उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के छोटे भाई सूबेदार मेजर शैलेन्द्र मोहन बिष्ट को भारतीय सेना में मानद लेफ्टिनेंट के पद पर पदोन्नत किया गया है। अगस्त 2026 के मध्य से अंत के बीच सामने आई यह जानकारी गढ़वाल राइफल्स और गढ़वाल स्काउट्स के इस जूनियर कमीशंड अधिकारी के लंबे और अनुशासित सैन्य करियर की एक और उपलब्धि मानी जा रही है।
वरिष्ठ रक्षा पत्रकार मनजीत नेगी ने, जिन्होंने 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद चीन सीमा पर शैलेन्द्र की तैनाती की पहली रिपोर्ट दी थी, इस पदोन्नति को गर्व के साथ साझा किया। उन्होंने इसे समर्पण, अनुशासन और कड़ी मेहनत से अर्जित मान्यता बताया। 22 अगस्त 2026 के आसपास सोशल मीडिया पर भी तब के सूबेदार मेजर को मानद लेफ्टिनेंट बनाए जाने की पुष्टि की गई।
करियर का सफर
शैलेन्द्र मोहन बिष्ट गढ़वाल राइफल्स से जुड़े हैं और उन्होंने गढ़वाल स्काउट्स इकाई में लंबे समय तक सेवा दी है। यह इकाई मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों के स्थानीय युवाओं की भर्ती करती है और सीमा सुरक्षा से जुड़े दायित्व निभाती है। उन्होंने चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा के मना सेक्टर के पास भी सेवा की है, जो ऊंचाई वाला संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
वर्ष 2023 में उन्हें सूबेदार मेजर के पद पर पदोन्नति मिली थी, जो रेजिमेंट में जूनियर कमीशंड अधिकारी का सर्वोच्च पद है। उस समय उनकी तैनाती लैंसडाउन स्थित गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर में थी। मानद लेफ्टिनेंट का पद चयनित सूबेदार मेजरों और पात्र सूबेदारों को लंबी, उत्कृष्ट और विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है।
परिवार और सादा जीवन
योगी आदित्यनाथ, जिनका जन्म अजय मोहन बिष्ट के रूप में हुआ था, चार भाइयों और तीन बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। उनका परिवार उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल स्थित पंचूर गांव से है। उनके पिता आनंद सिंह बिष्ट वन रक्षक रहे, जबकि माता सवित्री देवी गृहिणी थीं। परिवार ने हमेशा सादगी और कम सार्वजनिक उपस्थिति बनाए रखी है।
शैलेन्द्र अधिकतर राजनीतिक सुर्खियों से दूर रहे हैं। पहले दिए गए साक्षात्कारों में उन्होंने परिवार के भीतर अपने बड़े भाई को “महाराज जी” कहा था और यह बताया था कि दोनों अपने-अपने दायित्वों में राष्ट्र की सेवा करते हैं। उनके अन्य भाई-बहनों में बड़े भाई मनवेन्द्र मोहन और छोटे भाई महेन्द्र मोहन शामिल हैं। उनकी एक बहन शशि पायल क्षेत्र में एक मंदिर के पास साधारण चाय-नाश्ते की दुकान चलाती हैं।
पदोन्नति का महत्व
यह पदोन्नति भारतीय सेना की उस परंपरा को रेखांकित करती है, जिसमें लंबे समय तक सेवा देने वाले जूनियर कमीशंड अधिकारियों की पेशेवर उत्कृष्टता, इकाई स्तर पर नेतृत्व और कर्तव्यनिष्ठा को मान्यता दी जाती है। खासकर उत्तरी सीमाओं जैसे कठिन परिचालन क्षेत्रों में यह सम्मान और भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
गढ़वाल स्काउट्स से सूबेदार मेजर और अब मानद लेफ्टिनेंट तक पहुंचने वाले इस सैनिक के लिए यह उनके दशकों लंबे समर्पित सेवा-जीवन की उचित स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है। इस विकास को उन लोगों ने भी गौरव का क्षण माना है, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उनकी प्रारंभिक सेवा से उनके करियर पर नजर रखे हुए थे।