नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026: खुफिया ब्यूरो (आईबी) ने पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की एक नई और उन्नत जासूसी पद्धति को लेकर चेतावनी जारी की है। इसके तहत वरिष्ठ भारतीय सेना और पुलिस अधिकारियों के नाम पर फर्जी संचार माध्यम बनाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य कनिष्ठ कर्मियों को फंसाकर संवेदनशील जानकारी हासिल करना है।
यह चेतावनी पंजाब के फिरोजपुर जिले के काला वाला गांव से पति-पत्नी की गिरफ्तारी के बाद आई है। सेना की खुफिया शाखा ने पुलिस के साथ मिलकर उन्हें पकड़ा था। यह गांव भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आखिरी गांव बताया गया है। दंपति पर आईएसआई से जुड़े एक नेटवर्क को चलाने का आरोप है, जिसने भारतीय सेना की प्रतिष्ठानों से जुड़ी अत्यंत संवेदनशील जानकारियां एकत्र कीं और भेजीं।
आरोप है कि इस नेटवर्क ने सैन्य ठिकानों के नक्शे, हथियार और गोला-बारूद भंडार, छावनी क्षेत्र, सैनिकों की आवाजाही, सीमा क्षेत्रों में तैनाती तथा समग्र सैन्य तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी जुटाई। इस मामले में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 की धारा 3 और 4 के तहत केस दर्ज किया गया है।
जांच में सामने आया है कि महिला ने कथित तौर पर पुलिस अधिकारी बनकर इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया मंचों के जरिए सेना के कर्मियों से संपर्क किया। आरोप है कि उसने संदिग्ध हनी ट्रैप अभियान के जरिये संबंध बनाने की कोशिश की, ताकि गोपनीय जानकारी हासिल की जा सके।
यह भी बताया गया है कि दंपति पाकिस्तान स्थित तस्करों के साथ सीमा से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा कर रहा था। अधिकारियों के अनुसार, आईएसआई लंबे समय से हनी ट्रैप का इस्तेमाल करती रही है, लेकिन अब पहचान छिपाकर वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर संचार माध्यम बनाना एक गंभीर चिंता बन गया है।
आईबी अधिकारी के मुताबिक, ऐसे माध्यम तुरंत सक्रिय नहीं किए जाते। पहले कनिष्ठ अधिकारियों पर नजर रखी जाती है, जो दबाव में आ सकते हैं। कुछ समय बाद अचानक अत्यधिक तात्कालिकता वाले संदेश भेजे जाते हैं, जिससे कृत्रिम आपात स्थिति बनती है। इससे कनिष्ठ अधिकारी सत्यापन किए बिना जानकारी भेजने लगते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि कई मामलों में ऐसे संदेशों ने कनिष्ठ कर्मियों पर निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार करने और अनधिकृत नेटवर्क तक पहुंच देने का दबाव बनाया। आवश्यक जानकारी मिलते ही फर्जी संचार माध्यम तुरंत बंद कर दिया जाता है। इस छोटे परिचालन जीवन-चक्र के कारण जांच एजेंसियों के लिए कड़ियां जोड़ना और असली संचालकों तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
अधिकारियों ने इसे एक नई चुनौती बताया है। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद से आईएसआई की कार्यप्रणाली में यह बदलाव और तेज हुआ है। मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए इस अभियान के दौरान और उसके बाद भारत ने सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया और खुफिया बढ़त भी हासिल की।
इस दौरान कई आईएसआई मॉड्यूल और हनी ट्रैप नेटवर्क ध्वस्त किए गए। पाकिस्तान को भी अपने कई मोर्चों को दोबारा खड़ा करने या घुसपैठ बनाए रखने में मुश्किलें आईं। आकलन के अनुसार, इन्हीं झटकों के बाद आईएसआई ने अल्पकालिक फर्जी संचार नेटवर्क तेजी से खड़े करने की नई रणनीति अपनाई है, ताकि भारतीय सशस्त्र बलों से अधिकतम जानकारी निकाली जा सके।
सुरक्षा एजेंसियां फिरोजपुर नेटवर्क के पूरे दायरे और उससे जुड़े अन्य मॉड्यूल की जांच कर रही हैं। इस घटनाक्रम ने सेना और पुलिस कर्मियों, खासकर सीमा क्षेत्रों में, वरिष्ठ अधिकारियों के नाम से आने वाले तात्कालिक संदेशों की सत्यता की कड़ाई से जांच करने की आवश्यकता को और स्पष्ट कर दिया है।