सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज (सीएपीएसएस) ने नई दिल्ली में सर्विलांस, सी4आई2 और इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स 2026 संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें वरिष्ठ सैन्य नेतृत्व, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के नेता और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ शामिल हुए।
संगोष्ठी में आधुनिक बहु-क्षेत्रीय युद्धक्षेत्र के लिए उभरती क्षमताओं पर चर्चा की गई। इसमें निगरानी, कमान, नियंत्रण, संचार, कंप्यूटर, खुफिया और सूचना यानी सी4आई2 तथा उन्नत इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल तकनीकों के रणनीतिक और परिचालन महत्व पर विशेष जोर दिया गया।
उद्घाटन संबोधन एयर मार्शल तेजपाल सिंह, उप वायुसेना प्रमुख (डीसीएएस) ने दिया। उन्होंने समकालीन और भविष्य के सैन्य अभियानों की जटिलताओं से निपटने में प्रौद्योगिकी-सक्षम क्षमताओं के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।
चर्चाओं ने सैन्य और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को उभरती परिचालन आवश्यकताओं तथा बहु-क्षेत्रीय अभियानों में उन्नत निगरानी और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल प्रणालियों के एकीकरण पर विचार-विमर्श का मंच दिया।
इस संगोष्ठी में सशस्त्र बलों, रक्षा अनुसंधान प्रतिष्ठान और निजी उद्योग के हितधारक भी जुड़े। इससे क्षमता विकास, तकनीकी नवाचार और परिचालन उपयोग पर दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान हुआ।
कार्यक्रम के दौरान “बहु-क्षेत्रीय अभियानों में निगरानी, इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स और सी4आई2 की रणनीतिक भूमिका” शीर्षक एक विस्तृत रिपोर्ट भी जारी की गई। यह रिपोर्ट तेजी से आपस में जुड़े युद्धक्षेत्रों में इन तकनीकों की भूमिका का केंद्रित आकलन प्रस्तुत करती है।
संगोष्ठी में उन्नत सेंसरों, निगरानी क्षमताओं और नेटवर्क आधारित कमान एवं नियंत्रण प्रणालियों के एकीकरण की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। इससे सूचना प्रवाह तेज करने, स्थिति की बेहतर समझ विकसित करने और निर्णय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर रहा।
कार्यक्रम ने सशस्त्र बलों, डीआरडीओ, उद्योग और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के बीच निरंतर सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। यह सहयोग बहु-क्षेत्रीय युद्ध की मांगों के अनुरूप क्षमताएं विकसित करने और अपनाने के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
सीएपीएसएस की इस पहल ने प्रौद्योगिकी-आधारित सैन्य रूपांतरण और भारत की सशस्त्र सेनाओं के लिए भविष्य के लिए तैयार क्षमताओं के विकास पर बढ़ते ध्यान को और मजबूत किया।