण को भी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने इसे हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक की दिशा में भारत की प्रगति का अहम कदम कहा। उन्होंने स्वदेशी कुशा लंबी दूरी की सतह-से-आकाश मिसाइल के पहले सफल परीक्षण का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य देश की वायु रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास सरकार का प्रमुख फोकस बना हुआ है। बेहतर संपर्क व्यवस्था और अवसंरचना से राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों के विकास को भी बल मिल रहा है। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं के समय सशस्त्र बलों की त्वरित प्रतिक्रिया और बचाव एवं राहत अभियानों में उनकी भूमिका की भी सराहना की।
रक्षा मंत्री ने सेवारत कर्मियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के लिए बजट पिछले पांच वर्षों में 300 प्रतिशत बढ़ा है।
सशस्त्र बल ध्वज दिवस कोष के तहत पेनुरी अनुदान 4,000 रुपये से बढ़ाकर 8,000 रुपये, शिक्षा अनुदान 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये और विवाह अनुदान 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया गया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि ये कदम सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण तथा गरिमा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
उन्होंने सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया, जिसमें राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में प्रशिक्षित महिला कैडेटों के पहले बैच को कमीशन किया जाना शामिल है। उन्होंने इस उपलब्धि को इस बात का प्रमाण बताया कि साहस और नेतृत्व लिंग से सीमित नहीं होते।
राजनाथ सिंह ने समुद्र प्रदक्षिणा का भी उल्लेख किया, जो भारतीय सेना के नौकायन पोत त्रिवेणी पर सवार तीनों सेनाओं की पहली सभी महिलाओं वाली विश्व परिक्रमा नौकायन यात्रा थी। उन्होंने इसे नारी शक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा राष्ट्र-निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का प्रतीक बताया।
अपने संबोधन के अंत में रक्षा मंत्री ने भारत के स्वतंत्रता सेनानियों और सशस्त्र बलों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा की जिम्मेदारी सैनिकों पर है। उन्होंने उनके साहस, अनुशासन और समर्पण की सराहना की, जो नागरिकों को सुरक्षित वातावरण में अपने सपनों को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि 2026 राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ का वर्ष है और नागरिकों से इस अवसर को नए देशभक्ति भाव और सेवा-भावना के साथ मनाने का आह्वान किया।
राजनाथ सिंह ने नागरिकों से राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय भागीदार बनने और विकसित भारत के विजन में योगदान देने की अपील की।