नई दिल्ली, 3 नवंबर 2026: दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को बारामूला के सांसद अब्दुल राशिद शेख की नियमित जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। इंजीनियर राशिद के नाम से मशहूर शेख जम्मू-कश्मीर में कथित आतंकी फंडिंग और अलगाववादी गतिविधियों से जुड़े राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के 2017 के मामले में आरोपी हैं।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा। शेख की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने अधिवक्ता विख्यात ओबेरॉय के सहयोग से पक्ष रखा। एनआईए की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा पेश हुए, जिनके साथ विशेष लोक अभियोजक अक्षय मलिक थे।
एनआईए ने शेख को अगस्त 2019 में गिरफ्तार किया था। तब से वह तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं। उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए और भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश सहित अन्य अपराधों के आरोप हैं।
यह मामला मई 2017 में आरसी संख्या 10/2017/एनआईए/डीएलआई के तहत दर्ज किया गया था। शुरुआती आरोपपत्र और पहले पूरक आरोपपत्र में शेख का नाम नहीं था। अक्टूबर 2019 में दाखिल दूसरे पूरक आरोपपत्र में उन्हें आरोपी बनाया गया। मार्च 2022 में शेख और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे।
जमानत के पक्ष में हरिहरन ने दलील दी कि शेख करीब सात साल हिरासत में बिता चुके हैं। उन्होंने इसी मामले के सह-आरोपी शबीर अहमद शाह को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत का हवाला दिया। समान अपराधों के आरोपों का सामना कर रहे शाह को मार्च 2026 में लंबी कैद और सुनवाई में देरी के आधार पर जमानत मिली थी। अदालत पहले भी करीब 240 गवाह होने का संज्ञान ले चुकी है और कह चुकी है कि मुकदमा पूरा होने में काफी समय लग सकता है।
एनआईए की ओर से लूथरा ने जमानत का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि शेख ने अभियोजन के गवाहों को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि अब तक दर्ज गवाहियों से तीन गवाहों पर प्रभाव डालने के संकेत मिले हैं और कम से कम दो संरक्षित गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर चुके हैं। एजेंसी ने शेख पर भारत के खिलाफ भाषण देने, भारत-विरोधी गतिविधियों का समर्थन करने और अंतरिम जमानत के दौरान गवाहों से मिलने के भी आरोप लगाए। एनआईए ने उनके कथित प्रभाव का हवाला देते हुए जमानत न देने की मांग की।
बचाव पक्ष ने गवाहों को प्रभावित करने के आरोप खारिज किए। उसने कहा कि जिन गवाहों का जिक्र किया गया है, वे लंबे समय से शेख के साथ पेशेवर तौर पर जुड़े रहे हैं। इनमें चालक और निजी सहायक भी शामिल हैं। बचाव पक्ष के मुताबिक, संबंधित अवधि का ज्यादातर हिस्सा शेख ने हिरासत में बिताया है। उनके वकील ने यह भी कहा कि सांसद के रूप में शेख ने भारत के संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ ली है।
शेख को इससे पहले सांसद पद की शपथ लेने, संसद सत्रों में भाग लेने, चुनाव प्रचार करने और पिता के निधन से जुड़े कार्यों के लिए अलग-अलग मौकों पर अंतरिम जमानत या हिरासत पैरोल मिल चुकी है। सितंबर 2026 में हाई कोर्ट ने एनआईए से पूछा था कि क्या उन्हें दिल्ली तक रहने की पाबंदी जैसी कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी जा सकती है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर के लिए तय की गई थी।
एनआईए के इस व्यापक मामले में आरोप है कि पाकिस्तान स्थित नेटवर्क और हवाला के जरिए धन जुटाकर कश्मीर घाटी में अलगाववादी तथा आतंकी गतिविधियों को समर्थन दिया गया। यासीन मलिक भी इस मामले के आरोपियों में शामिल हैं। मुकदमे की सुनवाई अभी जारी है।