भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, रविवार को नेपाल की आधिकारिक यात्रा पर काठमांडू पहुंचे। इस यात्रा का उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच घनिष्ठ रक्षा सहयोग तथा सैन्य-से-सैन्य संबंधों को और मजबूत करना है। 17 से 19 अगस्त 2026 तक निर्धारित इस दौरे के दौरान उन्हें नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल विशेष समारोह में नेपाली सेना के मानद जनरल की रैंक प्रदान करेंगे।
यह यात्रा नेपाली सेना के सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल के निमंत्रण पर हो रही है। इससे दोनों देशों के बीच विशेष और समय-परीक्षित रक्षा संबंधों की पुष्टि होती है। ये संबंध साझा मूल्यों, पारस्परिक विश्वास और लंबे समय से चले आ रहे सेना-से-सेना संबंधों पर आधारित हैं। जनरल सेठ ने 30 जून 2026 को 31वें सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला था और शीर्ष पद संभालने के बाद यह उनकी नेपाल की पहली आधिकारिक यात्रा है।
रविवार शाम त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने पर जनरल सेठ का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ स्वागत नेपाली सेना के उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रदीप जंग के.सी. और उनकी पत्नी ने किया। भारतीय सेना प्रमुख के साथ उनकी पत्नी श्रीमती कोमल सेठ भी हैं, जो आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष हैं।
आगमन के दिन जनरल सेठ ने नेपाल में भारत के राजदूत श्री नवीन श्रीवास्तव से भी मुलाकात की। दोनों के बीच भारत-नेपाल संबंधों को और व्यापक बनाने के तरीकों पर चर्चा हुई। काठमांडू स्थित भारत दूतावास ने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच विशिष्ट रक्षा साझेदारी को रेखांकित करती है।
यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम
17 अगस्त, सोमवार को जनरल सेठ काठमांडू के ऐतिहासिक और औपचारिक स्थल टुंडिखेल में आर्मी पवेलियन पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद उन्हें नेपाली सेना मुख्यालय में गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। भारतीय सेना प्रमुख अपने समकक्ष जनरल अशोक राज सिग्देल से चर्चा करेंगे और नेपाली सेना के सैन्य संचालन महानिदेशक से आपसी हित और साझा रणनीतिक चिंताओं से जुड़े विषयों पर जानकारी लेंगे।
उसी दिन वे राष्ट्रपति भवन, शीत्तल निवास, में आयोजित अलंकरण समारोह में शामिल होंगे। दोनों सेनाओं के बीच चली आ रही एक अनूठी परंपरा के अनुरूप राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल उन्हें नेपाली सेना के मानद जनरल की रैंक प्रदान करेंगे।
18 अगस्त, मंगलवार को जनरल सेठ शिवपुरी में आर्मी कमांड एंड स्टाफ कोर्स के छात्र अधिकारियों को संबोधित करेंगे। वे वहां प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षकों और विदेशी छात्र अधिकारियों से भी संवाद करेंगे। दिन में नेपाल के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों के साथ भी आपसी हित के विषयों पर बातचीत होगी।
19 अगस्त, बुधवार को जनरल सेठ पोखरा जाएंगे, जहां वे पूर्व सैनिक रैली में शामिल होंगे। वे वीर नारियों और वीरता पुरस्कार प्राप्त करने वालों को सम्मानित करेंगे तथा भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों से बातचीत करेंगे। इसके बाद उसी दिन उनके भारत लौटने का कार्यक्रम है।
76 वर्ष पुरानी अनूठी परंपरा
एक-दूसरे के सेना प्रमुख को मानद जनरल की रैंक देने की परंपरा भारत-नेपाल सैन्य संबंधों की विशिष्ट विशेषता है, जिसकी शुरुआत 1950 में हुई थी। स्वतंत्र भारत के पहले सेना प्रमुख फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा नेपाली सेना के मानद जनरल की रैंक पाने वाले पहले भारतीय अधिकारी थे। इसके जवाब में भारत ने 1969 में तत्कालीन नेपाली सेना प्रमुख जनरल सुरेंद्र बहादुर शाह को भारतीय सेना के मानद जनरल की रैंक प्रदान की थी।
तब से दोनों देशों के सेना प्रमुख राजनीतिक बदलावों से परे इस परंपरा को निभाते रहे हैं। हाल ही में नवंबर 2024 में राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने तत्कालीन भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी को यह मानद रैंक प्रदान की थी। दिसंबर 2024 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जनरल अशोक राज सिग्देल को भारत यात्रा के दौरान भारतीय सेना के मानद जनरल की रैंक दी थी।
भारत-नेपाल रक्षा साझेदारी का संदर्भ
भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और धार्मिक संबंध अत्यंत गहरे हैं, जिन्हें अक्सर “रोटी-बेटी का रिश्ता” कहा जाता है। जनकपुर और अयोध्या, तथा लुम्बिनी और बोधगया के बीच आध्यात्मिक संबंध भी इस स्वाभाविक साझेदारी को और मजबूत करते हैं। 1950 की शांति और मैत्री संधि खुली सीमा और जन-जन के संबंधों की आधारशिला मानी जाती है। गोरखा सैनिक दो शताब्दियों से अधिक समय से भारतीय सेना में विशिष्ट सेवा देते आए हैं।
सैन्य-से-सैन्य सहयोग में नियमित उच्चस्तरीय आदान-प्रदान, सूर्य किरण जैसे संयुक्त अभ्यास, अधिकारियों का प्रशिक्षण, आपदा प्रतिक्रिया सहयोग और क्षमता निर्माण कार्यक्रम शामिल हैं। यह यात्रा इन संस्थागत संबंधों को गहरा करने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने के निरंतर प्रयासों की पृष्ठभूमि में हो रही है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इसका उद्देश्य परस्पर समझ बढ़ाना, समान हितों पर विचारों का आदान-प्रदान करना और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।
जनरल धीरज सेठ के बारे में
जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून के पूर्व छात्र हैं। उन्हें 20 दिसंबर 1986 को आर्मर्ड कॉर्प्स की 2nd Lancers (Gardner’s Horse) में कमीशन मिला था। वे जनरल शंकर रायचौधरी के 1997 में पद संभालने के बाद इस पद पर आने वाले पहले आर्मर्ड कॉर्प्स अधिकारी और इस कॉर्प्स से सेना प्रमुख बनने वाले सातवें अधिकारी हैं।
करीब चार दशकों के करियर में उन्होंने एक आर्मर्ड रेजिमेंट, एक आर्मर्ड ब्रिगेड, जम्मू-कश्मीर में एक राष्ट्रीय राइफल्स फोर्स, सुदर्शन चक्र कोर (XXI कोर), दिल्ली क्षेत्र और दो परिचालन कमानों — दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान — का नेतृत्व किया है। सेना प्रमुख बनने से पहले वे उप सेना प्रमुख भी रह चुके हैं। वे परम विशिष्ट सेवा पदक, उत्तम युद्ध सेवा पदक और अति विशिष्ट सेवा पदक के प्राप्तकर्ता हैं।
जनरल धीरज सेठ की यह यात्रा भारत-नेपाल रक्षा संबंधों की संस्थागत निरंतरता और मजबूती को दर्शाती है। सात दशक से भी अधिक पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दोनों सेनाएं यह दिखा रही हैं कि उनकी साझेदारी पारस्परिक सम्मान, साझा इतिहास और क्षेत्रीय शांति तथा स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है।