राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 14 अगस्त, 2026 को ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ भारत की सैन्य क्षमता का निर्णायक प्रदर्शन बताया और कहा कि इस अभियान ने आतंकियों और उनका समर्थन करने वालों को स्पष्ट तथा सख्त संदेश दिया।
देश को 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर दिए गए अपने संदेश में राष्ट्रपति ने 7 मई, 2025 को शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ का उल्लेख किया। उन्होंने सशस्त्र बलों के साहस को सलाम करते हुए कहा कि इस अभियान ने आतंकवाद के खिलाफ सटीक सैन्य कार्रवाई करने की उनकी क्षमता को सिद्ध किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि इस अभियान ने यह संदेश दिया कि आतंकियों और उनके समर्थकों को उनके कृत्यों का परिणाम भुगतना पड़ेगा, चाहे वे कहीं भी छिपने की कोशिश करें। उनके विचारों में आतंकवाद और उससे जुड़े नेटवर्क को समर्थन देने वालों के खिलाफ सरकार के लगातार रुख की झलक भी दिखी।
सिंधु जल संधि को स्थगित करने के भारत के फैसले का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने इसे राष्ट्रीय हित में उठाया गया निर्णायक कदम बताया, खासकर पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन देने के आरोपों के मद्देनजर। उन्होंने भारतीय कृषि और किसानों के लिए जल संसाधनों के महत्व पर भी बल दिया।
राष्ट्रपति ने वामपंथी उग्रवाद से निपटने में देश की प्रगति की भी चर्चा की और माओवाद के कथित अंत को एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने उन क्षेत्रों में विकास और जनभागीदारी बढ़ने की ओर ध्यान दिलाया, जो पहले उग्रवाद से प्रभावित थे।
बस्तर ओलंपिक का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि इस आयोजन में बड़ी संख्या में खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिला। उन्होंने इसे उन क्षेत्रों में विकास, खेल और सामुदायिक भागीदारी के बढ़ते एकीकरण का उदाहरण बताया, जो पहले हिंसा से प्रभावित रहे हैं।
राष्ट्रपति ने देश की बढ़ती खेल व्यवस्था की भी सराहना की और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत के बेहतर प्रदर्शन का श्रेय खेलो इंडिया जैसी पहलों तथा खेल ढांचे और विकास में बढ़ते निवेश को दिया।
जन भागीदारी पर जोर देते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि नागरिकों की भागीदारी भारत की लोकतांत्रिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने राष्ट्रीय कल्याण की पहलों को समर्थन देने और देश के विकास में योगदान करने में लोगों की भूमिका को रेखांकित किया।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि बढ़ती सांस्कृतिक गर्व भावना देश के सामूहिक आत्मविश्वास को मजबूत कर रही है। उन्होंने भारत की विरासत और विकास की आकांक्षाओं के बीच संतुलन बनाए रखने के महत्व पर बल दिया।
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर दिए गए उनके संबोधन में सशस्त्र बलों और राष्ट्रीय सुरक्षा की उपलब्धियों को विकास, जनभागीदारी, खेल और सांस्कृतिक आत्मविश्वास से जुड़े व्यापक संदेश के साथ जोड़ा गया।