गुवाहाटी, 5 अक्टूबर, 2026: असम पुलिस ने सेना की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी एक पाकिस्तानी खुफिया एजेंट तक पहुंचाने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें एक सेवानिवृत्त सेना का जवान भी शामिल है, जो इस समय सेना के साथ संविदा आधार पर काम कर रहा था। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने रविवार को बताया कि यह कार्रवाई केंद्रीय एजेंसियों से मिली सूचना के आधार पर की गई।
गुवाहाटी में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सरमा ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों की सूचना के अनुसार असम पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति सेवानिवृत्त सेना का जवान है, लेकिन वर्तमान में संविदा आधार पर सेना के साथ काम कर रहा था।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आरोप है कि दोनों पाकिस्तान के संपर्क में थे और सेना की आवाजाही से जुड़ी जानकारी दे रहे थे। उन्होंने कहा कि दोनों को केंद्रीय एजेंसियों के हवाले किया जाएगा।
सरमा के अनुसार, शुरुआती रिपोर्टों में संकेत मिला है कि दोनों को जानकारी निकालने के लिए हनीट्रैप में फंसाया गया था। कुछ रिपोर्टों में उनके हवाले से कहा गया कि यह हनीट्रैप ऑनलाइन यौन गिरोहों के जरिए चलाया गया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच आगे बढ़ेगी। सेवानिवृत्त जवान की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने जांच की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए उससे जुड़ी और जानकारी नहीं दी है।
नामजद आरोपी और कार्रवाई
असम पुलिस ने एक अलग बयान में आरोपी की पहचान अभिषेक कुमार सिंह, जिन्हें अभिषेक कृष्ण सिंह भी कहा गया है, के रूप में की। वह बिहार के पूर्वी चंपारण जिले का 31 वर्षीय निवासी है और गुवाहाटी में एक किराए के मकान में रह रहा था।
पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध से जुड़ी प्रारंभिक सूचना तेजपुर स्थित गजराज कोर की सैन्य खुफिया इकाई ने साझा की थी। इसके बाद विशेष कार्य बल ने सोनितपुर पुलिस के साथ मिलकर सूचना को आगे विकसित किया। सिंह पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंट के निर्देश पर राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का संदेह था, जिसमें सुरक्षा बलों से जुड़ी गोपनीय जानकारी देना भी शामिल था।
3 और 4 अक्टूबर की मध्य रात्रि में विशेष कार्य बल ने कार्रवाई कर सतगांव थाना क्षेत्र के गांधी नगर स्थित एक किराए के मकान से उसे पकड़ लिया। मौके से एक मोबाइल फोन, सिम कार्ड और कुछ दस्तावेज बरामद किए गए, जिन्हें आपत्तिजनक बताया गया है। आगे की जांच जारी है, जिसमें पाकिस्तान आधारित लोगों के साथ कथित संपर्क की अवधि भी शामिल है।
केंद्रीय एजेंसियों को सौंपने की तैयारी
सरमा ने कहा कि दोनों आरोपियों को केंद्रीय एजेंसियों को सौंपा जाएगा। पुलिस ने इस मामले को संवेदनशील बताते हुए यह नहीं बताया है कि कथित तौर पर साझा की गई जानकारी किस प्रकृति की थी, संचार का तरीका क्या था या संपर्क कराने वाले व्यक्ति की पहचान क्या है।
यह मामला पूर्वोत्तर में जासूसी से जुड़े उन मामलों की श्रृंखला में जुड़ता है, जिनमें पाकिस्तानी खुफिया संपर्क के आरोप में पहले भी रक्षा कर्मियों और नागरिकों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हालांकि, अधिकारियों ने मौजूदा मामले में किसी परिचालनगत नुकसान की पुष्टि नहीं की है।