डोराहा में सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) के साथ तैनात 55 वर्षीय पंजाब होम गार्ड के जवान को खुद को आईपीएस अधिकारी बताने, सड़क किनारे स्थित ढाबे के कर्मचारियों को धमकाने, मारपीट करने और ग्राहकों के साथ अभद्रता करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
आरोपी की पहचान लुधियाना जिले के पायल तहसील के मलौद स्थित चोमन गांव निवासी अमरजीत सिंह के रूप में हुई है। वह हाल ही में जेल ड्यूटी से स्थानांतरित होकर जीआरपी में आया था और डोराहा रेलवे स्टेशन पर तैनात था।
घटना का विवरण
पुलिस और सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, यह घटना शुक्रवार देर रात डोराहा में राष्ट्रीय राजमार्ग यानी जीटी रोड पर स्थित 3-जे ढाबे पर हुई। अमरजीत सिंह वर्दी में आईपीएस बैज लगाकर वहां पहुंचा। उसने कर्मचारियों से पूछा कि प्रतिष्ठान इतनी रात तक क्यों खुला है।
जब एक कर्मचारी ने बात समझाने की कोशिश की, तो उसने खुद को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बताया, कर्मचारियों को गालियां दीं, एक कर्मचारी और दूसरे स्टाफ सदस्य के साथ धक्का-मुक्की की और ढाबा तुरंत बंद न करने पर परिणाम भुगतने की धमकी दी। उस समय मौजूद ग्राहकों के साथ भी उसने अभद्र व्यवहार किया।
रिपोर्टों के मुताबिक वह बुलेट मोटरसाइकिल पर आया था। कुछ विवरणों में यह भी कहा गया है कि उसकी आईपीएस जैसी वर्दी विशेष रूप से सिली हुई थी और उसे पहले भी इसी वेश में इलाके में घूमते हुए देखा गया था, जहां वह स्थानीय लोगों और दुकानदारों को डराता था।
पुलिस कार्रवाई और आरोप
शिकायत मिलने के बाद डोराहा पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। थाना प्रभारी जश्नप्रीत सिंह ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि पहचान की जांच के बाद आरोपी की पुष्टि स्थानीय स्तर पर तैनात पंजाब होम गार्ड कर्मचारी के रूप में हुई। फर्जी आईपीएस वर्दी और बैज बरामद कर लिए गए हैं।
आरोपी से यह पूछताछ की जा रही है कि आईपीएस चिह्न उसे कहां से मिले और क्या उसने इससे पहले भी खुद को आईपीएस अधिकारी बताकर लोगों को ठगा या डराया था।
उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 204, 205 और 351(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है। धारा 204 सार्वजनिक सेवक का रूप धारण करने, धारा 205 धोखाधड़ी के इरादे से सार्वजनिक सेवक द्वारा उपयोग किए जाने वाले वस्त्र या चिह्न धारण करने और धारा 351(2) आपराधिक धमकी से संबंधित है।
थाना प्रभारी जश्नप्रीत सिंह ने यह भी कहा कि आरोपी की मानसिक स्थिति स्थिर नहीं है और वह अवसादरोधी दवाएं ले रहा है।
खन्ना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. दर्पण अहलूवालिया के स्तर पर निर्देशित जांच जारी है, ताकि पूरी परिस्थितियों, वर्दी और बैज के स्रोत तथा ऐसे किसी पूर्व आचरण का पता लगाया जा सके।
यह घटना आधिकारिक चिह्नों के अनधिकृत उपयोग और स्थानीय पुलिस द्वारा पहचान-पत्रों की त्वरित जांच की जरूरत को सामने लाती है।