सैन्य संचार अभियांत्रिकी महाविद्यालय, महू में आयोजित रेजिमेंटल सिग्नलर ऑफिसर्स कोर्स 20 अगस्त 2026 को संपन्न हुआ। यह प्रशिक्षण अधिकारियों की बटालियन स्तर पर सिग्नल और सैन्य संचार संबंधी दक्षता को बढ़ाने पर केंद्रित था।
इस कोर्स में भारतीय सेना के विभिन्न अंगों के अधिकारियों के साथ नेपाल के अधिकारियों ने भी भाग लिया। इससे प्रशिक्षण कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग और पेशेवर अनुभवों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण पक्ष जुड़ा।
सैन्य संचार आधुनिक युद्ध संचालन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके जरिए कमांडर और फॉर्मेशन संपर्क बनाए रखते हैं, युद्धाभ्यास का समन्वय करते हैं, परिचालन जानकारी का आदान-प्रदान करते हैं और प्रभावी कमान एवं नियंत्रण सुनिश्चित करते हैं।
इस कोर्स का उद्देश्य उन अधिकारियों को आवश्यक पेशेवर ज्ञान देना था, जो बटालियन स्तर पर संचार व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालते हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी अधिकारियों ने बटालियन स्तर की सिग्नल प्रणाली और सैन्य अभियानों से जुड़ी संचार आवश्यकताओं की समझ को और मजबूत किया।
भारतीय सेना के अलग-अलग अंगों के अधिकारियों की भागीदारी से विभिन्न लड़ाकू और सहायक संरचनाओं की संचार आवश्यकताओं को समझने का व्यापक अवसर मिला। अलग-अलग सामरिक परिस्थितियों में काम करने वाले इन अंगों के लिए भरोसेमंद संचार स्थापित करना परिचालन प्रभावशीलता का अनिवार्य तत्व है।
नेपाल के अधिकारियों की मौजूदगी ने भारत-नेपाल की दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी और सैन्य-से-सैन्य संबंधों को भी रेखांकित किया। दोनों सेनाओं के बीच प्रशिक्षण आदान-प्रदान से अधिकारियों को पेशेवर अनुभव साझा करने, परस्पर कार्यक्षमता बढ़ाने और स्थायी संस्थागत संबंध विकसित करने का अवसर मिलता है।
कोर्स के समापन पर मेजर जनरल गौतम महाजन, एसएम, डीसीसीआई, एमसीटीई ने छात्र अधिकारियों को संबोधित किया। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को सम्मानित भी किया।
आर्मी एयर डिफेंस के कैप्टन आयुष असवाल को रेजिमेंटल सिग्नलर ऑफिसर्स कोर्स का सर्वश्रेष्ठ छात्र घोषित किया गया। यह सम्मान कार्यक्रम के दौरान उनके समग्र प्रदर्शन के लिए दिया गया।
नेपाल के कैप्टन अंजल बनिया को सर्वश्रेष्ठ विदेशी छात्र घोषित किया गया। इससे नेपाली प्रतिभागियों के बेहतर प्रदर्शन और भारतीय सेना द्वारा संचालित पेशेवर सैन्य पाठ्यक्रमों में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया गया।
महू स्थित सैन्य संचार अभियांत्रिकी महाविद्यालय भारतीय सेना की प्रमुख तकनीकी प्रशिक्षण संस्थाओं में से एक है। यह सैन्य संचार, सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार और उनसे जुड़े क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करने में अहम भूमिका निभाता है।
जैसे-जैसे युद्धक्षेत्र संचार डिजिटल नेटवर्क, डेटा-आधारित प्रणालियों और अधिक उन्नत कमान एवं नियंत्रण क्षमताओं के साथ विकसित हो रहा है, वैसे-वैसे एमसीटीई जैसी संस्थाओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। यह संस्थान अधिकारियों और कर्मियों को प्रौद्योगिकी-प्रधान सैन्य अभियानों के लिए तैयार करता है।
बटालियन स्तर पर प्रभावी सिग्नल व्यवस्था कमांडर, अधीनस्थ इकाइयों और सहायक संरचनाओं के बीच संचार बनाए रखने के लिए आवश्यक है। यह संचार कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, प्रतिकूल मौसम और संघर्षपूर्ण परिचालन वातावरण में भी भरोसेमंद रहना चाहिए।
नेटवर्क-केंद्रित और प्रौद्योगिकी-समर्थित युद्ध की बढ़ती अहमियत ने सैन्य संचार से जुड़ी जिम्मेदारियों को और विस्तृत किया है। सिग्नल से जुड़े अधिकारियों के पास संचार प्रणालियों की मजबूत समझ के साथ यह बोध भी होना चाहिए कि वे सामरिक अभियानों को कैसे समर्थन देती हैं।
रेजिमेंटल सिग्नलर ऑफिसर्स कोर्स ने अधिकारियों को अपने-अपने फॉर्मेशन में संचार की योजना बनाने और उसका प्रबंधन करने के लिए आवश्यक पेशेवर ज्ञान देकर परिचालन तैयारी को सीधे मजबूत किया। 20 अगस्त को कोर्स का सफल समापन भारतीय और नेपाली अधिकारियों के लिए एक और प्रशिक्षण उपलब्धि रहा।
कैप्टन आयुष असवाल को सर्वश्रेष्ठ छात्र और कैप्टन अंजल बनिया को सर्वश्रेष्ठ विदेशी छात्र के रूप में मिली पहचान ने कार्यक्रम में प्रोत्साहित किए गए उच्च पेशेवर मानकों को भी उजागर किया। नेपाल के अधिकारियों की भागीदारी ने भारत और नेपाल के बीच निकट सैन्य संबंधों को और सुदृढ़ किया तथा मित्र सेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने में सैन्य शिक्षा की भूमिका को दर्शाया।