सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने निदेशालय जनरल सूचना प्रणाली में मिशन स्वायत्तता प्रयोगशाला और सेंसर-शूटर एकीकरण प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। यह पहल भारतीय सेना की उभरती प्रौद्योगिकियों को परीक्षण, एकीकरण और परिचालन उपयोग के लिए तेज़ी से आगे बढ़ाने की क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
नव उद्घाटित प्रयोगशालाओं का फोकस स्वायत्तता, डेटा-केंद्रित दृष्टिकोण और सेंसर से शूटर एकीकरण को आगे बढ़ाने पर है। इन सुविधाओं का उद्देश्य प्रयोगशाला स्तर पर विकसित हो रही तकनीकों को युद्धक्षेत्र के लिए तैयार क्षमताओं में बदलने की प्रक्रिया को समर्थन देना है।
मिशन स्वायत्तता प्रयोगशाला सेना के स्वायत्तता से जुड़े प्रयासों में योगदान देगी, जबकि सेंसर-शूटर एकीकरण प्रयोगशाला का ध्यान सेंसर और शूटर प्रणालियों के एकीकरण पर होगा। इसका लक्ष्य सूचना और पहचान से लेकर परिचालन क्षमता तक के संक्रमण को अधिक प्रभावी बनाना है।
यह पहल भारतीय सेना को उभरती प्रौद्योगिकियों का परीक्षण और एकीकरण करने में सक्षम बनाने के लिए है। साथ ही, इसका उद्देश्य विकास और प्रयोग के चरण से आगे बढ़ाकर उन्हें युद्धक्षेत्र में लागू होने योग्य क्षमता में बदलने की गति बढ़ाना है।
उद्घाटन के दौरान जनरल धीरज सेठ ने विजय की परिकल्पना को दोहराया। उन्होंने नवाचार, एकीकरण और आत्मनिर्भरता को एक चुस्त, प्रौद्योगिकी-सक्षम और भविष्य के लिए तैयार बल के निर्माण के प्रमुख तत्व बताया।
डेटा-केंद्रित दृष्टिकोण और सेंसर-शूटर एकीकरण पर दिया गया जोर सेना की उस प्राथमिकता को दर्शाता है, जिसमें तकनीकी विकास को परिचालन क्षमता में बदला जा रहा है। ये प्रयोगशालाएँ ऐसे वातावरण के रूप में काम करेंगी, जहाँ उभरती तकनीकों का परीक्षण, एकीकरण और विकास युद्धक्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप किया जा सके।
इन दोनों प्रयोगशालाओं का उद्घाटन भारतीय सेना की प्रौद्योगिकी-आधारित क्षमता विकास की दिशा में एक और कदम है। इस पूरी पहल में प्रौद्योगिकी से क्षमता और फिर क्षमता से युद्धक लाभ तक पहुँचने पर जोर बना हुआ है।