एयर वाइस मार्शल मनी मिधा, रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी के महानिदेशक ने पुणे स्थित मिलिट्री इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मिलिट, में “अंतरिक्ष युद्ध और उपग्रह खुफिया: वर्तमान क्षमताएं, चुनौतियां और आगे की राह” विषय पर एक अतिथि व्याख्यान दिया। इस दौरान उन्होंने आधुनिक सैन्य अभियानों में अंतरिक्ष क्षेत्र के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।
व्याख्यान में अंतरिक्ष आधारित प्रौद्योगिकियों और उपग्रह-सक्षम क्षमताओं की तेजी से बदलती भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने कहा कि ये क्षमताएं राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और सशस्त्र बलों की कार्यक्षमता बढ़ाने में अहम योगदान दे रही हैं।
अधिकारियों और प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए एयर वाइस मार्शल मिधा ने कहा कि भूमि, समुद्र, वायु और साइबर के साथ अब अंतरिक्ष भी एक महत्वपूर्ण संचालन क्षेत्र के रूप में उभरा है। उनके अनुसार, यह भविष्य के युद्धों की प्रकृति को गहराई से प्रभावित करेगा।
अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि उपग्रह आधारित प्रणालियां स्थिति की बेहतर समझ, खुफिया जानकारी जुटाने, निगरानी, टोही, सुरक्षित संचार, नेविगेशन और सटीक लक्ष्य साधने में मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि इन क्षमताओं से कमांडरों को विभिन्न मोर्चों पर तेज, सूचित और अधिक प्रभावी निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी के महानिदेशक ने अंतरिक्ष के बढ़ते सैन्यीकरण से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा की। इनमें महत्वपूर्ण अंतरिक्ष संपत्तियों की सुरक्षा, उभरते प्रतिअंतरिक्ष खतरे और सैन्य अभियानों को समर्थन देने के लिए मजबूत एवं सुरक्षित अंतरिक्ष आधारित अवसंरचना विकसित करने की आवश्यकता शामिल है।
एयर वाइस मार्शल मिधा ने स्वदेशी प्रौद्योगिकियों, नवाचार और संयुक्त क्षमता विकास को अपनाकर भारत की अंतरिक्ष सुरक्षा संरचना को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उन्नत उपग्रह प्रणालियों, अंतरिक्ष निगरानी और उभरती प्रौद्योगिकियों में सतत निवेश भविष्य के संघर्षों के लिए परिचालन तैयारियों को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण होगा।
यह व्याख्यान प्रतिभागियों के लिए अंतरिक्ष युद्ध के बदलते रणनीतिक परिदृश्य और रक्षा योजना, परिचालन तत्परता तथा बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभियानों में उपग्रह खुफिया के बढ़ते महत्व को समझने का अवसर बना।
मिलिट में हुई यह बातचीत रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी की उस प्रतिबद्धता को भी दोहराती है, जिसके तहत वह अंतरिक्ष को एक रणनीतिक क्षेत्र के रूप में समझने और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने पर काम कर रही है। साथ ही, यह सशस्त्र बलों को प्रौद्योगिकी आधारित क्षमता विकास और एकीकृत रक्षा योजना के माध्यम से भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में भी अहम है।