केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के एक वरिष्ठ लेखा अधिकारी को उस समय गिरफ्तार किया, जब वह अपनी पत्नी के माध्यम से 10 लाख रुपये की रिश्वत कथित रूप से लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। अधिकारी पर एक निजी कंपनी की लंबित अनुबंध नवीनीकरण फाइल की मंजूरी तेजी से कराने के लिए 15 लाख रुपये मांगने का आरोप है।
आरोपी की पहचान संदीप के रूप में हुई है, जो भारतीय सिविल लेखा सेवा के 2020 बैच के अधिकारी हैं। वह नई दिल्ली में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में उप नियंत्रक, लेखा और स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार के पद पर तैनात थे।
मामला कैसे सामने आया
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, एजेंसी ने 18 अगस्त 2026 को शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज किया। शिकायत में कहा गया था कि अधिकारी ने फाइल को जल्द निपटाने के लिए शिकायतकर्ता से 15 लाख रुपये की अनुचित मांग की थी। यह फाइल एक निजी कंपनी के अनुबंध नवीनीकरण से जुड़ी थी, जो उनके पास स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार के रूप में लंबित थी।
बातचीत के बाद आरोपी कथित तौर पर 10 लाख रुपये लेकर नवीनीकरण फाइल आगे बढ़ाने पर सहमत हो गया। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने प्रारंभिक जांच की, साक्ष्य जुटाए और उसी दिन जाल बिछाया। अधिकारियों ने संदीप को उसकी पत्नी के माध्यम से रिश्वत राशि स्वीकार करते हुए पकड़ लिया।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के प्रवक्ता ने कहा कि मंगलवार को जाल बिछाया गया और संदीप को उसकी पत्नी के माध्यम से रिश्वत राशि स्वीकार करते समय पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की टीमों ने अधिकारी के कार्यालय की तलाशी ली और कुछ फाइलें जब्त कीं। आगे की जांच जारी है।
अधिकारी की भूमिका
स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार और उप नियंत्रक, लेखा के रूप में अधिकारी मंत्रालय के भीतर वित्तीय जांच और मंजूरियों से जुड़ी एक अहम जिम्मेदारी संभाल रहे थे। केंद्रीय मंत्रालयों में स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार व्यय, अनुबंध और नवीनीकरण से जुड़े प्रस्तावों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंतिम स्वीकृति से पहले फाइल आगे बढ़ाने के लिए उनकी सहमति या सलाह अक्सर आवश्यक होती है। मंजूरी में देरी या रुकावट से अवैध लाभ की मांग के अवसर बन सकते हैं, और शिकायत में इस मामले में भी यही आरोप लगाया गया था।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई और स्थिति
सार्वजनिक सेवक को गिरफ्तार कर लिया गया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने सार्वजनिक रूप से उस निजी कंपनी या उस पत्नी का नाम नहीं बताया है, जिसके जरिए कथित रूप से पैसे लिए गए। जांच जारी है ताकि घटनाक्रम की पूरी कड़ी, संबंधित अभिलेखों और अन्य संभावित संलिप्त व्यक्तियों की भूमिका का पता लगाया जा सके।
यह गिरफ्तारी वित्तीय मंजूरियों और अनुबंध संबंधी फाइलों को संभालने वाले सरकारी अधिकारियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई का हिस्सा है। लंबित फाइलों को निपटाने के लिए रिश्वत मांगने के मामले एजेंसी के पास आने वाली शिकायतों में एक बार-बार सामने आने वाली श्रेणी बने हुए हैं।
मामला अभी जांच के चरण में है। अभी तक आरोपपत्र दाखिल नहीं किया गया है, और अधिकारी आगे की कानूनी कार्रवाई तक एजेंसी की हिरासत में हैं।