कच्छ (गुजरात), 25 अक्टूबर 2026: सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने गुजरात के कच्छ जिले के सर क्रीक इलाके में चार पाकिस्तानी मछुआरों को पकड़कर उनकी फाइबर की नाव जब्त की है। आरोप है कि वे केकड़े पकड़ने के लिए भारतीय जलक्षेत्र में दाखिल हुए थे। भारत-पाकिस्तान सीमा के इस संवेदनशील इलाके में विशेष खुफिया सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई।
बीएसएफ की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पकड़े गए मछुआरों की पहचान कादिर थाइमोर, मुहम्मद मूसा, अजगर थाइमोर और अहसान जाट के रूप में हुई है। चारों पाकिस्तान के सिंध प्रांत के चाच जान खान गांव के निवासी हैं। अन्य बरामदगी, जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई के बारे में तत्काल जानकारी उपलब्ध नहीं थी।
बीएसएफ के जवानों ने इलाके के दलदली, ज्वार-भाटे वाले जलमार्गों की निगरानी के दौरान इन मछुआरों को पकड़ा। अधिकारियों ने बताया कि अनधिकृत आवाजाही और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए पश्चिमी सीमा पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सर क्रीक क्षेत्र में मछली पकड़ने के दौरान पाकिस्तानी मछुआरों के भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश करने या भटककर आने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। यहां उथला पानी, दूर तक फैले दलदल और ज्वार-भाटे से बदलता जलस्तर नाव चलाने और सीमा की निगरानी को मुश्किल बनाते हैं।

कच्छ के रण में स्थित सर क्रीक करीब 96 किलोमीटर लंबी, संकरी और दलदली ज्वारीय खाड़ी है। यह भारत के गुजरात और पाकिस्तान के सिंध प्रांत को अलग करते हुए अरब सागर में खुलती है। इस खाड़ी को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से सीमा विवाद अनसुलझा है, जिसके कारण यह क्षेत्र सामरिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।
विवाद की जड़ें 1914 के बॉम्बे सरकार के एक प्रस्ताव की अलग-अलग व्याख्याओं और नौवहन योग्य जलमार्गों में सीमा तय करने वाले थालवेग सिद्धांत की प्रयोज्यता से जुड़ी हैं। इसका असर अरब सागर में दोनों देशों की समुद्री सीमा और उनके विशेष आर्थिक क्षेत्रों के सीमांकन पर पड़ता है। वर्ष 1968 के न्यायाधिकरण के फैसले ने कच्छ के रण से जुड़े अधिकांश बड़े क्षेत्रीय दावों का निपटारा कर दिया था, लेकिन सर क्रीक का मुद्दा अनसुलझा रह गया।